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Cyber Crime : ठगी के लिए डिजिटल रिश्ते को हथियार बना रहे हैं जालसाज, पिंग बूचरिंग स्कैम से करते हैं खाता खाली

Mon, 11 Nov 2024 05:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 11 Nov 2024 05:52 AM IST
सार

अब वह डिजिटल अरेस्ट की जगह डिजिटल रिश्ता यानी पिग बूचरिंग स्कैम के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।

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Cyber Crime: Fraudsters are using digital relationships as a weapon for fraud
cyber crime - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती घटनाओं के बीच ठगों ने जालसाजी का नया तरीका ईजाद किया है। अब वह डिजिटल अरेस्ट की जगह डिजिटल रिश्ता यानी पिग बूचरिंग स्कैम के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। दक्षिण-पूर्वी एशिया में स्थित कंबोडया ठगी का अड्डा बना हुआ है। खास बात ये है कि चीन के लोग देश के लोगों से बड़े पैमाने पर ठगी कर रहे हैं, मगर उन्होंने कभी चीन को अपना ठिकाना नहीं बनाया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की फ्यूजन द इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशन (आईएफएसओ) में पिछले एक वर्ष में डिजिटल अरेस्ट के 35 से ज्यादा मुकद्दमे दर्ज हुए हैं। जिन केसों में 50 लाख से ज्यादा की ठगी होती है उनकी जांच आईएफएसओ करती है।

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आईएफएसओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट के बाद अब डिजिटल रिश्ता बनाने के बाद ठगी करना शुरू कर दिया है। डिजिटल अरेस्ट में स्काईप से वीडियो कॉल कर पीड़ित को एक ही जगह यानी कमरे में कैद रखा जाता है। उसे इतना धमका दिया जाता है कि वह किसी को कुछ नहीं बता पाता। जालसाज उसे फोन तक नहीं रखने देते। इस मामले में जागरूकता बढ़ने पर अब जालसाजों ने डिजिटल रिश्ता यानी पिग बूचरिंग स्कैम के जरिए ठगी करना शुरू कर दिया है। इसके बाद तहत आरोपी डेटिंग एप पर पीड़ित से एक रिश्ता बनाता है। भरोसा होने पर उससे क्रिप्टो करेंसी में निवेश करवाता है।
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पिग बूचरिंग से ऐसे होती है ठगी-
जालसाज सोशल मीडिया डेटिंग एप या गलत नंबर से टेक्स्ट संदेश भेजकर पीड़ित से ऑनलाइन संपर्क करता है। विश्वास जीतने के बाद आरोपी उसे क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करता है। आरोपी दावा करता है कि उसके पास निवेश उद्योग में अंदरूनी जानकारी या पारिवारिक संबंध हैं। ऐसे में भारी रिटर्न मिलना तय है। इसके बाद आरोपी पीड़ित को एक एप डाउनलोड करने के लिए कहता है। साथ में व्यापार करने की पेशकश करता है। उसे ये भी दिखाता है कि इससे रिटर्न पाना कितना आसान है। हालाँकि, यह एक धोखाधड़ी वाला प्लेटफ़ॉर्म होता है जिसे जालसाज चलाते हैं।
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एक बार जब पीड़ित जुड़ जाते हैं तो आरोपी जैसा कहता है वह वैसे ही करता है। ऐसे में पीड़ितों को लगता है कि वह मुनाफ़ा कमा रहे हैं। उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए उन्हें अपने लाभ में से कुछ निकालने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकता है। लालच में पीड़ित बड़ी रकम निवेश कर देते हैं। जब पीड़ित अपना पैसा निकालने का प्रयास करता है तो उसे बताया जाता है कि खाते में कोई समस्या है। इसके बाद कहा जाता है कि उन्हें अपना पैसा प्राप्त करने के लिए भारी शुल्क और करों का भुगतान करना होगा। सभी लेन-देन ब्लॉक चेन पर होते हैं, इसलिए धन की वसूली लगभग असंभव है।

म्यांमार के बाद अब कंबोडिया से हो रही है ठगी
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की माने तो सबसे पहले म्यांमार से भारत के लोगों के साथ ठगी होती थी। इसके बाद जालसाजों ने लाओस को अपना ठिकाना बनाया। इस समय कंबोडिया से भारतीय लोगों के साथ ठगी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये देशों से ठगी करने वाले कौन हैं, किस देश के नागरिक है या पता नहीं है। हालांकि जालसाजी करने में चीनी नागरिक सबसे आगे हैं, मगर उन्होंने चीन को कभी अपना कार्यक्षेत्र नहीं बनाया।

पैसा कैसे विदेश जाता है
पीडि़त- दुबई में फर्जी दस्तावेजों से खोले गए बैंक खातों में जाता है। इसमें से कुछ पैसा यहां निकाला जाता है। इसके बाद कंबोडिया व अन्य देशों में जाता है। पीड़ित से रुपये में ठगी की रकम ली जाती है। उसे क्रिप्टो करेंसी में बदलकर दुबई व अन्य देशों में भेजा जाता है।


35 मामले दर्ज हुए
आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त डा.हेमंत तिवारी ने बताया कि आईएफएसओ में 50 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी के मामले दर्ज होते हैं। आईएफएसओ में पिछले एक वर्ष में डिजिटल अरेस्ट के 35 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें 32 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
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