गूगल, यू-ट्यूब, ट्विटर कहीं नहीं दिखाई जाएगी इनकी फिल्म
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दिल्ली पुलिस ने ब्रिटिश निर्माता से तिहाड़ जेल में बंद गैंगरेप के दोषी पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म की रॉ फुटेज मांगी है। निर्माता को सीआरपीसी की धारा 91 के तहत नोटिस भेजा गया है।
साथ ही फिल्म की रॉ फुटेज पुलिस को उपलब्ध कराने को कहा गया है। ताकि मामले की जांच की जा सके। दूसरी तरफ पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पूरे मामले से अवगत कराया है।
पुलिस आयुक्त को बुधवार शाम गृह मंत्रालय में तलब किया गया था। पुलिस ने विदेश मंत्रालय से भी संपर्क किया है ताकि विदेशों में इस फिल्म को नहीं दिखाया जाए।
गौरतलब है कि गैंगरेप के दोषी पर आधारित फिल्म को लेकर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मंगलवार को मामला दर्ज किया था।
कहीं नहीं दिखाई जाएगी फिल्म
गृहमंत्री राजनाथ से मिलने के बाद पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने बताया कि गृहमंत्री से कई मुद्दों पर बात हुई है। गैंगरेप के दोषी मुकेश सिंह के साक्षात्कार मुद्दे पर भी बात हुई है।
उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री को पूरे मामले की जानकारी दी है। पुलिस ने मंगलवार रात को ही कोर्ट से फिल्म चलाने पर स्टे ऑर्डर ले लिया था। मंगलवार को कोर्ट से स्थायी ऑर्डर ले लिया गया।
कोर्ट ने फिल्म के प्रसारण, प्रकाशन और अपलोड करने पर रोक लगा दी है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि मीडिया रिपोर्ट के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
मामले की तफ्तीश की जा रही है। गवाहों से पूछताछ की जाएगी और इसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले में तिहाड़ प्रशासन की कोई गलती नजर नहीं आती।
‘साक्षात्कार महिलाओं में भय पैदा करने वाला’
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने बुधवार को गूगल, यू-ट्यूब और ट्विटर को पत्र लिखा है कि फिल्म को न तो चलाया जाए और ही अपलोड किया जाए।
बताया जा रहा है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारियों ने जोरशोर से तफ्तीश शुरू कर दी है। मामले में बुधवार को एक-दो लोगों से पूछताछ भी हुई है।
वसंत विहार गैंगरेप के गुनहगार मुकेश सिंह का साक्षात्कार महिलाओं में भय पैदा करने वाला है। दिल्ली पुलिस ने बुधवार शाम को एक अधिकारिक बयान जारी कर ये कहा है। पुलिस के मुताबिकदोषी के साक्षात्कार को चलाना पूरी तरह गैरकानूनी है।
आर्थिक अपराध शाखा के डीसीपी डॉ. रजनीश गर्ग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट से पता लगा कि लगा कि गैंगरेप के दोषी ने अपने साक्षात्कार में महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बातें कही हैं। इस तरह के बयान से तनाव का माहौल पैदा होता है।
दिल्ली सरकार को प्रक्रिया में नहीं किया गया शामिल
दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म मामले में बनी डॉक्यूमेंटरी फिल्म निर्माण स्वीकृति मामले में दिल्ली सरकार को कहीं भी शामिल नहीं किया गया। सारा पत्र व्यवहार तिहाड़ जेल और गृह मंत्रालय के बीच हुआ।
इतना ही नहीं तिहाड़ जेल के महानिदेशक ने गृह मंत्रालय को मामले की स्वीकृति केलिए जब चिट्ठी लिखी तो मंत्रालय से उसकी स्वीकृति महज दो दिन में मिल गई।
सूत्र बताते हैं कि 22 जुलाई, 2013 को तिहाड़ के महानिदेशक ने गृह मंत्रालय को तिहाड़ जेल में बंद दोषी कैदियों को लेकर एक डॉक्यूमेंटरी फिल्म बनाए जाने का प्रस्ताव पत्र के साथ भेजा।
महज दो दिन बाद 24 जुलाई, 2013 को मंत्रालय से तिहाड़ को चिट्टी लिखी जिसमें कुछ शर्तों के साथ स्वीकृति दी गई। कहा गया कि कैदी की लिखित स्वीकृति जरूरी है।
फिल्म बन गई। सूत्र बताते हैं कि 24 दिसंबर, 2013 को ही तिहाड़ के लॉ ऑफिसर ने फिल्म निर्माता को एक पत्र लिखकर आपत्तियां दर्ज कराई।