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हिंदू शरणार्थियों का दर्द: पाकिस्तान में उजड़े घर, अब भारत में भी छिनने जा रही छत; Video में बेघर होने की दहशत

Sun, 14 Jul 2024 03:16 AM IST
Vikas Kumar आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 14 Jul 2024 03:16 AM IST
सार

बस्ती में रहने वालीं कौशल्या बागड़ी डबडबाई आंखों से बताती हैं कि वह लोग वर्ष 2011 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हैदराबाद से मजनू का टीला स्थित हिंदू शरणार्थी बस्ती में रहने आए थे। घर पर छोटे-छोटे बच्चे और जवान बेटियां हैं। इन्हें कहां लेकर जाएं, कुछ समझ नहीं आ रहा है।

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DDA issued notices to those living in the refugee colony living illegally in Majnu ka Tila
हिंदू शरणार्थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जाएं तो जाएं कहां, समझेगा कौन यहां.......यह फिल्मी गीत पाकिस्तान से आकर दिल्ली के मजनूं के टीला इलाके में शरणार्थी बस्तियों में रह रहे हिंदू रिफ्यूजी परिवारों पर सटीक बैठता है। पहले वह पाकिस्तान से उजाड़े गए, अब यहां भी दिन-रात सिर से छत छिनने का डर मंडरा रहा है। हर बार डीडीए की ओर से जब घर हटाने का नोटिस मिलता है तो उनके दिल की धड़कनें बढ़ जातीं हैं। हाल ही में डीडीए ने एक बार फिर नोटिस जारी कर उनकी नींदें हराम कर दीं हैं। इसके चलते कइयों के घर बीती रात से चूल्हा नहीं जला है तो उनके बच्चों हीं नहीं महिलाओं और बुजुर्गों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।

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बस्ती में रहने वालीं कौशल्या बागड़ी डबडबाई आंखों से बताती हैं कि वह लोग वर्ष 2011 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हैदराबाद से मजनू का टीला स्थित हिंदू शरणार्थी बस्ती में रहने आए थे। घर पर छोटे-छोटे बच्चे और जवान बेटियां हैं। इन्हें कहां लेकर जाएं, कुछ समझ नहीं आ रहा है। वह कहतीं हैं कि वहां उनके पास सब कुछ था, बस जीवन खतरे में था। यहां आकर जीवन तो बच गया, लेकिन जिंदगी का अंधियारा अब तक दूर नहीं हो सका है। इस तरह ही हिंदू शरणार्थियों बस्ती में हर चेहरे पर उदासी है। शरणार्थी बस्ती में लगभग 150 हिंदू परिवार रहते हैं, जिनमें करीब सात सौ लोग हैं। सिसकते हुए नानकी बागड़ी कहती हैं कि पाकिस्तान में जब रिश्तेदारों को संपर्क करते हैं तो वह पूछते हैं कि भारत ने उन्हें क्या दिया। यह बताते हुए उनके आंखों में आंसू आ जाते हैं।

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शुक्रवार शाम को कुछ सरकारी अधिकारी आए थे। उन्होंने यहां से हटने के लिए कहा है। इससे पूरी बस्ती में डर का माहौल है। पहले पाकिस्तान से उजड़े अब दिल्ली में आशियाना छिन रहा है। बस्ती के प्रधान दयाल दास कहते हैं कि संकट बच्चियों की आबरू, परिवार की जिंदगी पर था तो रोते-बिलखते अपना वतन छोड़ दिया। दिल्ली में 2011 में आ गए। अब यहां भी हालात विकट होते जा रहे हैं। वह बताते हैं कि यह छह माह में हटाने का दूसरा नोटिस है। उन्होंने कहा कि मामला कोर्ट में है और अगली सुनवाई 10 सितंबर को है।

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घर का चूल्हा नहीं जला
शराणर्थी बस्ती में नोटिस आने के बाद कई घरों में रात से चूल्हा तक नहीं जला है। यहां रहने वाले लोग कहते हैं कि रात भर से लोग हटने के डर से रो रहे हैं। बच्चों का स्कूल चल रहा है। ऐसे में उनकी पढ़ाई बीच में छोड़कर कहां जाएं। लोगों ने कहा कि सरकार उन्हें नागरिकता दे रही है। यहां करीब 40 लोगों को नागरिकता भी मिल गई है। ऐसे में रहने का भी स्थायी समाधान करना चाहिए। सरकार से अपील है कि उन्हें यहां से कहीं न भेजें।

बेहतर भविष्य की तलाश में आए भारत
पाकिस्तान में सिंध प्रांत के हैदराबाद से आए रामेश्वर कहते हैं कि वहां उनके पास जमीन जायदाद, खेत-खलिहान सब था। लेकिन, वहां हिंदू होने की वजह से उनके साथ भेदभाव किया गया। उन्हें परेशान किया गया, उनकी संपत्ति हड़प ली गई। इसके चलते उन्होंने पाकिस्तान छोड़कर भारत आने का फैसला किया। उम्मीदों के साथ भारत आए इन परिवारों को एक दशक बीत गया है, लेकिन दुश्वारियां यहां भी पीछा नहीं छोड़ रही हैं। शरणार्थी मनीषा अपना दर्द बयां करते हुए कहती हैं कि वहां महिलाओं को जीने की आजादी नहीं थी। घर से निकलना भी मुश्किल होता था। यहां आकर नया जीवन तो मिला, लेकिन अभावों में जिंदगी बीत रही है।

दोपहर बाद खोली लोगों ने दुकानें
डीडीए की कार्रवाई के डर से लोगों ने दोपहर तक दुकानें व रेहड़ी बंद रखीं। इसके बाद कुछ दुकानें दोपहर बाद खोल दी गईं। इनमें लोग रोजमर्रा का सामान खरीदते दिखे। दुकान पर सामान खरीदने पहुंचे रोहित ने बताया कि कब यहां से हटना पड़़े, किसी को नहीं पता। ऐसे में खाने का सामान रहेगा तो रात कट जाएगी। यह दिन देखना पड़ेगा, कभी सपने में भी नहीं सोचा था।

डीडीए का चला बुलडोजर
सिविल लाइन स्थित खैबर पास इलाके में डीडीए का अतिक्रमण पर बुलडोजर चला। डीडीए की कार्रवाई से लोगों में रोष है। लोगों का कहना है कि वह यहां लगभग 50 साल से अधिक समय से रह रहे हैं। अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई के लिए पहले से सूचना नहीं दी गई। कई घरों के मलबे में उनका सारा समान दब गया है। इस सबके बीच इलाके में अतिक्रमण के खिलाफ देर शाम तक कार्रवाई चलती रही। लोग अपनी आंखों के सामने अपने घरों को उजड़ता देखते रहे।

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