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नपुंसक था रेप आरोपी श्यामलाल, पुलिस ने बनाई फर्जी रिपोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 12 Mar 2016 10:16 AM IST
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यूपी पुलिस
- फोटो : प्रतीकात्मक चित्र
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डेनमार्क निवासी महिला से सामूहिक दुष्कर्म मामले में मृतक आरोपी के पोटेंसी जांच के मुद्दे पर डॉक्टरों की गवाही कराने से कोई मकसद हल नहीं होगा। यह दलील शुक्रवार को दिल्ली पुलिस के विशेष लोक अभियोजक ने विशेष फास्ट ट्रैक अदालत में दी।
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मामले में एक आरोपी की हिरासत के दौरान तिहाड़ जेल में मौत हो चुकी है। इसलिए पुलिस अब इनकी गवाही नहीं कराना चाहती। अदालत ने बचाव पक्ष की अर्जी पर फैसला सुनाने के लिए 19 मार्च की तारीख तय की है।
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तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार द्वितीय के समक्ष अपनी दलीलें पेश करते हुए दिल्ली पुलिस के विशेष लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि मामले में एक आरोपी श्याम लाल उर्फ भजनी की तिहाड़ जेल में मौत हो चुकी है।
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इसलिए उसकी पोटेंसी जांच करने वाले डॉक्टरों की गवाही का अब कोई मतलब नहीं है। मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता दिनेश शर्मा ने श्याम लाल की पोटेंसी जांच करने वाले डॉक्टरों को दोबारा गवाही के लिए बुलाने की अर्जी दायर की थी।
पुलिस ने दाखिल की फर्जी रिपोर्ट
पुलिस
- फोटो : demo pic
अभियोजन पक्ष इस अर्जी का विरोध कर रहा है क्योंकि श्याम लाल की मौत हो चुकी है। पेश मामले में पुलिस ने कई डॉक्टरों व पुलिस वालों का बयान कराने की अर्जी दायर की थी जबकि कोर्ट इससे पहले दलीलें सुनने के बाद मुकदमे पर फैसला सुरक्षित रख चुकी थी।
अदालत ने अभियोजन को इन गवाहों को बुलाने की अनुमति दी थी। दूसरी ओर बचाव पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने श्याम लाल के पोटेंसी जांच की फर्जी रिपोर्ट पेश की है और उसे यौन संबंध बनाने में सक्षम बताया है जबकि वह नपुंसक था।
केवल एक आरोपी श्याम लाल की मौत हुई है लेकिन बाकी आरोपियों की मेडिकल रिपोर्ट भी इन्हीं डॉक्टरों ने तैयार की थी। इनकी गवाही से डाक्टरों व पुलिस के आचरण पर रोशनी पड़ेगी और साफ होगा कि पुलिस ने किस तरह फर्जी रिपोर्ट दाखिल की।
अदालत ने अभियोजन को इन गवाहों को बुलाने की अनुमति दी थी। दूसरी ओर बचाव पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने श्याम लाल के पोटेंसी जांच की फर्जी रिपोर्ट पेश की है और उसे यौन संबंध बनाने में सक्षम बताया है जबकि वह नपुंसक था।
केवल एक आरोपी श्याम लाल की मौत हुई है लेकिन बाकी आरोपियों की मेडिकल रिपोर्ट भी इन्हीं डॉक्टरों ने तैयार की थी। इनकी गवाही से डाक्टरों व पुलिस के आचरण पर रोशनी पड़ेगी और साफ होगा कि पुलिस ने किस तरह फर्जी रिपोर्ट दाखिल की।