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दिल्ली में रंग ला रही है कोरना से जंग, जुलाई में 80 फीसदी कम रही मृत्युदर
Mon, 17 Aug 2020 06:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 17 Aug 2020 06:50 AM IST
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राजधानी में कोरोना के प्रकोप को लेकर तस्वीर बदलती हुई नजर आ रही है। इस कड़ी में पहले के मुकाबले कोरोना से होने वाली मृत्युदर में 80 फीसदी तक कमी आई है। ऐसे में एक ओर जहां जुलाई में कोरोना के मामलों को लेकर विशेषज्ञों द्वारा अधिक आंकड़ों का अनुमान लगाया जा रहा था वहीं, दूसरी ओर सरकार की नीतियों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रयास से यह तस्वीर बदली है।
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यदि जून की बात करें तो महीने के शुरुआती 12 दिनों में कोरोना से होने वाली मृत्यु का आंकड़ा 1089 पर पहुंच चुका था। इसको देखते हुए तमाम स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जुलाई में आंकड़ों में अत्यधिक इजाफा होने की बात कही थी। हालांकि, इसके बाद सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना के इलाज को लेकर अपनी नीतियों में बदलाव किया, जिससे आंकड़ों में कमी देखी गई।
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यही कारण था कि जुलाई महीने तक मृत्युदर में 44 फीसदी तक गिरावट आ चुकी थी जिससे मौत का आंकड़ा 605 पर पहुंचा था। वहीं, जून से जुलाई के बीच में 24 घंटे के भीतर होने वाली मौतें भी 34 फीसदी से घटकर 15 फीसदी तक पहुंच गई थीं। इसके साथ ही भर्ती होने के चार दिन में होने वाली मौत की दर 67 फ़ीसदी से घटकर सीधे 35 फ़ीसदी पर थम गई थी।
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इस संबंध में राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नोडल ऑफिसर डॉक्टर अजीत जैन का कहना है कि मौत के आंकड़ों में गिरावट के लिए डेथ रिव्यू मीटिंग कर नीतियों में बदलाव करना, टेस्टिंग की क्षमता बढ़ाना, एंबुलेंस की फ्रीक्वेंसी बढ़ाना, कोरोना का एप बनाकर आईसीयू बेड की जानकारी मुहैया कराना, दवाइयों को निशुल्क करना, प्लाज्मा को प्लाज्मा बैंक के माध्यम से इसकी उपलब्धता बढ़ाना जैसे कारक शामिल हैं।
इसके साथ ही अस्पतालों द्वारा भी मरीज को भर्ती होने में लगने वाले समय को कम किया गया और इलाज का प्रोटोकॉल अपनाकर अर्ली वार्निंग सिस्टम को जारी किया गया जिससे मरीज की गंभीर स्थिति होने पर उसे आईसीयू में शिफ्ट किया जा सके। यह सभी कदम कोरोना की मृत्यु दर कम करने के लिए प्रभावी रूप से सिद्ध साबित हुए।
आरएमएल में सबसे अधिक रहा मृत्यु का प्रतिशत
दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मौत का प्रतिशत सबसे अधिक रहा। यहां 12 जून से भर्ती होने वाले मरीजों में 80 फीसदी मरीजों की मौत हुई। इसके अलावा सफदरजंग में 40 फीसदी मौत का आंकड़ा रहा। एलएनजेपी में 28 फीसदी, राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी में छह फीसदी आंकड़े रहे। इसके ठीक एक महीने बाद आरएमएल में 58 फीसदी, एलएनजेपी में 16 फीसदी, राजीव गांधी सुपर सुपर स्पेशलिटी में छह फीसदी और सफदरजंग में 31 फीसदी मौत की दर पाई गई।