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अस्पताल के चक्कर काटते-काटते दम तोड़ा, परिजनों का हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 07 Apr 2016 10:49 AM IST
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- फोटो : डेमो फोटो
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सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावे कर रही है, लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं। अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। ताजा उदाहरण ईएसआई अस्पताल का है। लापरवाही के चलते एक मरीज को जान गंवानी पड़ी। गुस्साए परिजनों ने ईएसआईसी अस्पताल पर जमकर हंगामा किया और नारेबाजी की।
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बल्लभगढ़ स्थित गर्ग कॉलोनी निवासी बल्लभ भट्ट को कुछ माह पहले हॉर्ट में स्टंट डाला गया था। उनके भतीजे सोनू ने बताया कि मंगलवार को उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। परिजन उन्हें लेकर ईएसआई डिस्पेंसरी पहुंचे। वहां से उन्हें सेक्टर-8 ईएसआई अस्पताल रेफर कर दिया गया।
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यहां मरीज की एक जांच कराने के लिए उन्हें सेक्टर-16 के एक निजी अस्पताल में भेजा गया। सोनू का कहना है कि एक पर्चे पर मुहर न लगने की वजह से निजी अस्पताल में इलाज करने से मना कर दिया। इसके बाद दोबारा मरीज को लेकर ईएसआई गए और मुहर लगवाई।
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वापस निजी अस्पताल गए तो बेड न होने की बात कहकर भर्ती करने से इनकार कर दिया। मरीज की हालत लगातार खराब होती जा रही थी। परिजन दोबारा मरीज को लेकर ईएसआई गए। यहां से डॉक्टर ने मरीज को सेक्टर-10 के निजी अस्पताल में भेज दिया। यहां मरीज को भर्ती नहीं किया गया।
आरोप है कि परिजनों ने मरीज को ले जाने के लिए अस्पताल से एंबुलेंस मांगी, लेकिन मना कर दिया गया। परिजन मरीज को लेकर फिर सेक्टर-8 ईएसआई अस्पताल गए। वहां से मरीज को एनआईटी-3 ईएसआइसी अस्पताल भेज दिया। यहां मरीज की जांच के दौरान मृत घोषित कर दिया गया।
मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने एनआईटी-3 ईएसआईसी अस्पताल में हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझा-बुझाकर परिजनों को शांत कराया। अस्पताल के स्टेट मेडिकल कमीश्नर डॉ. आरके जुल्का का कहना है कि उनके सामने मामला आया था। उन्होंने तत्काल अस्पताल से बात कर मरीज को भर्ती कर लिया गया था।