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RTI कार्यकर्ता की मौत: जानबूझकर अंजान बनी पुलिस

Mon, 05 May 2014 12:19 PM IST
Updated Mon, 05 May 2014 12:19 PM IST
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RTI activist death case: Police delayed investigation

आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन की मौत के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें ये बात खुलकर सामने आई है कि पुलिस की एक लापरवाही ने इस मामले की तफ्तीश में 10 घंटे की देरी करा दी। बात दरअसल ये है कि चंद्रमोहन की कार जिस समय आग की लपटों में थी, उस समय एक राहगीर ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी थी।

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हालांकि उसने अपना नाम और नंबर नहीं बताया था। राहगीर ने कार का नंबर भी बताया था, फिर भी पुलिस कार के नंबर के लिए करीब 10 घंटे परेशान रही थी। हुआ कुछ यूं कि उस व्यक्ति ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। पुलिस को 12:06 बजे पता चला तो दमकल विभाग को सूचना दी गई। जिसे 12:15 पर सूचना मिली और 12:16 पर दमकल घटनास्थल की ओर कूच कर गई।
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जिस समय दमकल कर्मी आग बुझा रहे थे वहां पर एक राहगीर ने दमकल कर्मियों को गाड़ी का नंबर बता दिया था। आग बुझाने के बाद दमकल कर्मी वापस चले गए, जबकि पुलिस करीब 10 घंटे तक कार के नंबर की तलाश करती रही।

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पुलिस को पता था कार का नंबर!

RTI activist death case: Police delayed investigation
पुलिस को गाड़ी का नंबर मालूम होते हुए भी उसने जांच शुरू करने में इतना वक्त लगाया इससे एक बात तो साफ है कि पुलिस के अधिकारियों ने दमकल कर्मचारियों से संपर्क नहीं किया।

उधर, पुलिस दावा कर रही थी कि उन्हें घटनास्थल पर कोई नहीं मिला। गौरतलब है कि कंट्रोल रूम में जो सूचना दर्ज है, उसमें राहगीर का नाम और नंबर तो नहीं है, लेकिन उसने कार का नंबर जरूर लिखवा दिया था।

वहीं चंद्रमोहन की कार का रविवार को शेवरले कंपनी के अधिकारियों ने टेक्निकल मुआयना कर लिया। पुलिस अधिकारियों की मानें तो इंजीनियरों की टीम ने डैशबोर्ड से आग लगकर कार के केबिन तक पहुंचना बताया है, जिससे चंद्रमोहन की दम घुटने से मौत हुई है। हालांकि पुलिस लखनऊ की सरकारी टेक्निकल टीम के मुआयने की रिपोर्ट को ही मानेगी।

खुफिया विभाग ने जताई हत्या की आशंका

RTI activist death case: Police delayed investigation

आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन की मौत हादसे में हुई या उनकी हत्या की गई, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है। पुलिस भले ही इस गुत्थी को नहीं सुलझा पाई हो, लेकिन खुफिया विभाग ने शासन को भेजी रिपोर्ट में चंद्रमोहन की हत्या की आशंका जताई है।

आरटीआई कार्यकर्ता को कुछ लोगों से खतरा था और भूख हड़ताल के दौरान शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई थी, उसमें भी जान का खतरा बताया गया था। लेकिन तब एलआईयू की रिपोर्ट को पुलिस-प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया था।

दरअसल, पिछले दो साल से आरटीआई कार्यकर्ता कासना गांव में मंदिर की जमीन को कब्जाने वालों के खिलाफ काम कर रहे थे। जिसके चलते कई बार उन पर हमला भी किया गया और जान से मारने तक की धमकी दी गई थी।

क्या सच हैं पत्नी के आरोप?

RTI activist death case: Police delayed investigation

आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन की मौत के मामले में चल रही कार्रवाई से उनकी पत्नी और परिजन संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि जिस तरह हत्या को हादसा बनाया गया है, उसी तरह पुलिस भी मामले को भटकाने में लगी है।

सविता शर्मा और परिजनों ने इस तरह की शिकायत एसएसपी डॉ. प्रितिंदर सिंह से भी की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि एक सेक्टर में कुछ माह पहले एक व्यक्ति की कार में आग लग गई थी। जिसे चंद्रमोहन ने ही पुलिस अधिकारियों से कहकर करीब एक माह बाद सड़क से हटवाया था।

लेकिन जब चंद्रमोहन के साथ घटना घटी तो पुलिस ने रात में ही चंद घंटों में कार को घटनास्थल से हटवा दिया। 28 अप्रैल को ही आरोपियों द्वारा चंद्रमोहन को जान से मारने की धमकी दी गई थी। इसलिए घटना की जांच यूपी पुलिस या सीबीसीआईडी से न कराकर सीबीआई से कराई जाए। जिससे जांच को भटकाया न जा सके।

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