'इसकी नजर से नहीं बच सकती दुश्मन की गतिविधि'
हिंद महासागर सामरिक और आर्थिक दृष्टि से भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। पड़ोसी देश चीन यहां लगातार अपनी स्थिति को मजबूत करता जा रहा है। उसके साथ समुद्री शक्ति संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
समुद्री सीमा में किसी भी प्रकार की घुसपैठ को नाकाम करने को गुड़गांव के एयरफोर्स स्टेशन परिसर में मॉनीटरिंग सिस्टम इंफार्मेशन मैनेजमेंट एंड एनॉलसिस सेंटर (आईमैक) तैयार किया गया है। जिसकी नजर से दुश्मन की कोई भी गतिविधि नहीं छिप सकती।
भारत में 26/11 जैसी घटनाएं नहीं हो इसके लिए समुद्री और कोस्टल एरिया की सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है। हिंद महासागर के भारतीय समुद्री सीमा में हर आने-जाने वाली बोट, शिप पर नजर रखी जा रही है।
सामरिक और आर्थिक दृष्टि से जरूरी डाटा का आदान-प्रदान त्वरित गति से रिसर्च एंड एनालसिस विंग (रॉ), आईबी, एनएसए और राज्य सरकारों को आईमैक के माध्यम से किया जाएगा। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने कहा कि समुद्री सीमा में चलने वालेतकरीबन ढाई लाख फिशिंग बोट में ट्रांसपाउंडर लगाए जाने का प्लान है।
ताकि अब न हों मुंबई जैसी घटनाएं
उन्होंने हिंद महासागर को एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन कहा। उन्होंने कहा कि समुद्री सीमा की सुरक्षा इतनी मजबूत की जाएगी, जिससे कि यहां मुंबई जैसी घटनाएं नहीं हो पाएं।
उन्होंने बिना चीन का नाम लिए कहा कि भारत की नीति आक्रमाकता कभी नहीं रही है। वह अपनी शक्तियों का प्रयोग सहयोग और विकास के लिए करता है। उन्होंने जीरो एरर की बात की और कहा कि सुरक्षा की एक भी कड़ी को कमजोर नहीं छोड़ा जाएगा।
नेवी के अधिकरी ने बताया कि सिर्फ समुद्र के अंदर ही नहीं उससे सटे जमीनी क्षेत्रों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। आईमैक देश भर के नेशनल कमांड कंट्रोल कम्युनिकेशन एंड इंटेलीजेंस नेटवर्क (एनसी3आई) का मुख्य नर्व सेंटर है।