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डार्कनेट ड्रग्स प्रकरण : एमबीए पास युवा चला रहे थे रैकेट, एनसीबी ने पकड़ी 4 करोड़ की टेबलेट
Thu, 20 Feb 2020 03:20 AM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Thu, 20 Feb 2020 03:20 AM IST
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इस महीने की शुरुआत में लखनऊ में पकड़े गए देश के पहले डार्कनेट आधारित ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़े तीन और युवाओं को एनसीबी ने दबोच लिया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बुधवार को बताया कि नागपुर से दबोचे गए इन तीन में से दो युवा एमबीए पास हैं और पूरे सिंडिकेट में इनकी अहम भूमिका थी। इनके कब्जे से 135 किलोग्राम साइकोट्रॉपिक ड्रग्स (मानसिक बीमारियों के इलाज में दी जाने वाली नशीली दवाएं) व 1 लाख नशीली गोलियां बरामद हुई हैं, जिनका बाजार भाव तकरीबन 4 करोड़ रुपये है।
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एनसीबी ने 2 फरवरी को लखनऊ से दीपू सिंह को दबोचकर डार्कनेट के जरिये ड्रग्स तस्करी करने वाले देश के पहले सिंडिकेट का खुलासा किया था। एनसीबी के दिल्ली जोन के निदेशक केपीएस मल्होत्रा के मुताबिक, दीपू सिंह ने पूछताछ के दौरान उसके अवैध धंधे से जुड़े लोगों की जानकारी दी थी।
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इसके बाद नागपुर में 11 फरवरी को छापा मारकर तीन लोगों को दबोचा गया, जो सिंगापुर से अमेरिका और ब्रिटेन के लिए ड्रग्स शिपमेंट भेजने का इंतजाम करते थे। इन लोगों की पहचान सचिन मकडे (33), तेजस पटेल (28) व वरुण चौहान (33) के तौर पर की गई है। सचिन फार्मेसी में डिप्लोमाधारक है, जबकि तेजस और वरुण ने एमबीए पास किया है। इन तीनों को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है।
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क्या होता है डार्कनेट
इंटरनेट का वह हिस्सा, जिस तक लोगों के चुनिंदा समूहों की पहुँच होती है और इसे संबंधित लोग ही देख या इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल अमूमन अपराध जगत से जुड़े लोग नारकोटिक्स, हथियारों आदि की बिक्री और पोर्न कंटेंट के लेनदेन के लिए करते हैं। इसका सर्विलांस सरकारी जांच एजेंसियां नहीं कर पाती हैं।
क्रिप्टोकरेंसी से ले रहे थे पैसा
एनसीबी के मुताबिक, डार्कनेट के जरिये यह धंधा चला रहे नारकोटिक्स संचालक अपने लेनदेन को नियामक संस्थाओं से छिपाने के लिए अमूमन बिटकॉइन और लाइटकॉइन सरीखे क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते हैं। डार्कनेट के जरिये खरीदारी से जुड़े ऑर्डर लेकर विभिन्न व्हाट्सएप और कुछ बिजनेस-टू-बिजनेस प्लेटफार्मों के जरिये आगे भेज दिए जाते थे।