नहीं पसीजा ऑटो वालों का दिल, झुग्गी में दिया बच्चे को जन्म
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पास में कम रुपये होने के कारण ऑटो चालकों की अनुनय विनय की लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। घर में ही डिलीवरी हो गई और करीब पांच घंटे तक बच्चा अवल नाल से जुड़ा रहा।
सेक्टर 70 में मनोज बेलदारी करता है और वहीं पर झुग्गी बनाकर पत्नी के साथ रहता है। उसने बताया कि दिहाड़ी के हिसाब से उसे कभी 200 तो कभी 300 रुपये मिलते हैं।
काम न हुआ तो रुपये नहीं मिलते हैं। ऐसे में आर्थिक तंगी बनी रहती है। शुक्रवार रात करीब 2.30 बजे पत्नी अंजू (22वर्ष) को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। भागकर सड़क पर आया लेकिन कोई ऑटो नहीं दिखा।
ठेकेदार के कहने पर सुबह पहुंचा ऑटो
फिर झुग्गी में गया, जहां पत्नी दर्द से कराह रही थी। सड़क पर पहुंचा तो एक ऑटो दिखा। चालक से दिक्कत बताई, जिस पर उसने जिला अस्पताल के लिए 400 रुपये की मांग की।
थोड़ी दूर पर एक और ऑटो दिखा, जिसके चालक ने 500 रुपये मांगे। पास में इतने रुपये न होने और पत्नी की हालत खराब होने की दुहाई दी लेकिन ऑटो चालक नहीं माने। परेशान होकर झुग्गी पहुंचा तो देखा कि डिलीवरी हो गई थी।
पास की महिलाओं को बुलाया। ठेकेदार को फोन करने पर सुबह करीब सात बजे ऑटो घर पहुंचा। जिला अस्पताल पहुंचा, जिसके बाद डॉक्टरों ने बच्चे को मां से जोड़ने वाली नाल को काटकर अलग किया। बेटी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक दोनों स्वस्थ हैं और वार्ड में भर्ती हैं।
निशुल्क है 102 और 108 नंबर एंबुलेंस सेवा
102 और 108 नंबर सरकारी एंबुलेंस की मरीजों के लिए निशुल्क सेवा है। 102 नंबर एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को घर से अस्पताल लाने और वापस घर छोड़ने के लिए है। किसी भी समय इस नंबर को डायल करके एंबुलेंस सेवा प्राप्त की जा सकती है।