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अपनी खोई हुई जमीन फिर से ढूंढेगा डीडीए

ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 07 Nov 2014 02:37 AM IST
dda is searching its own lands
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दिल्ली विकास प्राधिकरण अपनी जमीन ढूंढने में जुट गया है। अब डीडीए की वैसी जमीन पर नजर है जिसपर बंटवारे के समय में कब्जा कर लिया गया था। बाद में कब्जा वाले जमीन की खरीद-बिक्री भी हुई।
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‘डैमेज‘ या लीज का भुगतान करने के आधार पर वे अपना अधिकार अभी भी जमाए हैं। इसी नजूल संपत्तियों पर डीडीए की नजर है। डीडीए अब इस जमीन के लिए नई नीति तैयार कर रहा है।

डीडीए उपाध्यक्ष बलविंदर कुमार ने बताया कि दिल्ली की 23 नजूल संपत्तियों पर 1940 के बाद विस्थापित व्यक्तियों व अन्य व्यक्तियों का अनधिकृत कब्जा है। इस तरह की संपत्तियों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। यहां एक लाख के करीब परिवार बस गए हैं।

पांच लाख लोग डैमेज का भुगतान करने के बाद या डैमेज का भुगतान किए बिना यहां रह रहे हैं। कुछ भूमि लीज होल्ड पर थी। लेकिन लीज समाप्त होने के बाद यहां लोग बस रहे हैं। इन सभी जमीनों को लेकर डीडीए नया कानून बना रहा है।

उल्लेखनीय है कि डीडीए की इस कवायद से जहां जमीन की पहचान होगी वहीं डीडीए के खाते में धन जुटेगा। कुछ ऐसी भी जमीन निकलेगी जहां का वारिस कोई नहीं होगा और अवैध खरीद-बिक्री हुई होगी। इस तरह से खाली जमीन पर डीडीए मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बना सकता है।

किन इलाकों में है नजूल जमीन
बंटवारे के दौरान दिल्ली में सबसे ज्यादा शरणार्थी पहुंचे थे। कुछ वक्त के लिए वे कैंपों में रहते थे। ये 23 नजूल संपत्तियां ज्यादातर करोल बाग, पहाड़गंज, आनंद पर्वत, चूना मंडी जैसे क्षेत्रों में पड़ती हैं। इसी तरह से शरणार्थी मुखर्जी नगर, हडसन लेन, विजय नगर में भी बसते हैं।

कैसे हुई खरीद-बिक्री
सरकारी भूमि का उपयोग करने के लिए इन अधिभोगियों को ‘डैमेज स्लिप‘ नामक पर्चियां दी गई थीं। डैमेज कलेक्टर उनसे किराया भी वसूल करता था। 1957 में डीडीए के गठन के बाद ये जमीन डीडीए को हस्तांतरित कर दी गई । 1959 में ऐसी संपत्तियों की संख्या 18179 थीं। समय के साथ-साथ इन प्लॉटों को या तो विरासत में आगे दे दिया गया या इनका उप विभाजन कर दिया गया। कई लोगों ने ‘डैमेज स्लिप‘ को आधार बनाकर क्रय-विक्रय भी किया।

क्या हो सकती है नीति
जिन शरणार्थियों ने अपने कब्जे की जमीन अवैध तरीके से बेची है, वहां रहने वालों को परेशान होना पड़ सकता है। चूंकि काफी दिनों से लोग वहां रह रहे हैं लिहाजा क्रय-विक्रय की गई भूमि पर वर्तमान रेट से पैसा डीडीए वसूल सकता है। जो लोग लीज पर रह रहे हैं उनकी लीज बढ़ाई जा सकती है और वर्तमान रेट पर पैसा वसूला जा सकता है।

अनधिकृत रूप से या लीज के माध्यम से 60 से भी अधिक वर्षों से रह रहे ऐसे करीब पांच लाख लोगों के लिए नीति तैयार की जा रही है। इसका आंकलन 2010-2011 की जनगणना पर किया जाएगा। जिनके पास डैमेज स्लिप ओरिजनल है उनके लिए भी नई कानून की व्यवस्था की जा सकती है।
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