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'इसे तब तक जेल में रखो जब तक ये मर न जाए'

Wed, 22 Jan 2014 03:25 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 22 Jan 2014 03:25 PM IST
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let him die in jail said high court

दिल्ली हाईकोर्ट ने ढाई वर्षीय बच्चे से कुकर्म में दोषी इलासुद्दीन को राहत प्रदान करने की बजाय सजा बढ़ा दी।

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निचली अदालत ने फैसले में आजीवन कारावास की सजा देते हुए कम से कम 25 वर्ष तक जेल से रिहा न करने का आदेश दिया था। अब हाईकोर्ट ने उससे मृत्यु तक जेल से रिहा न करने का आदेश दिया है।

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न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर और न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। मात्र ढाई साल के बच्चे को इस तरह की दरिंदगी से गुजरना पड़ा। दोषी ने उससे कुकर्म ही नहीं किया, बल्कि हत्या भी कर दी।
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खंडपीठ ने कहा कि वे महसूस करते हैं कि निचली अदालत ने दोषी को जो सजा दी है, वह उचित है। इसलिए अपील को खारिज किया जाता है। जहां तक सजा को कम करने का मुद्दा है, अदालत की नजर में ऐसे अपराध में दोषी की सजा अभी कम है, इसलिए उसको ताउम्र यानी जीवन के अंत तक जेल में रखा जाए।
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खंडपीठ ने इलासुद्दीन के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। अदालत ने कहा कि साक्ष्यों से स्पष्ट है कि उसे अंतिम बार बच्चे के साथ घटनास्थल पर देखा गया था।


इसके अलावा वह यह भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि आखिर उसके अंदरूनी कपड़े कैसे घटनास्थल से बरामद हुए। घटना 12 मार्च 2008 की है। पुलिस के अनुसार दोषी ने बच्चे का अपहरण कर उसके साथ कुकर्म किया और उसके बाद उसकी हत्या कर दी थी।

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