नोटबंदी से दिहाड़ी मजदूरों के वारे-न्यारे, सुबह बैंक तो रात को एटीएम की लाइन में लग कर रहे कमाई
नोटबंदी से दिहाड़ी मजदूरों के वारे-न्यारे
- प्रतिदिन एक हजार से 1200 तक कमा ले रहे हैं, सुबह बैंक की लाइन में लगते हैं तो रात को एटीएम की
- कोई अपनी आईडी से बदलवा रहा नोट तो कोई लाइन में लगने का ले रहा पैसा
- पहले से दो से तीन गुना अधिक हुई आमदनी, लेबर चौक नहीं अब बैंक बने नया ठिकाना
गौरव चौधरी
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नोटबंदी के फैसले से भले ही आम आदमी की नींद उड़ गई है, लेकिन दिहाड़ी मजदूरी करने वाले हजारों श्रमिकों के वारे-न्यारे हो रहे हैं। कोई इन श्रमिकों की आईडी पर काली कमाई को सफेद बना रहा है तो कोई लाइन में घंटों खड़े रहने की परेशानी से बचने के लिए इनका इस्तेमाल कर रहा है।
बैंकों के बाहर लाइन में लगकर दिहाड़ी मजदूर रोजाना पहले से दो से तीन गुना अधिक यानि 1000 से 1200 रुपये कमा रहे हैं और मेहनत भी पहले से कम करनी पड़ रही है। शहर के जिन चौराहों पर पहले दिहाड़ी मजदूरों की भीड़ रहा करती थी वो आज सूने-सूने दिखाई देते हैं।
इनका नया ठिकाना अब बैंक बन गए हैं। बैंक ही नहीं एटीएम की लाइन में भी यही तिगड़म चल रही है। बैंकों के बाहर चल रहे इस खेल को जानने की कोशिश की गई। पेश है गौरव चौधरी की रिपोर्ट:-
केस-1
लाइन में लगे एक शख्स से संवाददाता ने उससे फॉर्म दिखाने के लिए कहा तो वह आनाकानी करने लगा। बैंक में जमा कराने के लिए उसके पास पैसे भी नहीं थे। उसे भरोसे में लिया गया तो उसने सारी पोल पट्टी खोलकर रख दी। उसने अपनी पहचान बुलंदशहर निवासी रामकुमार के रूप में बताई। वह इन दिनों शहर में मजदूरी के लिए आया है।
उसने बताया कि इन दिनों काम तो मिल नहीं रहा लेकिन बैंकों के बाहर लाइन में लगने के लिए 350 से लेकर 400 रुपये तक मिल रहे हैं। शाम चार बजे तक बैंक की लाइनों में लग 700 से 800 रुपये कमा लेता हूं। इसके बाद शाम को एटीएम की लाइन में लगने के 150 से 250 रुपये मिलते हैं।
केस-2
यहीं उसकी पोल खुल गई। बैंक से बाहर निकल रहे एक कर्मचारी से जब पूछा गया तो उसने बताया कि इस बैंक में खाते के लिए न्यूनतम बैलेंस ही 10 हजार रुपये होना चाहिए। लाइन में लगे एक शख्स ने बताया कि पिछले चार दिनों से वह कैश लेने के लिए आ रहा है लेकिन उसका नंबर आने तक बैंक में कैश खत्म होने की बात कही जाती है।
बैंक की लाइन में सुबह छह बजे से ही एजेंट और दिहाड़ी मजदूर आकर खड़े हो जाते हैं, जिसका खामियाजा जरूरतमंद लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों ने विरोध किया लेकिन दिहाड़ी मजदूरों की संख्या अधिक होने के कारण वह लाइन में लगे रहे।
केस-3
सेक्टर-37 स्थित पंजाब नेशनल बैंक के बाहर भी सैकड़ों लोगों की भीड़ लगी हुई थी। लाइन में आठवें नंबर पर एक शख्स खड़ा था। करीब 20 मिनट बाद जैसे ही उसका बैंक में घुसने का नंबर आया तो वह हट गया और उसकी जगह दूसरा व्यक्ति बैंक के अंदर दाखिल हो गया।
संवाददाता ने लाइन में घंटों से लगे शख्स से उसके हटने की वजह पूछी तो वह जाने लगा। जब उससे ग्राहक बनकर बात की गई तो उसने अपना नाम रतनपाल बताया। उसने बताया कि वह मजदूरी करता है।
लेबर चौक पर इन दिनों कंस्ट्रक्शन साइटों या लोडिंग आदि काम के लिए श्रमिकों की डिमांड नहीं है। बैंक की लाइन में लगने के लिए लोग मजदूरों की तलाश करते हुए लेबर चौक पहुंचे। इसकी एवज में 250 रुपये दिए जा रहे हैं। चार दिन से यह सिलसिला चल रहा है।