दोस्तों संग भाभी से गैंगरेप मामले में तीनों आरोपी रिहा
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पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसका विवाह नवंबर 2012 को हुआ था। शादी के बाद से ही ससुराल में उसे दहेज के लिए तंग किया जाने लगा।
तीन जनवरी 2013 को उसे घर से निकाल दिया गया। दो दिन बाद जब वह वापस आई तो उसे घर में घुसने नहीं दिया गया।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि 15 जनवरी 2013 को वह फिर ससुराल आई तो उसके देवर ने दोस्तों के साथ मिलकर उसे कमरे में बंद कर सामूहिक दुष्कर्म किया।
भाभी का अरोप भरोसे के लायक नहीं
दोस्तों के साथ मिलकर भाभी से गैंगरेप करने के तीन आरोपियों को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया। अदालत ने कहा कि पीड़िता का बयान भरोसेमंद व विश्वास योग्य नहीं है। इसके अलावा मेडिकल व फोरेंसिक रिपोर्ट में दुष्कर्म की बात सामने नहीं आई है।
द्वारका स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश विरेंद्र भट्ट ने अपने फैसले में कहा कि सभी साक्ष्यों व तथ्यों से स्पष्ट है कि ट्रायल के दौरान आरोपियों ने जो भी तथ्य रखे वे सच्चाई पूर्ण थे।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनका अपराध साबित करने में असफल रहा है। पीड़िता के बयान विरोधाभास पूर्ण हैं और वह मेडिकल व फोरेंसिक साक्ष्यों से मेल नहीं खाते।