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डीलरशिप की आड़ में कर रहे थे फर्जी दस्तावेज का धंधा, पुलिस ने किया गिरफ्तार

Sat, 13 Aug 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Sat, 13 Aug 2016 12:01 AM IST
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The fake documents were in the name of the dealership business, was arrested by police
arrest - फोटो : demo pic

एंटी एक्सटॉर्शन टीम ने टेलीकॉम कंपनी की डीलरशिप की आड़ में फर्जी दस्तावेज बनाने वालों को दबोचा है। टीम ने दो डीलर को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से नकली मुहर, पहचान पत्र, सिम व अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। 

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आरोपी फर्जी आईडी पर अधिक रकम वसूली कर सिम व ब्रॉडबैंड कनेक्शन देते थे। साथ ही अन्य जाली दस्तावेज भी बनाते थे। माना जा रहा है कि आरोपियों द्वारा बेचे गए सिम का इस्तेमाल रंगदारी मांगने व अन्य आपराधिक वारदात में किए जाता था। पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है। 
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एसपी देहात अभिषेक यादव ने बताया कि जगत फार्म बाजार स्थित जेपी इंटरप्राइजेज की पर फर्जी आइडी से सिम व ब्रॉडबैंड कनेक्शन देने की जानकारी मिली थी। यहां एक टेलीकॉम कंपनी के दो डीलर यह काम कर रहे थे। 
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एंटी एक्सटॉर्शन टीम को मामले की पड़ताल की जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रभारी अजय शर्मा टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और कुछ देर निगरानी करने लगे। यहां पर ग्राहक सिम व ब्रॉडबैंड कनेक्शन लेते देखे गए। 

मौके से दो लोगों को दबोचा गया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सत्येंद्र सिंह व देव प्रकाश वर्मा निवासी हाथरस के रूप में हुई है। आरोपियों के पास से 17 फर्जी मुहर, स्टांप पैड, छह रेंट एग्रीमेंट शपथ पत्र, नोटरी  व लीज एग्रीमेंट, तीन वोटर आइडी, दो पैन कार्ड, चार एयरटेल के चालू सिम बरामद किए गए हैं। इसके अलावा आरोपी कई तरह के फर्जी दस्तावेज अधिक रुपये लेकर तैयार करते थे। 

700 रुपये मांगे 500 में हुआ सिम का सौदा
आरोपियों को दबोचने के लिए पहले सादे कपड़ों में एक पुलिसकर्मी को डीलर के पास भेजा गया। डीलर ने नए सिम देने की बात कही और आईडी नहीं होने की जानकारी दी। 

इस पर पुलिसकर्मी से सात सौ रुपये की मांग की गई और कुछ देर में पांच सौ रुपये में सौदा हो गया। आरोपी के सिम देने व उस पर फर्जी आईडी की प्रति लगाते ही टीम ने दोनों आरोपियों को धर दबोचा।


हर माह एक लाख की आमदनी
पुलिस के मुताबिक आरोपी डेढ़ साल से इस गोरखधंधे में थे। उनकी हर माह की कमाई करीब एक लाख रुपये थी। आरोपियों का कहना है कि उन्होंने कुछ माह बीच में डीलरशिप बंद कर दी थी। इस बीच कुछ और लोग डीलर बन गए। उन्होंनेे साजिश के तहत शिकायत करने की बात कही है। 
 

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