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‘गर्भावस्था में संबंध बनाने से मना करना क्रूरता नहीं, ना ही तलाक का आधार'

Mon, 07 Nov 2016 01:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 07 Nov 2016 01:40 PM IST
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high court gave important decision on divorce

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गर्भावस्था के दौरान पत्नी द्वारा शारीरिक संबंध बनाने से मना करना पति के प्रति क्रूरता नहीं है। यह तलाक का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने पति द्वारा दायर तलाक संबंधी याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

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न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायाधीश प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने  कहा यदि पत्नी सुबह देर से सोकर उठती है और बिस्तर पर चाय की फरमाइश करती है तो स्पष्ट है कि वह आलसी है, लेकिन आलसी होना निर्दयी अथवा क्रूर होना नहीं है। 
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खंडपीठ ने याची द्वारा परिवारिक अदालत द्वारा उसके तलाक संबंधी आवेदन को खारिज करने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। याची ने तर्क रखा था कि उसकी पत्नी पिछले साढ़े चार वर्ष से शारीरिक संबंध बनाने से मना कर रही है, जबकि वह किसी भी तरह शारीरिक रूप से बीमार नहीं है। यह उसके प्रति क्रूरता है। अदालत ने कहा यह कहना कि पत्नी ने अगस्त 2012 के बाद संबंध बनाने से इंकार कर दिया। यदि यह सही भी है तो इस बात से समझना होगा कि मई 2012 के तीसरे सप्ताह में वह गर्भवती थी।
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आरोप बेमतलब व अस्पष्ट
खंडपीठ ने कहा गर्भ में बच्चा होने के समय जाहिर है कि उसके लिए संबंध बनाना असुविधाजनक रहा होगा। यदि यह मान लिया जाए कि गर्भावस्था का समय बढ़ने के साथ उसने पति के साथ पूरी तरह संबंध बनाना छोड़ दिया, तो इससे उसकी क्रूरता साबित नहीं होती। परिवारिक अदालत ने कहा था कि याचिका में पति द्वारा लगाए आरोप बेमतलब और अस्पष्ट हैं। खंडपीठ ने निचली अदालत की इस बात पर सहमति जाहिर की।

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