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दो ‘दुश्मनों’ ने मिलाए हाथ और कर दी हत्या
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 14 May 2014 12:29 AM IST
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छह मई को हुई प्रापर्टी डीलर और सपा नेता के भाई कपिल यादव की हत्या का खुलासा हो गया है। राजनीतिक धमक, पुरानी रंजिश, वर्चस्व की जंग और टशनबाजी इस हत्या का कारण बनी। कपिल की हत्या के लिए उसके दो दुश्मनों दिव्यांश उर्फ कुक्कू और सचिन यादव ने हाथ मिलाया और वारदात को अंजाम दे डाला।
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पुलिस ने मुख्य आरोपी दिव्यांश उर्फ कुक्कू, सचिन यादव, रोहित और प्रिंस को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें सचिन और रोहित जीजा-साले हैं। जबकि प्रिंस, कुक्कू का साथी है। कुक्कू ने इसी साल इंटर की परीक्षा दी है।
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रोहित एमबीए कर चुका है और पोस्ट ग्रेजुएट सचिन यादव आरटीआई एक्टीविस्ट है। सपा नेता विनोद यादव ने पुलिस की अभी तक की कार्रवाई को सही ठहराया है। उनका कहना है कि पुलिस के इस खुलासे से हम संतुष्ट हैं।
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पुलिस की मानें तो कपिल पक्ष के संजय यादव की हत्या कर दी गई थी। यहीं से दुश्मनी का दौर शुरू हुआ। इसके बाद बम्हैटा के तत्कालीन पार्षद रामबीर यादव का वर्ष 2004 में हत्या कर दी गई। इस केस में कपिल पक्ष के लोगों को नामजद कराया गया था।
दिव्यांश तभी से अपने मामा की हत्या का बदला लेना चाहता था। पुलिस की मानें तो 1400 मीटर के एक प्लाट को लेकर भी कपिल और दिव्यांश पक्ष के बीच विवाद है।
कपिल कई बार दिव्यांश को इस बात की धमकी दे चुका था कि ‘जैसे तेरे मामा (रामबीर यादव) की आंखें निकाली थीं, वैसे ही किसी दिन तेरी भी निकाल दूंगा।’ इसी बात से दिव्यांश का खून खौल गया और उसने हत्या की साजिश रच डाली।
ऐसे मिले ‘दुश्मनों’ ने हाथ
पुलिस की थ्योरी बताती है कि मामा की मौत का बदला लेने के लिए कुक्कू परेशान रहता था। यह बात उसने अपने साथियों प्रिंस और रोहित को भी बताई। कुक्कू का कहना था कि अगर उसे थोड़ी सी सपोर्ट मिल जाए तो वह कपिल को ठिकाने लगा सकता है। रोहित ने यह बात अपने जीजा सचिन यादव को बताई।
सचिन और कपिल की कभी दोस्ती हुआ करती थी, मगर किसी बात पर दोनों में दुश्मनी शुरू हो गई। दोनों ने ही एक-दूसरे के खिलाफ जानलेवा हमले के मुकदमे दर्ज करा रखे हैं। सचिन को जब पता चला कि उसके दुश्मन कपिल को ठिकाने लगाने की बात दिव्यांश कर रहा है तो उसने उससे हाथ मिला लिया।
जीजा ने दी कार और साले ने पिस्टल
एसएसपी शची घिल्डियाल के अनुसार सपा नेता के चचेरे भाई कपिल यादव को ठिकाने लगाने के लिए सचिन यादव ने जहां उसे अपनी कार मुहैया कराई, वहीं उसके साले रोहित ने उसे 9एमएम की पिस्टल और कारतूस लाकर दिए। इसी पिस्टल से दिव्यांश ने अपने साथी प्रिंस के साथ मिलकर कपिल की हत्या कर दी।
पुलिस के अनुसार दिव्यांश अपने मामा की तरह ही कपिल की हत्या इस प्रकार करना चाहता था कि उसकी आंखें बाहर आ जाएं। इसी के चलते उसने कपिल के सिर में दो गोलियां मारीं।
एक गोली उसकी पीठ में भी मारी, मगर वहां कपिल ने अपनी कमर में शर्ट के नीचे .30 बोर की पिस्टल लगा रखी थी। गोली पिस्टल पर लगी और वह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद आरोपी उसकी पिस्टल निकालकर फरार हो गया।
दो घंटे खोखे में बैठकर किया था कपिल का इंतजार
आरोपियों ने हत्या से तीन दिन पहले से ही कपिल की रेकी शुरू कर दी गई थी। 6 मई को पेट्रोल पंप पर कपिल की गाड़ी देखकर आरोपियों ने कपिल की हत्या की फुलप्रूफ प्लानिंग कर ली। आरोपी समझ गए थे कि कपिल अपनी गाड़ी लेने जरूर आएगा।
पुलिस थ्योरी के अनुसार चारों आरोपियों ने सड़क पार एक पान-बीड़ी के खोखे में बैठकर करीब दो घंटे तक कपिल का इंतजार किया। जैसे ही कपिल अपनी गाड़ी लेने पेट्रोल पंप की ओर चला, वैसे ही दिव्यांश ने उस पर गोलियां बरसा दीं।
नए मोबाइल सिम से खुली वारदात
कपिल हत्याकांड के खुलासे में क्राइम ब्रांच और सर्विलांस टीम दिन-रात एक किए हुए थी। सर्विलांस टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर बीटीएस टावर के माध्यम से घटना के समय के मोबाइल नंबरों की जांच की। इनमें आरोपियों के नंबर ऐसे थे, जिनकी लोकेशन घटना से करीब एक घंटे पहले से आ रही थी।
नंबरों से ही पता चला कि इनमें एक नंबर दिव्यांश उर्फ कुक्कू का है। चूंकि पुरानी रंजिश को लेकर पुलिस पहले ही जांच कर रही थी, लिहाजा कुक्कू से पूछताछ करनी चाही। पता चला कि घटना वाले दिन से ही कुक्कू फरार है। उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ था। इस पर पुलिस का शक और गहरा हो गया।पुलिस ने उसके आईएमईआई नंबर को
सर्विलांस पर ले लिया। उधर कुक्कू ने अपने मोबाइल में नया सिम चालू किया तो पुलिस को उसकी जानकारी मिल गई। कुक्कू को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो पूरा मामला ही खुलता चला गया।
हिंडन से बरामद हुई कपिल से लूटी गई पिस्टल
कपिल की हत्या के बाद आरोपी ने उसकी पिस्टल को पहले तो ठीक करने का प्रयास किया, फिर उसे एक पालीथिन में लपेटकर कनावनी के पास हिंडन नहर में फेंक दी।
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने हिंडन में गोताखोर उतारकर पिस्टल बरामद कर ली। पिस्टल की तलाश के लिए गोताखोर भारी चुंबक लेकर पानी में उतरे थे। इससे पूर्व मेटल डिटेक्टर का भी सहारा लिया गया था।
अधिकारियों को भी गुमराह कर रहा था गनर
सचिन ने अपनी सुरक्षा के लिए सरकारी स्तर पर गनर हासिल कर रखे थे। सूत्रों की मानें तो सोमवार सुबह से ही पुलिस सचिन को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती थी, मगर वह हाथ ही नहीं आ रहा था। उससे फोन पर संपर्क किया गया तो उसने कह दिया कि वह दिल्ली आया हुआ है।
इसके बाद पुलिस के एक आलाधिकारी ने सचिन के सरकारी गनर को फोन करके उसकी लोकेशन पूछी तो उसने भी दिल्ली में होना बताया। जबकि अधिकारी को अपने एक खास मुखबिर से सूचना मिल चुकी थी कि सचिन एमएमएच कालेज के पास एक दुकान पर बैठा कोई एप्लीकेशन टाइप करा रहा है।
जब तक पुलिस टीम उसे पकड़ने पहुंचती, तब तक वह निकल चुका था। इसके बाद पुलिस ने सचिन को उसके घर से दबोचा। इस कार्रवाई के दौरान उसके गनर से भी उसका मोबाइल और कारबाईन जब्त कर ली गईं।
पुलिस ने माना, लूटे थे साढे़ छह लाख
कपिल हत्याकांड का खुलासा होने के साथ ही पुलिस ने यह माना कि कपिल के पास साढे़ 16 लाख रुपये थे। इनमें से साढे़ 6 लाख लूट लिए गए थे। सूत्रों की मानें तो इस मामले में पुलिस अपने ही दो कांस्टेबल पर नजर रखे हुए है। यही दोनों कांस्टेबल घटना पर सबसे पहले पहुंचे थे। एसएसपी का कहना है कि बहुत जल्द रकम बरामद कर ली जाएगी।
सपा नेताओं ने किया दबाव बनाने का प्रयास
कपिल हत्याकांड का खुलासा होने की खबर मिलते ही सपा के वरिष्ठ नेता बड़ी संख्या में सुबह से ही कविनगर थाने जा पहुंचे थे। पता चला है कि सपा नेता इस हत्याकांड में कुछ अन्य लोगों के नाम जुड़वाना चाहते थे।
एसएसपी शची घिल्डियाल ने प्रेसवार्ता में भी यह बात कही। उनका कहना था कि पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया, मगर उन्होंने आदेश दिया था कि किसी भी निर्दोष को न फंसाया जाए।
हतप्रभ हैं बम्हैटा के लोग
कपिल यादव हत्याकांड का खुलासा होने के साथ ही गांव बम्हैटा के लोग हतप्रभ हैं। अब खुलासा हुआ है तो लोग खुद से ही इस हत्याकांड की कड़ी जोड़ने लगे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि कुक्कू ऐसा नहीं है, जबकि कुछ का कहना है कि हत्या से कुछ दिनों पूर्व से ही कुक्कू गांव में कई बार देखा गया था।
कुछ दबी जुबान से यह भी कह रहे हैं कि जब कुक्कू अपने मामा रामबीर की हत्या का बदला लेना चाहता था, तब रामबीर के बेटों की इसमें क्या भूमिका है। कुछ लोग यह भी बताते हैं कि रामबीर यादव के बेटे कुक्कू से बात नहीं करते।
मूल रूप से सिकंदराबाद के गांव पचौता निवासी दिव्यांश उर्फ कुक्कू के पिता यूपी पुलिस में कांस्टेबल हैं और वर्तमान में मेरठ के कंकडखेड़ा थाने में तैनात हैं। फिलहाल उनका परिवार गाजियाबाद में ही बम्हैटा के पास एक कालोनी में बस गया है। कुक्कू ने इसी साल इंटर की परीक्षा दी है। लोगों का कहना है कि कुक्कू का कोई आपराधिक रिकॉर्ड तो नहीं है, मगर वह है टशनबाज।