एमपी से दिल्ली एनसीआर में सप्लाई होते थे हथियार, पुलिस ने दबोचा बदमाश
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मध्य प्रदेश से हथियार लाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करने वाले गैंग के एक बदमाश को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दबोच लिया है। आरोपी की पहचान बुद्ध आश्रम रोड, फिरोजाबाद, यूपी निवासी अजय भारद्वाज (39) के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपी के पास से .32 बोर की 20 पिस्टल बरामद की है। पुलिस की मानें तो अजय अपने भाई प्रशांत के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर में हथियारों का धंधा कर रहा था।
पुलिस को प्रशांत समेत कई अन्य लोगों की तलाश है। आरोपी अब तक पांच से छह हथियारों की खेप दिल्ली-एनसीआर में पहुंचा चुका है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
स्पेशल सेल के डीसीपी पीएस कुशवाह ने बताया कि उनकी टीम को सूचना मिली थी कि कुछ लोग मध्य प्रदेश के खरगौन, सेंधवा और धार से हथियार लाकर दिल्ली-एनसीआर व अन्य जगहों पर सप्लाई कर रहे हैं।
सूचना के बाद इंस्पेक्टर मनोज दीक्षित और शिव कुमार की टीम ने मामले की छानबीन शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश की अलग-अलग जगहों पर रोड मैप बनाकर आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी।
इस बीच 26 अगस्त को सूचना मिली कि हथियारों का सौदागर बड़ी खेप लेकर ईस्ट विनोद नगर, एनएच-24, गुरुद्वारे के पास आने वाला है। सूचना के बाद पुलिस ने आरोपी को हथियारों के बैग समेत दबोच लिया।
शराब के धंधा करते-करते अजय बन गया हथियारों का तस्कर
तलाशी लेने पर आरोपी के बैंग से 20 आधुनिक पिस्टल बरामद हुई। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह अपने बड़े भाई प्रशांत भारद्वाज के साथ मिलकर हथियारों का धंधा कर रहा है।
प्रशांत मध्यप्रदेश से हथियार मंगवाकर दिल्ली-एनसीआर के अलावा अन्य जगहों पर सप्लाई करवाता है। प्रशांत के कहने पर अजय पांच-छह बार हथियार लेकर दिल्ली-एनसीआर आ चुका था।
कई राज्यों में फैला है नेटवर्क
पुलिस की पूछताछ में अजय ने खुलासा किया है कि प्रशांत का हथियार सप्लाई करने का नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, यूपी समेत कई राज्यों में फैला हुआ है।
प्रशांत अपने भाई के जरिये इन राज्य के बदमाशों को महंगे दामों पर हथियार भिजवाता था। हथियार ले जाने के बदले प्रशांत अपने भाई को हर पिस्टल की सप्लाई पर एक हजार रुपये देता था।
शराब के धंधा करते-करते अजय बन गया हथियारों का तस्कर
अजय और प्रशांत के पिता राकेश फिरोजाबाद में सिविल कॉन्ट्रेक्टर थे। अजय ने कंप्यूटर से डिप्लोमा करने के बाद देशी शराब बनाने का लाइसेंस ले लिया था।
लेकिन उससे प्रतिस्पर्धा रखने वाले गैंग ने वर्ष 2008 में जय के पेट में छह गोलियां मार दीं। लेकिन वह बच गया। इसके बाद उसने शराब का धंधा छोड़ दिया। बाद में वह भाई के साथ मिलकर हथियार सप्लाई करने का धंधा करने लगा।