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Delhi NCR News: माइक्रोबियल कल्चर से सीडब्ल्यूजी विलेज झील का होगा कायाकल्प
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पुन: प्रेषित:- अपडेट
- झील के पानी को शुद्ध करना और पारिस्थितिकी पुनर्जीवित करना है परियोजना का उद्देश्य
- 28.25 लाख रुपये से 200 दिनों में परियोजना पूरी करने का लक्ष्य
शनि पाथौली
नई दिल्ली। राजधानी में पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए अहम पहल शुरू होने जा रही है। पहले कॉमनवेल्थ गेम्स (सीडब्ल्यूजी) विलेज स्थित झील का माइक्रोबियल कल्चर से जैविक उपचार कर पानी को स्वच्छ बनाया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य झील के प्रदूषित पानी को प्राकृतिक तरीके से शुद्ध करना और उसकी पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करना है। माइक्रोबियल कल्चर तकनीक में विशेष प्रकार के सूक्ष्म जीवों को पानी में डाला जाता है, जो उसमें मौजूद हानिकारक तत्वों को तोड़कर उसे साफ और उपयोगी बनाते हैं। योजना को लेकर प्राधिकरण ने निविदा भी जारी कर दी है।
यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे अन्य झीलों और जलाशयों में भी लागू किया जा सकता है। इसके लिए केवल उन्हीं एजेंसियों को पात्र माना गया है, जिन्होंने सात वर्षों में इस प्रकार के कार्य किए हों।
प्रदूषण और अतिक्रमण से जूझ रहीं जल संरचनाएं
दिल्ली में संजय झील, भलस्वा झील, नजफगढ़ झील और रोशनारा बाग की झील लंबे समय से प्रदूषण और अतिक्रमण से जूझ रहीं हैं। इससे जल स्रोत खत्म हो रहे हैं। इसका असर भूजल स्तर पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा जैव विविधता में कमी आती है। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए जलाशयों की बेहतरी के लिए योजना शुरू की जा रही है। इस परियोजना को 28.25 लाख रुपये की लागत से 200 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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यमुना बाढ़ क्षेत्र में भी वेटलैंड विकसित करने और प्राकृतिक जल शोधन तंत्र को मजबूत करने की योजनाएं चल रहीं हैं। कुछ झीलों में एरेशन (पानी में ऑक्सीजन बढ़ाने) और फ्लोटिंग वेटलैंड जैसी तकनीकों का भी प्रयोग किया जा रहा है।
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- झील के पानी को शुद्ध करना और पारिस्थितिकी पुनर्जीवित करना है परियोजना का उद्देश्य
- 28.25 लाख रुपये से 200 दिनों में परियोजना पूरी करने का लक्ष्य
शनि पाथौली
नई दिल्ली। राजधानी में पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए अहम पहल शुरू होने जा रही है। पहले कॉमनवेल्थ गेम्स (सीडब्ल्यूजी) विलेज स्थित झील का माइक्रोबियल कल्चर से जैविक उपचार कर पानी को स्वच्छ बनाया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य झील के प्रदूषित पानी को प्राकृतिक तरीके से शुद्ध करना और उसकी पारिस्थितिकी को पुनर्जीवित करना है। माइक्रोबियल कल्चर तकनीक में विशेष प्रकार के सूक्ष्म जीवों को पानी में डाला जाता है, जो उसमें मौजूद हानिकारक तत्वों को तोड़कर उसे साफ और उपयोगी बनाते हैं। योजना को लेकर प्राधिकरण ने निविदा भी जारी कर दी है।
यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे अन्य झीलों और जलाशयों में भी लागू किया जा सकता है। इसके लिए केवल उन्हीं एजेंसियों को पात्र माना गया है, जिन्होंने सात वर्षों में इस प्रकार के कार्य किए हों।
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प्रदूषण और अतिक्रमण से जूझ रहीं जल संरचनाएं
दिल्ली में संजय झील, भलस्वा झील, नजफगढ़ झील और रोशनारा बाग की झील लंबे समय से प्रदूषण और अतिक्रमण से जूझ रहीं हैं। इससे जल स्रोत खत्म हो रहे हैं। इसका असर भूजल स्तर पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा जैव विविधता में कमी आती है। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए जलाशयों की बेहतरी के लिए योजना शुरू की जा रही है। इस परियोजना को 28.25 लाख रुपये की लागत से 200 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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यमुना बाढ़ क्षेत्र में भी वेटलैंड विकसित करने और प्राकृतिक जल शोधन तंत्र को मजबूत करने की योजनाएं चल रहीं हैं। कुछ झीलों में एरेशन (पानी में ऑक्सीजन बढ़ाने) और फ्लोटिंग वेटलैंड जैसी तकनीकों का भी प्रयोग किया जा रहा है।