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हैरतअंगेज! यहां होता है लाशों का कारोबार
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Tue, 28 Jan 2014 05:08 PM IST
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गुड़गांव में स्वास्थ्य विभाग के पास अभी तक शव वाहन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यहां निजी एंबुलेंस में शव ढोना कारोबार बन गया है।
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हालांकि, नियमों के अनुसार एंबुलेंस में शव नहीं ले जाया जा सकता। लेकिन शव वाहन न होने के कारण एंबुलेंस चालक लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। निजी एंबुलेंस चालक सिविल अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जमा रहते हैं।
जब भी कोई शव ले जाना होता है तो इनमें ऐसी होड़ मचती है, जैसे कि सवारियां लेते समय अवैध वाहन चालकों के बीच देखी जाती है। बाकायदा मोल भाव होता है। अंत में जिसका पलड़ा भारी पड़ता है, वो शव लेकर निकल पड़ता है।
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शव ले जाने के ही नहीं, बल्कि घायलों को ले जाने के लिए भी नियम काफी सख्त हैं। ऐसे में लोगों के पास निजी एंबुलेंस चालक की मनमानी सहने के अलावा अन्य कोई विकल्प शेष नहीं बचता।
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क्या है नियम
नियमों के अनुसार, मरीज को किसी प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाना है तो सरकारी एंबुलेंस में नहीं ले जाया जा सकता। इसके लिए संबंधित डॉक्टर और आला अधिकारियों की विशेष अनुमति की जरूरत होती है। जिले से बाहर किसी सरकारी अस्पताल में भी मरीज को रेफर करना पड़े तो भी इसी प्रक्रिया को दोहराया जाता है। इसके अलावा किसी भी हालात में शवों को एंबुलेंस में ढोने की अनुमति नहीं है।
ऐसे चल रहा धंधा
सरकारी एंबुलेंस पर तैनात एक चालक ने बताया कि प्राइवेट एंबुलेंस चालक तो यूपी और बिहार तक शव ले जाते हैं। इसके लिए 20 से 25 हजार रुपये की डिमांड की जाती है। अस्पताल के कुछ कर्मचारी भी प्राइवेट एंबुलेंस चालकों के साथ मिले रहते हैं। यह सब सेटिंग कर लेते हैं और सौदा पक्का होते ही एंबुलेंस चालकों को बुला लेते हैं। अस्पताल प्रशासन भी इस बात को भली भांति जानता है, लेकिन शव वाहन की व्यवस्था न होने के कारण बेबस है।