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Delhi NCR News: रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम शुरू करने के लिए 30 जून की डेडलाइन
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एलजी की समीक्षा बैठक में विभागों ने बताया, हाईटेक मॉड्यूलर तकनीक और डिजिटल पीजोमीटर से होगी निगरानी
डीडीए के खेल परिसरों में बनेंगे 24 नए हार्वेस्टिंग सिस्टम, पुराने ढांचे भी होंगे दुरुस्त
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
मानसून से पहले दिल्ली के भूजल को रिचार्ज करने और बारिश की एक-एक बूंद पानी को सहेजने के लिए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने व्यापक कार्ययोजना की समीक्षा की है। एलजी ने कहा कि दिल्ली की प्यास बुझाने के लिए अब केवल कागजी दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर ठोस काम दिखना चाहिए। उन्होंने दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को सख्त निर्देश दिए कि 30 जून तक शहर के सभी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हर हाल में चालू हो जाने चाहिए।
इस मुहिम का उद्देश्य न केवल मानसून के दौरान जल संचयन करना है, बल्कि भविष्य की शहरी योजना के लिए एक डाटा-आधारित आधार तैयार करना भी है। बैठक में खास फोकस डीडीए पर रहा, क्योंकि दिल्ली में उसके पास सबसे अधिक भूमि है। बताया गया कि डीडीए अपने मौजूदा 624 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में से 621 को पहले ही चालू कर चुका है। एलजी के निर्देशों के बाद, अब डीडीए 24 नए अत्याधुनिक सिस्टम विकसित करने की प्रक्रिया में है। यह नए सिस्टम दिल्ली के प्रमुख सार्वजनिक केंद्रों और खेल परिसरों में लगाए जा रहे हैं। इनमें भीकाजी कामा प्लेस की मल्टी-लेवल कार पार्किंग, विकास सदन और साकेत, कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज, चिल्ला, यमुना, पूर्वी दिल्ली, नेताजी सुभाष और द्वारका सेक्टर-23 स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। इसके अलावा, पालम-द्वारका फ्लाईओवर के नीचे विशेष रोडसाइड इंस्टॉलेशन भी किए जा रहे हैं ताकि सड़कों पर जमा होने वाले पानी को सीधे जमीन के अंदर भेजा जा सके। एलजी ने 34 पुराने सिस्टमों की मरम्मत और सफाई का काम भी 30 जून तक पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है।
डिजिटल पीजोमीटर से मापा जाएगा भूजल का स्तर
एमसीडी ने जानकारी दी कि उसने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। निगम के पास 1,289 छतों पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था है, जिनमें से 1,277 स्थानों पर रखरखाव का काम पूरा हो चुका है। बागवानी विभाग के अंतर्गत आने वाले 400 विशेष ग्राउंड रिचार्ज पिट्स में से आधे से अधिक की सफाई हो चुकी है और शेष के लिए जून के अंत तक की समय सीमा तय की गई है। एनजीटी के निर्देशों का पालन करते हुए एमसीडी ने पहली बार डिजिटल लेवल इंडिकेटर पीजोमीटर का सफल परीक्षण शुरू किया है। ये हाईटेक उपकरण पंजाबी बाग के एमसी प्राइमरी स्कूल, तुर्कमान गेट रोड और शाहदरा नॉर्थ के डीडीए एलआईजी फ्लैट्स परिसर में लगाए गए हैं, जो रीयल टाइम में यह बताएंगे कि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भूजल स्तर को बढ़ाने में कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं।
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कम जगह में अधिक पानी बचाने का फॉर्मूला
एनडीएमसी ने पुरानी पारंपरिक प्रणालियों को छोड़कर आधुनिक मॉड्यूलर रेन वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक को अपनाया है। यह तकनीक उन शहरी इलाकों के लिए वरदान है, जहां जगह की कमी है। यह सिस्टम पॉलीप्रोपाइलीन पॉलीमर ब्लॉक से बने होते हैं, जिन्हें बनाने में वायु प्रदूषण शून्य होता है और इनके ऊपर की सतह को तुरंत वाहनों के आवागमन या खेल के मैदान के रूप में उपयोग किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि एनडीएमसी ने 2025-26 के दौरान 61 ऐसे मॉड्यूलर पिट्स बनाए हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 30,000 लीटर है। एलजी ने निर्देश दिया है कि शेष 50 पिट्स की सफाई और मरम्मत का काम 25 जून तक पूरा किया जाए।
डार्क जोन और गिरते जलस्तर वाले इलाकों पर विशेष नजर
दिल्ली में जल संरक्षण की यह योजना केवल गड्ढे खोदने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। एलजी के निर्देश पर, नए मॉड्यूलर रिचार्ज पिट्स के लिए साइटों का चयन केंद्रीय भूजल बोर्ड के साथ समन्वय कर किया गया है। इसका मुख्य फोकस उन इलाकों पर है जहां भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जैसे नॉर्थ एवेन्यू, साउथ एवेन्यू, शांति पथ, सत्य मार्ग और सरोजिनी नगर। एलजी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दिल्ली के सभी वर्षा जल संचयन ढांचों की कुल क्षमता का आकलन करें।
तैयारी हो कि पहली बारिश से भर जाए भूगर्भ: संधू
एलजी ने कहा कि इस पूरी कवायद का लक्ष्य ये सुनिश्चित करना है कि मानसून की पहली बारिश के साथ ही दिल्ली की धरती को रिचार्ज करने का काम शुरू हो जाए। एलजी ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक धीमी प्रक्रियाओं को छोड़ आधुनिक और उच्च-क्षमता वाली तकनीकों को अपनाना अब दिल्ली की मजबूरी भी और जरूरत भी है।
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डीडीए के खेल परिसरों में बनेंगे 24 नए हार्वेस्टिंग सिस्टम, पुराने ढांचे भी होंगे दुरुस्त
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
मानसून से पहले दिल्ली के भूजल को रिचार्ज करने और बारिश की एक-एक बूंद पानी को सहेजने के लिए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने व्यापक कार्ययोजना की समीक्षा की है। एलजी ने कहा कि दिल्ली की प्यास बुझाने के लिए अब केवल कागजी दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर ठोस काम दिखना चाहिए। उन्होंने दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को सख्त निर्देश दिए कि 30 जून तक शहर के सभी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हर हाल में चालू हो जाने चाहिए।
इस मुहिम का उद्देश्य न केवल मानसून के दौरान जल संचयन करना है, बल्कि भविष्य की शहरी योजना के लिए एक डाटा-आधारित आधार तैयार करना भी है। बैठक में खास फोकस डीडीए पर रहा, क्योंकि दिल्ली में उसके पास सबसे अधिक भूमि है। बताया गया कि डीडीए अपने मौजूदा 624 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में से 621 को पहले ही चालू कर चुका है। एलजी के निर्देशों के बाद, अब डीडीए 24 नए अत्याधुनिक सिस्टम विकसित करने की प्रक्रिया में है। यह नए सिस्टम दिल्ली के प्रमुख सार्वजनिक केंद्रों और खेल परिसरों में लगाए जा रहे हैं। इनमें भीकाजी कामा प्लेस की मल्टी-लेवल कार पार्किंग, विकास सदन और साकेत, कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज, चिल्ला, यमुना, पूर्वी दिल्ली, नेताजी सुभाष और द्वारका सेक्टर-23 स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। इसके अलावा, पालम-द्वारका फ्लाईओवर के नीचे विशेष रोडसाइड इंस्टॉलेशन भी किए जा रहे हैं ताकि सड़कों पर जमा होने वाले पानी को सीधे जमीन के अंदर भेजा जा सके। एलजी ने 34 पुराने सिस्टमों की मरम्मत और सफाई का काम भी 30 जून तक पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है।
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डिजिटल पीजोमीटर से मापा जाएगा भूजल का स्तर
एमसीडी ने जानकारी दी कि उसने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। निगम के पास 1,289 छतों पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था है, जिनमें से 1,277 स्थानों पर रखरखाव का काम पूरा हो चुका है। बागवानी विभाग के अंतर्गत आने वाले 400 विशेष ग्राउंड रिचार्ज पिट्स में से आधे से अधिक की सफाई हो चुकी है और शेष के लिए जून के अंत तक की समय सीमा तय की गई है। एनजीटी के निर्देशों का पालन करते हुए एमसीडी ने पहली बार डिजिटल लेवल इंडिकेटर पीजोमीटर का सफल परीक्षण शुरू किया है। ये हाईटेक उपकरण पंजाबी बाग के एमसी प्राइमरी स्कूल, तुर्कमान गेट रोड और शाहदरा नॉर्थ के डीडीए एलआईजी फ्लैट्स परिसर में लगाए गए हैं, जो रीयल टाइम में यह बताएंगे कि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भूजल स्तर को बढ़ाने में कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं।
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कम जगह में अधिक पानी बचाने का फॉर्मूला
एनडीएमसी ने पुरानी पारंपरिक प्रणालियों को छोड़कर आधुनिक मॉड्यूलर रेन वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक को अपनाया है। यह तकनीक उन शहरी इलाकों के लिए वरदान है, जहां जगह की कमी है। यह सिस्टम पॉलीप्रोपाइलीन पॉलीमर ब्लॉक से बने होते हैं, जिन्हें बनाने में वायु प्रदूषण शून्य होता है और इनके ऊपर की सतह को तुरंत वाहनों के आवागमन या खेल के मैदान के रूप में उपयोग किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि एनडीएमसी ने 2025-26 के दौरान 61 ऐसे मॉड्यूलर पिट्स बनाए हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 30,000 लीटर है। एलजी ने निर्देश दिया है कि शेष 50 पिट्स की सफाई और मरम्मत का काम 25 जून तक पूरा किया जाए।
डार्क जोन और गिरते जलस्तर वाले इलाकों पर विशेष नजर
दिल्ली में जल संरक्षण की यह योजना केवल गड्ढे खोदने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। एलजी के निर्देश पर, नए मॉड्यूलर रिचार्ज पिट्स के लिए साइटों का चयन केंद्रीय भूजल बोर्ड के साथ समन्वय कर किया गया है। इसका मुख्य फोकस उन इलाकों पर है जहां भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जैसे नॉर्थ एवेन्यू, साउथ एवेन्यू, शांति पथ, सत्य मार्ग और सरोजिनी नगर। एलजी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दिल्ली के सभी वर्षा जल संचयन ढांचों की कुल क्षमता का आकलन करें।
तैयारी हो कि पहली बारिश से भर जाए भूगर्भ: संधू
एलजी ने कहा कि इस पूरी कवायद का लक्ष्य ये सुनिश्चित करना है कि मानसून की पहली बारिश के साथ ही दिल्ली की धरती को रिचार्ज करने का काम शुरू हो जाए। एलजी ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक धीमी प्रक्रियाओं को छोड़ आधुनिक और उच्च-क्षमता वाली तकनीकों को अपनाना अब दिल्ली की मजबूरी भी और जरूरत भी है।