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20 करोड़ की ड्रग्स के साथ पांच पकड़े, 105 किलो अफीम बरामद
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 27 May 2016 04:18 AM IST
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अफीम की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पांचों आरोपी बरेली, यूपी के रहने वाले हैं। आरोपियों के कब्जे से 105 किलो अफीम बरामद की गई है। इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
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इसे अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी बताई जा रही है। आरोपियों में नंदराम एमएससी पास है। स्पेशल सेल उपायुक्त संजीव कुमार यादव के अनुसार सेल में तैनात इंस्पेक्टर अत्तर सिंह को इस गिरोह के बारे में करीब दो महीने पहले सूचना मिली थी। पुलिस टीम को पता चला कि गिरोह के सदस्य मणिपुर से बरेली, यूपी में अफीम लाते हैं।
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यहां से इसे दिल्ली, पंजाब व यूपी के अन्य हिस्सों में सप्लाई करते हैं। जांच के दौरान एसआई राजसिंह को सूचना मिली थी कि गिरोह के दो सदस्य बोलेरो से मुकरबा चौक, दिल्ली आएंगे। इंस्पेक्टर अत्तर सिंह की देखरेख में एसआई जितेंद्र तिवारी व संदीप कुमार की टीम ने मुकरबा चौक पर घेराबंदी कर दो आरोपी नंदराम और मांगली को पकड़ लिया।
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इनके कब्जे से 80 किलो अफीम बरामद की गई। आरोपियों ने बताया कि वह उमेश साहनी, चंद्रपाल उर्फ तेसू और राकेश गुप्ता के साथ 15 से 20 वर्ष से मादक पदार्थों की सप्लाई करने में लगे हैं। ये दोनों उमेश साहनी के साथ मिलकर 105 किलो अफीम मणिपुर के जगन्नाथ से लेकर आए हैं।
दोनों पिछले दो वर्ष से मणिपुर से अफीम ला रहे हैं। पुलिस टीम ने 25 मई को बरेली में जाकर चंद्रपाल के घर में दबिश दी। आरोपी ने घर की छत से कूदकर भागने का प्रयास किया। इसमें वह घायल हो गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को उसके घर से 10 किलो अफीम मिली।
पुलिस ने उमेश साहनी को गिरफ्तार कर लिया। उसके घर से 13 किलो अफीम बरामद की गई। इसके बाद राकेश गुप्ता को उसके घर से गिरफ्तार किया गया। उसके घर से दो किलो अफीम बरामद की गई।
गाड़ी की छत में छिपाकर लाते थे अफीम
गाड़ी की छत में छिपाकर लाते थे अफीम
पुलिस पूछताछ में पता लगा कि पांचों आरोपियों ने बोलेरो खरीदी थी। इन्होंने जीप की पिछली सीट के पास छत में अफीम छिपाने की जगह बना रखी थी। मणिपुर से आते हुए जीत की कई जगह चेकिंग होती थी मगर आरोपी पकड़े नहीं जाते थे। इन्होंने अफीम को एक-एक किलो के पैकेट में रखा हुआ था।
कैसे एक दूसरे से जुड़े आरोपी
नई बस्ती, नारबुलगंज, बरेली, यूपी निवासी नंदराम उर्फ मास्टर उर्फ अरविंद (56) ने रूहेलखंड यूनिवर्सिटी से एनिमल साइंस में एमएससी और इकोनॉमिक्स में एमए किया हुआ है। नौकरी न मिलने के कारण वह राकेश गुप्ता, मांगली, चंद्रपाल के संपर्क में आकर मादक पदार्थों की तस्करी करने लगा।
नंदराम उमेश व मांगली के साथ मणिपुर अफीम लेने जाता था। वह दो वर्ष से इस धंधे में है। गांव फाउवापुर, जिला बरेली, यूपी निवासी मांगली राम (30) कभी स्कूल नहीं गया। अपने साले मांगली के कहने पर वह मादक पदार्थों की तस्करी करने लगा था।
राजेंद्र नगर, बरेली, यूपी निवासी उमेश साहनी (50) दिल्ली से स्पेयर पार्ट्र्स खरीदकर बरेली में बेचता था। राकेश के कहने पर ड्रग्स सप्लाई करने लगा। गांव मिल्कमुजाहिरा, बेरली यूपी निवासी चंद्रपाल (50) वर्ष 2009 में बरेली गया था। यहां प्रॉपर्टी डीलर का काम करने लगा।
इस दौरान ये राकेश गुप्ता के संपर्कमें आया और मादक पदार्थों की तस्करी करने लगा। गांव घिलोरा बोमबोरा बरेली, यूपी निवासी राकेश गुप्ता (50) दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल थाने में दर्ज एनडीपीएस के मामले में वांछित था। वह पिछले 20 वर्ष से मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा है।
पुलिस पूछताछ में पता लगा कि पांचों आरोपियों ने बोलेरो खरीदी थी। इन्होंने जीप की पिछली सीट के पास छत में अफीम छिपाने की जगह बना रखी थी। मणिपुर से आते हुए जीत की कई जगह चेकिंग होती थी मगर आरोपी पकड़े नहीं जाते थे। इन्होंने अफीम को एक-एक किलो के पैकेट में रखा हुआ था।
कैसे एक दूसरे से जुड़े आरोपी
नई बस्ती, नारबुलगंज, बरेली, यूपी निवासी नंदराम उर्फ मास्टर उर्फ अरविंद (56) ने रूहेलखंड यूनिवर्सिटी से एनिमल साइंस में एमएससी और इकोनॉमिक्स में एमए किया हुआ है। नौकरी न मिलने के कारण वह राकेश गुप्ता, मांगली, चंद्रपाल के संपर्क में आकर मादक पदार्थों की तस्करी करने लगा।
नंदराम उमेश व मांगली के साथ मणिपुर अफीम लेने जाता था। वह दो वर्ष से इस धंधे में है। गांव फाउवापुर, जिला बरेली, यूपी निवासी मांगली राम (30) कभी स्कूल नहीं गया। अपने साले मांगली के कहने पर वह मादक पदार्थों की तस्करी करने लगा था।
राजेंद्र नगर, बरेली, यूपी निवासी उमेश साहनी (50) दिल्ली से स्पेयर पार्ट्र्स खरीदकर बरेली में बेचता था। राकेश के कहने पर ड्रग्स सप्लाई करने लगा। गांव मिल्कमुजाहिरा, बेरली यूपी निवासी चंद्रपाल (50) वर्ष 2009 में बरेली गया था। यहां प्रॉपर्टी डीलर का काम करने लगा।
इस दौरान ये राकेश गुप्ता के संपर्कमें आया और मादक पदार्थों की तस्करी करने लगा। गांव घिलोरा बोमबोरा बरेली, यूपी निवासी राकेश गुप्ता (50) दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल थाने में दर्ज एनडीपीएस के मामले में वांछित था। वह पिछले 20 वर्ष से मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा है।