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जीडीए ने सरकारी जमीन बिल्डरों को बेची
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Thu, 14 Jan 2016 01:36 AM IST
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360 एकड़ सरकारी जमीन का पुनर्ग्रहण कर जीडीए ने कई बड़े बिल्डरों पर लुटा दी। वर्ष 2009 से 2015 तक जीडीए ने नगर निगम और निगम सीमा से बाहर के 19 गांवों की 789 करोड़ रुपये की 360 एकड़ एलएमसी जमीनों का पुनर्ग्रहण कर उप्पल चड्ढा ग्रुप, सन सिटी ग्रुप, अग्रवाल एसोसिएट्स, यूटिलिटी एस्टेट और लैंड क्राफ्ट के हवाले कर दी।
ये जमीनें उस समय के डीएम सर्किल रेट से भी कम दरों पर दी गईं। जीडीए पर निगम की जमीन रेड मॉल को बेचने का भी आरोप लगा है।
नगर निगम पार्षद व भाजपा नेता राजेंद्र त्यागी ने प्रेसवार्ता कर इन जमीनों से संबंधित 75 पेज के दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने जीडीए अधिकारियों पर गाजियाबाद का अब तक का सबसे बड़ा लैंड स्कैम करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने दस्तावेज राज्यपाल, मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री को भेजकर जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
राजेंद्र त्यागी ने दावा किया है कि जीडीए ने हाईटेक सिटी के लिए दिए गए लाइसेंसों की उन शर्तों का उल्लंघन किया है, जिनमें स्पष्ट था कि 60 फीसदी जमीन बिल्डर खुद खरीदेंगे व 40 फीसदी जमीन जीडीए किसानों से अधिग्रहण कर बिल्डरों को देगा।
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जीडीए ने किसानों से जमीन लेने की बजाय सरकारी जमीन का पुनर्ग्रहण कराकर हाईटेक सिटी के बिल्डरों को जमीन 99 साल की लीज पर दी है। साथ ही बिल्डर को फ्री होल्ड कराने और जमीन को गिरवी रख लोन लेने का अधिकार भी दे दिया।
उन्होंने मामले में तत्कालीन मंडलायुक्त को भी शामिल बताया। राजेंद्र त्यागी ने आरोप लगाया कि पुनर्ग्रहण कभी भी प्राइवेट पार्टी के पक्ष में नहीं हो सकता।
जीडीए अधिकारियों-तत्कालीन मंडलायुक्त ने जमीन पुनर्ग्रहण कर गलत तरीके से ट्रांसफर कर दी है। प्रेसवार्ता में भाजपा नेता हिमांशु मित्तल, सचिन सोनी, विनीत शर्मा मौजूद रहे।
बिल्डरों को दी गईं निगम की जमीनें
शाहपुर बम्हेटा, बयाना, नायफल, महरौली, काजीपुरा में नगर निगम में निहित 30.1958 हेक्टेयर जमीन पुनर्ग्रहीत कर बिल्डरों को दी गई।
तत्कालीन डीएम सर्किल रेटों के मुताबिक इस जमीन की कीमत 259.75 करोड़ रुपये है। आरोप है कि इन जमीनों को 900 से 1100 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से बिल्डरों को दिया गया।
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ये जमीनें उस समय के डीएम सर्किल रेट से भी कम दरों पर दी गईं। जीडीए पर निगम की जमीन रेड मॉल को बेचने का भी आरोप लगा है।
नगर निगम पार्षद व भाजपा नेता राजेंद्र त्यागी ने प्रेसवार्ता कर इन जमीनों से संबंधित 75 पेज के दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने जीडीए अधिकारियों पर गाजियाबाद का अब तक का सबसे बड़ा लैंड स्कैम करने का आरोप लगाया है।
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उन्होंने दस्तावेज राज्यपाल, मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री को भेजकर जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
राजेंद्र त्यागी ने दावा किया है कि जीडीए ने हाईटेक सिटी के लिए दिए गए लाइसेंसों की उन शर्तों का उल्लंघन किया है, जिनमें स्पष्ट था कि 60 फीसदी जमीन बिल्डर खुद खरीदेंगे व 40 फीसदी जमीन जीडीए किसानों से अधिग्रहण कर बिल्डरों को देगा।
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जीडीए ने किसानों से जमीन लेने की बजाय सरकारी जमीन का पुनर्ग्रहण कराकर हाईटेक सिटी के बिल्डरों को जमीन 99 साल की लीज पर दी है। साथ ही बिल्डर को फ्री होल्ड कराने और जमीन को गिरवी रख लोन लेने का अधिकार भी दे दिया।
उन्होंने मामले में तत्कालीन मंडलायुक्त को भी शामिल बताया। राजेंद्र त्यागी ने आरोप लगाया कि पुनर्ग्रहण कभी भी प्राइवेट पार्टी के पक्ष में नहीं हो सकता।
जीडीए अधिकारियों-तत्कालीन मंडलायुक्त ने जमीन पुनर्ग्रहण कर गलत तरीके से ट्रांसफर कर दी है। प्रेसवार्ता में भाजपा नेता हिमांशु मित्तल, सचिन सोनी, विनीत शर्मा मौजूद रहे।
बिल्डरों को दी गईं निगम की जमीनें
शाहपुर बम्हेटा, बयाना, नायफल, महरौली, काजीपुरा में नगर निगम में निहित 30.1958 हेक्टेयर जमीन पुनर्ग्रहीत कर बिल्डरों को दी गई।
तत्कालीन डीएम सर्किल रेटों के मुताबिक इस जमीन की कीमत 259.75 करोड़ रुपये है। आरोप है कि इन जमीनों को 900 से 1100 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से बिल्डरों को दिया गया।