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ये नटवरलाल 40 साल में 95 बार हुआ गिरफ्तार, जज बन कर दिया था 2740 मुजरिमों को रिहा

Sat, 02 Apr 2016 02:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 02 Apr 2016 02:00 PM IST
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this natwarlaal doing forgery from 52 years, 125 cases
धनीराम मित्तल

पश्चिम दिल्ली की वाहन चोरी निरोधक शाखा ने एक जालसाज को गिरफ्तार किया है। 77 वर्षीय इस नटवरलाल पर करीब 125 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वाहन चोरी में माहिर जालसाज चंडीगढ़ में एक कार चोरी के मामले में भगोड़ा घोषित है। पुलिस ने इसके पास से एक सेंट्रो कार बरामद की है जिसे उसने रानी बाग से चुराई थी। फिलहाल पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।

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जिला पुलिस उपायुक्त पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि पकड़े गए बदमाश की पहचान पश्चिम विहार निवासी धनीराम मित्तल (77) के रूप में हुई है। 31 मार्च को पुलिस टीम ने इंस्पेक्टर राजपाल डबास के नेतृत्व में रोहिणी कोर्ट के पास से आरोपी को दबोच लिया। इस नटवरलाल ने कार पर फर्जी नंबर लगा रखा था। जांच में पता चला कि आरोपी हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट चंडीगढ़ के वकील की कार चोरी करने के मामले में भगोड़ा करार है।
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पूछताछ के बाद पुलिस ने बताया कि धनीराम मित्तल 1939 में भिवानी, हरियाणा में पैदा हुआ। रोहतक कॉलेज से स्नातक करने के बाद वह फर्जी कागजात के जरिये रेलवे में काम करने लगा। वह 1968 से 1974 तक रेलवे स्टेशन मास्टर रहा।
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उसके बाद वह रोहतक आरटीओ कार्यालय में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस व आरसी बनाने लगा। 1964 में रोहतक में फर्जी कागजात बनाने के मामले में वह पहली बार गिरफ्तार हुआ। उसके बाद वह जालसाजी करने लगा। 1970 में उसने राजस्थान से एलएलबी की। बाद में उसने पटियाला हाउस कोर्ट दिल्ली में बतौर मुनीम के साथ-साथ रोहतक कोर्ट में भी काम किया।

एक बार तो फर्जी कागजात के जरिये झज्जर कोर्ट में मजिस्ट्रेट बन बैठा। करीब दो माह के दौरान उसने कई अपराधियों को जमानत दे दी। पुलिस के मुताबिक आरोपी पिछले 52 साल से दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और राजस्थान में वारदात को अंजाम दे चुका है।

धोखाधड़ी से जज बन, रिहा क‌िए कई अपराधी

this natwarlaal doing forgery from 52 years, 125 cases
लूट, क्राइम - फोटो : फाइल फोटो

एक बार तो धनीराम मित्तल धोखाधड़ी के बल पर जज ही बन बैठा था। दरअसल उसे पता चला था कि झज्जर कोर्ट के एक एडिशनल सेशन जज पर किसी मामले की विभागीय जांच चल रही है।

फिर क्या था धनीराम ने एक फर्जी लेटर बनाकर एडिशनल सेशन जज को छुट्टी पर भेज दिया और दो महीने तक उस जज की कुर्सी पर बैठकर अदालत लगाता रहा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार इन दो महीनों के दौरान धनीराम ने 2740 लोगों को जमानत दे दी थी। बताया जा रहा है कि रिहा हुए कई बदमाशों ने मित्तल का शुक्रिया अदा किया और उसके साथ मिलकर चोरियां करने लगे। ये अपराधी 40 साल में 95 बार अरेस्ट हो चुका है।

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