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देह व्यापार में उतारी गई महिला ने कोर्ट को लिखी चिट्ठी

Thu, 24 Apr 2014 08:35 AM IST
Updated Thu, 24 Apr 2014 08:35 AM IST
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?forcibly trafficked woman writes a letter to court

जबरन देह व्यापार के धंधे में उतारी गई एक महिला को आजाद कराने के बाद एक संस्था में भेज दिया गया लेकिन वह वहां भी खुश नहीं है।

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महिला ने अदालत को लिखे एक पत्र में अपनी मुश्किलें बयां की हैं। उसने उसने लिखा है, 'मैंने एफआईआर करवाकर कोई गलती कर दी है क्या? एफआईआर दर्ज करवाई थी चाहरदीवारी से बाहर निकलने के लिए और मुझे एक साल से बंद कर रखा गया है।'

महिला ने पत्र में यह भी लिखा कि उसका एक छोटा बेटा है जिसकी उसे बहुत याद आती है, उसे घर जाना है कोई केस नहीं करना। यह पत्र पीड़िता ने तीस हजारी स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज को लिखा है।
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दलाल ने रेड लाइट एरिया में बेचा

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पीड़िता के सब्र का बांध टूट रहा है। उसकी मानसिक हालत बिगड़ रही है और वह गुस्से में आकर मारपीट करने लगती है।

निर्मल छाया की डॉ. पूनम सिंह ने पीड़िता की हालत बयान करने वाले पत्र में लिखा है कि उसने बिजली के बोर्ड तोड़ दिए हैं। वह साथ रहने वाली दूसरी महिलाओं के साथ भी मारपीट करती है। इतना ही नहीं, वह फांसी लगाकर जान देने की धमकी देती है।

बता दें कि पीड़िता बांग्लादेश की रहने वाली है। एक दलाल ने उसे दिल्ली के रेड लाइट एरिया में बेच दिया था। यहां पर उससे जबरन वेश्यावृत्ति करवाई जा रही थी। उसने अपने ग्राहक के जरिए पुलिस को सूचना दी जिसके बाद उसे मुक्त करवाया गया। हालांकि कोठे की मालकिन पर मुकदमा चल रहा है लेकिन पीड़िता का बयान अभी तक दर्ज नहीं हुआ है।

आज तक नहीं हुई पेशी

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थाना कमला मार्केट पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर कोठे की मालकिन व अन्य के खिलाफ दुष्कर्म, वेश्यावृति करवाने व अन्य कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने उसे को मुक्त करवाकर कोर्ट में पेश किया।

कोर्ट के निर्देश पर महिला को 19 मार्च 2013 को निर्मल छाया भेज दिया गया। तब से वह वहीं पर बंद है। उसे चार अप्रैल को कोर्ट में पेश किया गया लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी।

इसके बाद सात अप्रैल को पुलिस ने उसे कोर्ट ले जाने की रोजनामचे में इंट्री की गई लेकिन उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया।

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