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इस जेल में होती है बंदियों की पिटाई और वसूली, पता चला तो पहुंचा मानवाधिकार आयोग

Wed, 28 Sep 2016 05:30 PM IST
जेपी शर्मा/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
जेपी शर्मा/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Wed, 28 Sep 2016 05:30 PM IST
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human rights commission reaches luksar jail of greater noida after complaint
जेल में होती है बंद‌ियों की प‌िटाई - फोटो : अमर उजाला

गौतमबुद्ध नगर जिला कारागार में बंदियों सेे वसूली, उनकी बेरहमी से पिटाई और सुविधा उपलब्ध करानेे के स्टिंग के मामलेे ने तूल पकड़ लिया है।

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम न केवल कारागार पहुंची, बल्कि पूरे मामले की गहनता सेे जांच की है। आयोग की टीम के जांच शुरू करनेे से एडीएम प्रशासन की जांच थम गई। अब जिला प्रशासन आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
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एक निजी चैनल नेे जिला कारागार से लौटे बंदी द्वारा किए गए स्टिंग के आधार पर दावा किया था कि जेल में बंदियों से वसूली का खेेल चल रहा है। स्टिंग में बंदियों से वसूली और बांधकर पीटने के दृश्य दिखाए गए थे।

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चार सदस्यों की टीम जिला कारागार में संगीन मामले की जांच को पहुंची

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jail - फोटो : अमर उजाला

मामला मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, कारागार मंत्री व डीजीपी तक पहुंचने के बाद जिला प्रशासन को स्टिंग की जांच के आदेश दिए गए थे। एडीएम प्रशासन कुमार विनीत मामले की जांच कर रहे थे। उन्होंने स्टिंग की फुटेज फोरेंसिक जांच के लिए भेजी थी। इसी बीच यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया।

गत सप्ताह आयोग की चार सदस्यों की टीम जिला कारागार में संगीन मामले की जांच को पहुंची। जेल प्रशासन ने आयोग की टीम के पहुंचने की भनक तक नहीं लगने दी। आयोग की टीम ने चार घंटे तक कारागार में गहन पड़ताल की। इस दौरान जेल के प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा टीम ने बंदियों के भी बयान दर्ज किए।

जेल प्रशासन ने आयोग को दिए तर्क
1. स्टिंग में दिखाए गए दृश्य दिसंबर 2012-2013 के हैं, जबकि जेल वर्ष 2014 में बनकर तैयार हुई। चैनल ने इस बात की पुष्टि भी की है। 
2. जो बंदी उसमें आरोप लगाता दिखाया गया है, उसके संबंध में पड़ताल कराई गई। उसके बारेे में जेल में बंद होने की अभी तक जानकारी नहीं मिल पाई है। 
3. जिला कारागार में युवा-2 फिल्म की शूटिंग की गई। हो सकता है कि स्टिंग में दिखाए गए दृश्य फिल्म के हों।

ये हैैं ज्वलंत सवाल

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jail - फोटो : अमर उजाला

1. स्टिंग में साफ बताया गया है कि खुफिया कैमरे में दिनांक दिसंबर 2012 व जनवरी 2013 की दिख रही है, लेकिन दृश्य छह-सात माह पहले के हैं। 
2. जो व्यक्ति जिला कारागार के सामने खड़े होकर कैमरे पर खुलकर आरोप लगा रहा है, अगर वह बंदी नहीं है तो कौन है और इतने संगीन आरोप क्यों लगा रहा है।
3. अगर स्टिंग में फिल्म के दृश्य हैं, तो अब तक फिल्म की सीडी से वह दृश्य जेल प्रशासन द्वारा सामने क्यों नहीं लाए गए। फिर स्टिंग में पूर्व के एक अधिकारी, एक पुलिसकर्मी व कुछ अन्य को नाम के साथ दर्शाया गया है। 

‘हो सकता है फिल्म के दृश्य स्टिंग में दिखाए गए हों’
मानवाधिकार आयोग की चार सदस्य टीम आई थी। टीम में कौन-कौन शामिल थे, यह जानकारी नहीं है। टीम को जानकारी दी गई है कि स्टिंग में दिखाए गए दृश्य काफी पुराने हैं, तब जेल बनी भी नहीं थी। युवा-2 फिल्म की शूटिंग भी जेल में हो चुकी है। हो सकता है फिल्म के दृश्य स्टिंग में दिखाए गए हों।-एमएल यादव, जेल अधीक्षक, जिला कारागार गौतमबुद्धनगर

मानवाधिकार आयोग की टीम के जांच शुरू कर देने के कारण अभी हमने जांच रोक दी है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद जांच फिर शुरू की जाएगी।-कुमार विनीत, एडीएम प्रशासन 

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