{"_id":"989ed580d95f29d3bac68250bf0cf0c5","slug":"nithari-case-koli-cleared-for-hanging","type":"story","status":"publish","title_hn":"निठारी कांड: कोली की फांसी का रास्ता साफ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
निठारी कांड: कोली की फांसी का रास्ता साफ
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 20 Jul 2014 08:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निठारी कांड साढे़ आठ साल बीत जाने के बाद एक बार फिर चर्चाओं में है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की दया याचिका खारिज किए जाने के साथ ही कोली को फांसी दिए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
विज्ञापन
निठारी कांड के दोनों आरोपी सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं। जल्द ही कोर्ट अब इस मामले में डेथ वारंट जारी करके डासना जेल अधीक्षक को आदेश जारी कर सकती है। सीबीआई विशेष कोर्ट में निठारी कांड से संबंधित 11 मामले अभी भी विचाराधीन हैं।
विज्ञापन
देश भर में मची थी हलचल
निठारी कांड के खुलते ही देश भर में हलचल मच गई थी। यह एक ऐसा कांड था, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग उठी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई ने शुरू की।
विज्ञापन
11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने पूरा केस अपने हाथ में ले लिया। 28 फरवरी और 01 मार्च 2007 को सुरेंद्र कोली ने दिल्ली में एसीएमएम के यहां अपने इकबालिया बयान दर्ज कराए थे। इन बयानों की वीडियोग्राफी भी हुई थी।
पांच मामलों में कोली को मिल चुकी है फांसी की सजा
13 फरवरी 2009 को सीबीआई विशेष न्यायाधीश रमा जैन ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा सुनाई थी। कालांतर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को बरी कर दिया। जबकि सुरेंद्र की सजा बरकरार रखी।
सुप्रीम कोर्ट ने भी सुरेंद्र कोली की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया। कोली ने राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी, उसे भी अब खारिज कर दिया गया है।
12 मई 2010 को सुरेंद्र कोली को इसी कांड से जुडे़ दूसरे मामले में सीर्बीआई विशेष न्यायाधीश डॉ. एके सिंह ने आरोपी सुरेंद्र कोली को दोषी मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई।
12 दिसंबर 2010 को सीबीआई कोर्ट ने निठारी कांड के ही तीसरे मामले में सुरेंद्र कोली को दोषी माना और फांसी की सजा सुनाई।
28 सितंबर 2010 को चौथे मामले में कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को दोषी माना। मर्डर केस में सीबीआई विशेष न्यायाधीश डॉ. एके सिंह ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई।
24 दिसंबर 2012 को पांचवे मामले में भी कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को दोषी माना। तत्कालीन सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस लाल ने भी उसे फांसी की सजा सुनाई।
राज रह गए तीन मामले
निठारी कांड के तीन मामले ऐसे भी हैं, जिनके बारे में सीबीआई भी कुछ तलाश नहीं कर सकी। जांच के बाद सीबीआई ने इन तीनों ही मामलों में अपनी फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी। इसके साथ ही शेखराजा, कुमारी सोनी और एक अज्ञात मामला हमेशा के लिए ही राज बनकर रह गए।
पांचवें मामले में सजा सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश की टिप्पणी
‘अभियुक्त के मन में हमेशा यही भावना बनी रहती है कि किसको मारूं, काटूं व खाऊं। अभियुक्त इन परिस्थितियों में समाज के लिए खतरा बन चुका है। उसके सुधार और पुनर्वास की संभावनाएं भी नहीं हैं। मृतका की आत्मा को तभी शांति मिल सकती है, जब अभियुक्त को मृत्युदंड से ही दंडित किया जाए। अभियुक्त को गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।’ - एस लाल, विशेष न्यायाधीश सीबीआई