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‘विकास, विशाल और सुखदेव को मिले फांसी’
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 05 Jul 2014 10:55 AM IST
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नीतिश कटारा हत्याकांड के तीनों दोषी विकास, विशाल व सुखदेव पहलवान का रवैया क्रूर रहा है। अदालत में मामले की सुनवाई और सजा के बाद भी दोषियों का व्यवहार आपत्तिजनक रहा है।
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नीतिश की मां नीलम कटारा ने हाईकोर्ट के समक्ष उक्त तर्क रखते हुए तीनों को मिली आजीवन कारावास की सजा को मृत्यु दंड में तब्दील करने का आग्रह किया।
न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति जेआर मिड्ढा की खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार को पेश नीलम कटारा के अधिवक्ता ने कहा कि दोषियों ने ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान गवाहों व सरकारी वकील को धमकाया था। इसके अलावा बीमारी के बहाने अस्पताल में भर्ती होने के दौरान अस्पताल से ही गायब हो गए थे।
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उन्होंने कहा कि आरटीआई के जवाब में पता चला है कि विकास ने जेल में कैदियों से भी मारपीट की है। खंडपीठ नीलम कटारा द्वारा तीनों को मिली आजीवन कारावास के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। नीलम ने तीनों को फांसी की सजा देने की मांग की है।
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निचली अदालत ने इस मामले में आरोपी विकास व विशाल को 30 मई 2008 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील की। वहीं नीलम कटारा व अभियोजन पक्ष ने सजा बढ़ाने के लिए याचिका दायर की थी।
पहलवान को निचली अदालत ने 12 जुलाई 2011 को सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2014 को दिए फैसले में तीनों की सजा को बहाल रखा था। अब दोषियों को आजीवन कारावास की सजा बहाल रखी जाए या सजा फांसी में तब्दील की जाए इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू हुई है।
सुनवाई पर पांच करोड़ से ज्यादा खर्च
नीतिश कटारा हत्याकांड मामले की सुनवाई व दोषियों को लाने ले जाने संबंधी सुरक्षा पर अब तक सरकार पांच करोड़ 86 लाख रुपये खर्च कर चुकी है। हाईकोर्ट द्वारा दोषियों की आय व पीड़ित को मुआवजा प्रदान करने की क्षमता जानने के लिए नियुक्त कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। दिल्ली लीगल सेल के ओएसडी एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसएस राठी ने खंडपीठ के समक्ष पेश रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। जांच के दौरान पता चला है कि विकास यादव के नाम पर करीब पांच करोड़ व विशाल यादव के नाम पर करीब नौ करोड़ रुपये की संपत्ति है। अदालत ने पीड़ित पक्ष को मुआवजा प्रदान करने के लिए रिपोर्ट मांगी थी।