मोहाली में छुपा था गुड़गांव का ये मास्टरमाइंड, जिसने 600 से ज्यादा फर्जी गन लाइसेंस बनाए
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साइबर सिटी पुलिस ने फर्जी गन लाइसेंस मामले में बडी कामयाबी हासिल की है। इस मामले के मास्टर माइंड मनीष भारद्वाज को पुलिस ने मोहाली से शुक्रवार की रात को गिरफ्तार किया है।
पुलिस पिछले कई दिनों से उसकी तलाश में थी। पुलिस को अब इस मामले से जुडे अन्य आरोपियों और हथियारों के बडे जखीरे की बरामदगी की उम्मीद है। इस मामले में तीन आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त सिबाश कबिराज की जांच में कई लाइसेंस फर्जी पाए गए तो उन्होंने 2016 के बाद यहां री-रजिस्ट्रेशन कराए गए सभी आर्म्स लाइसेंस की जांच के लिए एसीपी अनिल कुमार के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी।
एसआईटी की जांच शुरू हुई तो धीरे-धीरे परतें खुलने लगी। जिसमें 600 से अधिक फर्जी लाइसेंस बनाए जाने की बात सामने आई। जिसके बाद पुलिस ने इस मामले से जुड़े मास्टर माइंड मनीष भारद्वाज और सेक्टर-10 निवासी मोहनलाल का नाम सामने आया, जिसके बाद मोहन लाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर छह दिन के रिमांड पर लिया था। मनीष की गिरफ्तारी के लिए पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। लेकिन वह हाथ नहीं लगा।
मनीष मोहाली में छिपा हुआ है
पुलिस ने सर्च वारंट लेकर उसके गुडग़ांव गांव स्थित मकान की तलाशी ली तो वहां से तीन राइफल, 16 लाईसेंस, चार पिस्टल के अलावा 5000 कारतूस बरामद हुए थे। उसके बाद से लगातार पुलिस मनीष को गिरफ्तार करने के लिए अपना जाल बिछाए हुए थी।
पुलिस को सूचना मिली कि मनीष मोहाली में छिपा हुआ है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसकी पत्नी हवाई रास्ते से उससे मिलने के लिए गत दिवस मोहाली पहुंची थी। इस बीच जब मनीष उसे छोडने के लिए वापस मोहाली एयरपोर्ट पर पहुंचा तो उसी दौरान उसे एसआईटी द्वारा दबोच लिया गया।
आरोपी को पुलिस गुरुग्राम ले आई है और उसे कोर्ट में पेश कर 10 दिन का रिमांड पर लिया है। पुलिस को अब फर्जी आम्र्स लाइसेंस बनाने के गोरखधंधे का खुलासा होने की उम्मीद है। पूछताछ में यह भी पता चल सकेगा कि उसने कितने लाइसेंस इसी प्रकार बनवाए थे। पुलिस की जांच में राजस्थान और यूपी के बुलंदशर के अलावा जम्मू कश्मीर से फर्जी लाइसेंस बनाने की बात सामने आई थी।
री रजिस्ट्रेशन के नाम पर किया जाता था फर्जीवाड़ा
मनीष फर्जी लाइसेंस का गोरखधंधा कैसे चलाता था ये भी बेहद दिलचस्प है। दअसल मनीष अपने साथियों के साथ मिलकर आसपास के राज्यों से गन के फर्जी लाइसेंस तैयार करता था और उन्हे री रजिस्ट्रेशन गुरुग्राम से कराया जाता था।
लाइसेंस के री रजिस्ट्रेशन के लिए एप्लीकेशन आने पर अधिकारी जब संबधित राज्य की एनओसी की मांग करते थे तो ये रजिस्ट्री पोस्ट से फर्जी एनओसी भेज देते थे, जिससे पुलिस विभाग को यही लगता था कि लाइसेंस दूसरे राज्य का बना हुआ है और उसी आधार पर गुरुग्राम में नए सिरे से गन लाइसेंस का रजिस्ट्रेशन हो जाता था।
गुरुग्राम पुलिस को इस फर्जी वाड़े को जानकारी उस वक्त मिली जब एक लाइसेंस एक बार रिन्यू होने के लिए आया। फर्जीवाडे के खुलासे के बाद गुरुग्राम पुलिस ने धरपकड़ शुरु की। दो सप्ताह पहले आरोपी मोहन लाल को सेक्टर-10 से गिरफ्तार किया गया।
उसके बाद 18 फरवरी को यूपी के शहर मथुरा से बत्तीस नगर पंचवटी कुंड निवासी गौरव कुमार गौड़ और किशोरी कमान मंदिरवाला रोड निवासी सोनू शर्मा को गिरफ्तार किया था। ये दोनों फर्जी मोहर बनाते थे। मनीष की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को हथियारों के जखीरे के अलावा इस पूरे नेटवर्क का जल्द सफाया करने की उम्मीद है।
- मनीष सहगल, एसीपी, गुरुग्राम