Satyendar Jain Bail: सत्येंद्र जैन की जमानत पर फैसला सुरक्षित, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किया गया था गिरफ्तार
सत्येंद्र जैन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन ने कहा कि उनके क्लाइंट 13 दिन की पूछताछ के बाद भी न्यायिक हिरासत में हैं। विशेष सीबीआई जज गीतांजलि गोयल ने लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट अपना फैसला 18 जून को सुना सकती है।
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राउज एवेन्यू कोर्ट में मंगलवार को सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर शनिवार को फैसला आएगा। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया गया था। विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है। ईडी ने जैन को धन शोधन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत हिरासत में लिया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
मंगलवार सुबह 11 बजे सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसबी राजू और सत्येंद्र जैन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया। यह याचिका नौ जून को दाखिल की गई थी।
सत्येंद्र जैन के वकील का पक्ष
जैन के अधिवक्ता एन हरिहरन का कहना है कि सत्येंद्र जैन पिछले 13 दिनों से रिमांड पर हैं। जांच में सहयोग कर रहे हैं और उनके भागने या फरार होने की संभावना नहीं है। ईडी ने पहले ही दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और उनसे छेड़छाड़ की संभावना भी नहीं है। तीनों कंपनियों से संबंध के बारे में पूछताछ भी तब होती अगर 20 फीसदी से अधिक का शेयरधारक हो या बोर्ड का सदस्य है।
उन्होंने कहा कि जैन ने जिंदल ट्रस्ट के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और वहां से कोई लेन देन नहीं है। सत्येंद्र जैन स्लीप एम्निया के शिकार हैं जो गंभीर स्थिति है। स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है और इससे अचानक मौत हो सकती है। ऐसे में 24 घंटे एक परिचारक की जरूरत होती है। अदालत से मांग है कि जैन को जमानत दें। एक मंत्री होने के नाते समाज से जुड़े और वह जांच के लिए उपलब्ध रहेंगे।
ईडी का पक्ष
एएसजी राजू ने कहा कि इस मामले की जांच में सामने आया कि नकदी को वैध बनाकर उपयोग में लाया जाता है। इस दौरान लाला शेर सिंह ट्रस्ट से भी इसी तरह के लेन-देन का पता चला। जब हमने उनसे पूछा तो उन्होंने यह नहीं कहा कि वह शेर सिंह ट्रस्ट से संबंधित हैं।
उन्होंने कहा कि हमने स्पष्ट रूप से उनसे ट्रस्ट के बारे में पूछा, लेकिन उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट के बारे में कभी नहीं सुना। 10 जून को एक दस्तावेज सामने आया जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वह ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। वैभव जैन और अंकुश जैन सत्येंद्र जैन के बेनामीदार थे। जब सत्येंद्र जैन ने एक कंपनी छोड़ी तो अंकुश जैन के शेयर में वृद्धि हुई थी। वैभव जैन के अंजान होने की बात गलत है। इस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती क्योंकि गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास किए जा सकते हैं। इस संज्ञेय अपराध में प्राथमिकी दर्ज की गई है।