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साइबर सिटी में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Wed, 27 Jan 2016 07:33 PM IST
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पूरा देश गणतंत्र का जश्न मना रहा था, लेकिन सर्द रातों में बेचैन बेघरों को देखकर गणतंत्र के ख्वाब अधूरे से महसूस हुए। 26 जनवरी की रात करीब 11:00 बजे करीब पांच डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच था।
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जब तेज ठंडी हवाओं की वजह से जैकेट और गर्म कपड़े भी नाकाफी साबित हो रहा थे, इस दौरान सैकड़ों बेघर लोग खुले आसमान के नीचे महज एक पतली सी कंबल या रजाई ओढ़कर रात गुजारने को मजबूर दिखे।
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नगर निगम का दावा कि ठंड में बेघर लोगों के लिए रैन बसेरे का इंतजाम किया गया है, लेकिन किन जगहों पर और वहां तक जाने का रास्ता क्या है, इस बारे में कोई इंतजाम नहीं किए गए। न तो कहीं साइन बोर्ड लगाए गए और न ही इसके लिए कोई प्रचार किया गया। केवल रस्म अदायगी से आगे रैन बसेरे का इंतजाम नहीं बढ़ सका।
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बता दें कि कन्हई गांव और भीम नगर में स्थाई रैन बसेरे के साथ रेलवे स्टेशन, खांडसा रोड, शीतला माता मंदिर और सुखराली में हरियाणा रोडवेज की कंडम बसों को अस्थाई रैन बसेरे के रूप में शुरू गया था, लेकिन उसे भी सुविधा की दरकार है।
रात 11.00 बजे
इफको चौक के व्यस्त चौराहे पर गाड़ियां तेज रफ्तार से पास हो रही थीं। यहां से जब सुखराली की ओर बढ़े तो कम्युनिटी सेंटर के पास एक आदमी एक पतली सी कंबल में हाथ पैर मोड़कर सोया हुआ था। बता दें कि पिछले साल यहां हरियाणा रोडवेज की एक बस में अस्थाई रैन बसेरा बना हुआ था, लेकिन इस बार व्यवस्था नहीं की गई।
रात 11.24 बजे
जब सुखराली से सिविल लाइन पहुंचे तो महावीर चौक पर एक आदमी और बस स्टैंड पर दो लोग कंबल ओढ़कर सोए थे। स्ट्रीट लाइट नहीं जलने की वजह से साफ पता भी नहीं चल रहा था कि वहां कोई भी है या नहीं। सर्द हवाओं के बीच दो व्यक्ति सोए हुए है। पूछने पर मालूूम चला कि दोनों पेशे से रिक्शा चालक है। उन्होंने पूरी सर्दी यहीं गुजारी है।
रात 11.30 बजे
नगर निगम दफ्तर से महज 100 मीटर की दूरी पर भी कोई किसी को पूछने वाला नहीं है। जमीन पर एक पतली चादर बिछाए हुए एक व्यक्ति रजाई ओढ़कर लेटा था। दिन में सामने एक होटल की पहरेदारी करने वाले राम बहादुर ने बताया कि किराये के मकान में तीन लोग रहते थे, लेकिन दोनों कुछ दिन पहले ही भाग गए। अब उनके पास इतनी आमदनी है कि पूरा किराया वहन करे और न ही रहने का अन्य साधन। वह पिछले एक महीने से यही सो रहा है।
रात 11.43 बजे:
सिविल लाइन से बढ़ते हुए जब रेलवे रोड का जायजा लेने पहुंचे तो ट्रेन पकड़ने वाले लोग अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। ऑटो स्टैंड खाली थे। सेक्टर-4/7 चौक पर तीन व्यक्ति सिकुड़ कर सोए हुए थे। सर्द हवाओं से खुद को बचाने के लिए तीनों दीवार से सटे हुए थे।
रात 11.50 बजे
भक्तों की भीड़ से रौनक रहने वाली माता चिंतपूर्णी मंदिर के ठीक सामने जमीन पर तीन लोग कच्ची जमीन पर सोए थे। गाड़ियों की आवाज से बीच-बीच में इनकी नींद टूटती तो आग जलाकर ठंड दूर करने की कोशिश करते दिखे।
रात 11.57 बजे
रेलवे स्टेशन के निकट लक्ष्मण विहार के पास एक रिक्शा चालक अपने रिक्शा को खड़ा कर नीचे जमीन पर रजाई ओढ़कर सोया था। रजाई भले ही उसे गर्माहट दे रही थी, लेकिन जमीन की ठंडक से बचना मुमकिन नहीं था। वह लगातार करवट बदल रहा था।