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रूस-यूक्रेन युद्ध: पांच दिन से बंकर में है बिटिया, दर-दर की ठोकरें खा रहे पिता, विदेश मंत्रालय के बाहर दिया धरना, बोले- नहीं हो रही कोई सुनवाई
Mon, 28 Feb 2022 09:50 PM IST
सुशील कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार
Updated Mon, 28 Feb 2022 09:50 PM IST
सार
आशीष जैन ने कहा कि भारत के हजारों बच्चों की तरह करीब ढाई महीने पहले उनकी बेटी आरुषी भी मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गई थी। आरुषी की कक्षाएं चल रही थीं, इसलिए वो चाहकर भी हमले से पहले यूक्रेन से भारत नहीं आ पाईं।
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विदेश मंत्रालय के बाहर धरना देते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली की बिटिया आरुषी जैन पांच दिन से बंकर में है। उसे सुरक्षित वापस लाने के लिए सुनवाई नहीं हो रही है। सोमवार को आशीष जैन विदेश मंत्रालय के बाहर अपनी बेटी को यूक्रेन से सुरक्षित लाने के लिए सरकार से अपील करते दिखाई दिए।
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आशीष जैन ने कहा कि भारत के हजारों बच्चों की तरह करीब ढाई महीने पहले उनकी बेटी आरुषी भी मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गई थी। आरुषी की कक्षाएं चल रही थीं, इसलिए वो चाहकर भी हमले से पहले यूक्रेन से भारत नहीं आ पाईं। रूस ने जब यूक्रेन पर हमला किया, उस समय वो खारकीव प्रांत में थी। हमला होने के बाद उनके लैंड लॉर्ड ने उसे बंकर में पनाह दी, तब से वो वहीं है।
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अब उसके पास खाने-पीने का सामान खत्म है, केवल सूखी ब्रेड बची है। आशीष के पास कभी भी आरुषी का मैसेज आ रहा है। जब भी उसके फोन में नेटवर्क आता है, वह मैसेज भेजकर स्थिति से रूबरू करा देती है। आशीष जैन ने बताया कि आरुषी बेहद डरी हुई है।
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आशीष ने बताया कि 24 फरवरी से खारकीव में बमबारी जारी है। उनकी बेटी को बचाने के लिए भारतीय दूतावास से कोई वहां जाने को तैयार नहीं। बंकर में ठंडक बहुत है, सोमवार को उसको दोपहर का खाना शाम को मिला, उसमें बस सूखी ब्रेड थी।
बेटी को बचाने के लिए उन्होंने दोपहर विदेश मंत्रालय के बाहर धरना दिया, ऐसा करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को एक पत्र दिया, विदेश मंत्रालय के मेल पर भी बेटी को बचाने के लिए गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय से उन्हें मदद नहीं मिल रही।