पुलिस हिरासत में युवक की मौत मामला : मजिस्ट्रेट जांच शुरू, परिजनों के बयान दर्ज
- जज ने परिजनों का दर्ज किया बयान
- शव का पोस्टमार्टम कर परिजन को सौंपा
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वजीराबाद गांव में रहने वाले यूपी, औरैया के युवक की पुलिस हिरासत में हुई मौत की मजिस्ट्रेट जांच शुरू हो गई है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अशोक कुमार ने परिजनों का बयान दर्ज करवाया। बोर्ड ने शव का पोस्टमार्टम किया लेकिन रिपोर्ट में क्या है अभी इसका खुलासा नहीं हुआ है।
सुशांतलोक थाने में पुलिस हिरासत में हुई विजय नामक युवक की हुई मौत के मामले में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अशोक कुमार की देख रेख में जांच शुरू हो गई है। औरया के विधूना से उसके परिजन सुबह करीब 10:00 बजे थाने पहुंच गए।
विजय के पिता ने अपने बयान में किसी भी तरह की कार्रवाई करने से इनकार किया है
जहां पर जज के सामने सभी लोगों का अलग-अलग बयान दर्ज हुआ है। विजय के पिता ने अपने बयान में किसी भी तरह की कार्रवाई करने से इनकार किया है। उसने मजिस्ट्रेट की जांच पर भरोसा देते हुए कहा कि उसका बेटा चला गया है।
इसके साथ ही मुंशी व हवलदार का भी बयान दर्ज किया है। पुलिस के अलग-अलग लोगों का भी बयान हुआ है। बोर्ड के द्वारा शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा नहीं हुआ है कि युवक की मौत फांसी लगने से हुई है या फिर किसी और कारण से।
छीनी नहीं, खरीदी थी बाइक, 20 हजार में से 15 हजार का कर चुका था भुगतान
छीनी नहीं, खरीदी थी बाइक, 20 हजार में से 15 हजार का कर चुका था भुगतान
जिस बाइक को लेकर विवाद हो रहा है, वह बाइक विजय ने छीनी नहीं बल्कि खरीदी है। यह कहना है विजय के पिता राम चरन का। 15 दिन पहले विजय मोटर साईकिल से गांव गया था। जहां पर वह बाइक साथ ले गया था। उसके पिता का कहना था कि उसने बताया था कि बाइक तीन माह पहले 20 हजार रुपये की खरीदी है।
जिसमें से 15 हजार रुपये का भुगतान कर चुका है। जबकि पुलिस की कहानी यह थी कि 15 दिन का वेतन बकाया होने पर उसने जाकिर नामक व्यक्ति की बाइक छीन ली। पुलिस कह रही थी कि जाकिर को विजय का पैसा देना है। जबकि उसके पिता का कहना है कि उसका बेटा तो खुद जाकिर को पांच हजार रुपये देने की बात कह रहा था। वह पांच हजार बाइक का बकाया था।
वाहन के भुगतान का भी नहीं था पैसा
औरैया से जिस वाहन से उसके परिवार के लोग आये हैं। उसका किराया 14 हजार रुपया लगा है। उनके पास वाहन का किराया तक देने को नहीं है। राम चरण के दो बेटे हैं। बड़े बेटे की शादी हो गई है। वह गांव में मजदूरी करता है जबकि छोटा बेटा विजय ही बाहर रह कर परिवार चलाता था। अब वह भी इस दुनिया में नहीं है।