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नीमका जेल की सुरक्षा भी कमजोर, कब जागेगा जेल प्रबंधन

Wed, 30 Nov 2016 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Wed, 30 Nov 2016 12:43 AM IST
सार

बंदियों से बरामद होती रहती है प्रतिबंधित सामग्री
जेल से फरार होने में मदद देने वाले हथियार भी पहुंच सकते हैं बंदियों के पास 
 

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Nimka jail security is also weak, when will prison management awake
जेल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 उत्तर भारत का आधुनिक और सबसे सुरक्षित कहा जाने वाला नीमका जेल भी पूरी  तरह से महफूज नहीं है। कड़ा पहरा और तलाशी के बावजूद बंदियों के पास आए दिन  प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद होती रहती हैं।

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जेल सुरक्षा और व्यवस्था बनाए  रखने वाले स्टाफ की कमी से भी जूझ रहा है। ऐसे में पंजाब के नाभा जेल जैसी  घटना होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि अधिकारी सबकुछ  चाकचौबंद होने की बात कह रहे हैं।
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बंदी धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं प्रतिबंधित सामग्री 
जेल  प्रबंधन के कड़ी सुरक्षा और निगरानी के दावों के बावजूद बंदी मोबाइल, सिम,  पान मसाला, शराब आदि प्रतिबंधित वस्तुओं का धड़ल्ले से उपयोग करते हैं।  हालात यह हैं कि जब भी जेल में अधिकारियों ने खोज अभियान चलाया बंदियों के  पास से ढेर सारी मात्रा में प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद होती हैं।
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बताते चलें  कि बंदियों को धन लेकर मोबाइल सप्लाई करने में जेल के दो बंदीरक्षकों को  निलंबित भी किया जा चुका है। बंदियों के पास जिस तरह यह प्रतिबंधित वस्तुएं  पहुंचती हैं वैसे ही जेल से भागने में मदद करने वाला सामान या हथियार भी  पहुंच सकते हैं।

2014 में जेल में बंदियों के पास से 38 और 2015 में 36 फोन  बरामद हुए थे। इस वर्ष भी नवंबर माह तक बंदियों के पास से 23 मोबाइल फोन,  चाकू, ब्लेड आदि प्रतिबंधित सामान बरामद हो चुका है।

2500  कैदियों की क्षमता वाले नीमका जेल में वर्तमान में करीब 2300 बंदी और कैदी  बंद हैं।

Nimka jail security is also weak, when will prison management awake
जेल - फोटो : अमर उजाला

जेल में हैं 2300 बंदी 
2500  कैदियों की क्षमता वाले नीमका जेल में वर्तमान में करीब 2300 बंदी और कैदी  बंद हैं। इनमें सामान्य बंदियों के अलावा पड़ोसी प्रदेश के हिस्ट्रीशीटर,  दुर्दांत बदमाशों के अलावा देश की सुरक्षा के लिए खतरा साबित होने वाले  तत्व भी कैद हैं।

हालांकि देश में आतंक का पर्याय माने जाने वाले इन  बंदियों को अन्य बंदियों से अलग बैरक में रखा जाता है। बावजूद इसके इन  बंदियों तक प्रतिबंधित वस्तुएं नहीं पहुंच सकती यह नहीं कहा जा सकता।

एक तिहाई स्टाफ की कमी 
वर्तमान  में जेल में रह रहे 2300 बंदियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाला  स्टाफ भी एक तिहाई से ज्यादा कम है। जेल सूत्रों के मुताबिक मात्र दो तिहाई  स्टाफ से 24 घंटे ड्यूटी करवाई जा रही है। स्टाफ कम होने की वजह से कई  प्रमुख कर्मचारियों को पर्याप्त छुट्टी भी नहीं मिल पाती। थका हुआ स्टाफ  कैदियों की निगरानी पूरी चुस्ती से करेगा यह कहना मुश्किल है।

​चलाया जाता है अभियान
बंदियों  की सुरक्षा और निगरानी हर क्षण मुस्तैदी से की जाती है। सुरक्षा व्यवस्था  पूरी तरह मजबूत है, रोजाना सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाती है। जरा भी  शक होने पर औचक सर्च अभियान चलाया जाता है। स्टाफ की कमी तो है लेकिन उससे  जेल की सुरक्षा में कोई कमी नहीं आएगी। 
दीपक शर्मा, जेल अधीक्षक नीमका कारागार

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