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गलत रिपोर्ट देने वाले दो सिपाही बर्खास्त
अमर उजाला, मसूरी
Updated Mon, 09 Nov 2015 01:05 AM IST
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राजबीर ‘मौत’ मामले में जिस शव की पहचान राजबीर के रूप में उसके परिजनों ने की थी, उसका डीएनए राजबीर के भाई राकेश और मां रामवती से नहीं मिला। यानी वह शव किसी और व्यक्ति का था। गलत रिपोर्ट देने वाले दो सिपाहियों विपिन और रंजीत को बर्खास्त कर दिया गया है।
एसओ मसूरी ने बताया कि सात नवंबर 2013 को गंगनहर के रेग्युलेटर में एक व्यक्ति का शव मिला था। उसका एक हाथ कटा था। पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी।
10 नवंबर को जाफराबाद दिल्ली निवासी एक परिवार ने शव की पहचान राजबीर उर्फ छंगा (35) के रूप में की थी। राजबीर को कड़कड़डूमा कोर्ट से हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। वह जमानत पर बाहर है।
परिजनों ने जब उसकी मौत की होने की अर्जी कोर्ट में लगाई तो कोर्ट ने पुलिस से उसके फिंगर प्रिंट मांगे। पुलिस ने कथित राजबीर के शव की 10 अंगुलियों के फिंगर प्रिंट कोर्ट में पेश किए, जबकि जो शव बरामद हुआ था, उसके एक हाथ था ही नहीं।
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पुलिसवालों की लापरवाही सामने आने पर मामले की जांच कराई गई। 2014 में शव के डीएनए का मिलान राजबीर के परिजनों से कराया गया।
टेस्ट में डीएनए नहीं मिला। पुलिस ने राजबीर के शव की पहचान करने वाले पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की, जिनमें से चार गिरफ्तार कर लिए, एक भागा हुआ है।
दूसरी तरफ, बाद में जाफराबाद थाने में परिजनों ने राजबीर के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब गलत रिपोर्ट देने वाले सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया है।
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एसओ मसूरी ने बताया कि सात नवंबर 2013 को गंगनहर के रेग्युलेटर में एक व्यक्ति का शव मिला था। उसका एक हाथ कटा था। पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी।
10 नवंबर को जाफराबाद दिल्ली निवासी एक परिवार ने शव की पहचान राजबीर उर्फ छंगा (35) के रूप में की थी। राजबीर को कड़कड़डूमा कोर्ट से हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। वह जमानत पर बाहर है।
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परिजनों ने जब उसकी मौत की होने की अर्जी कोर्ट में लगाई तो कोर्ट ने पुलिस से उसके फिंगर प्रिंट मांगे। पुलिस ने कथित राजबीर के शव की 10 अंगुलियों के फिंगर प्रिंट कोर्ट में पेश किए, जबकि जो शव बरामद हुआ था, उसके एक हाथ था ही नहीं।
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पुलिसवालों की लापरवाही सामने आने पर मामले की जांच कराई गई। 2014 में शव के डीएनए का मिलान राजबीर के परिजनों से कराया गया।
टेस्ट में डीएनए नहीं मिला। पुलिस ने राजबीर के शव की पहचान करने वाले पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की, जिनमें से चार गिरफ्तार कर लिए, एक भागा हुआ है।
दूसरी तरफ, बाद में जाफराबाद थाने में परिजनों ने राजबीर के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब गलत रिपोर्ट देने वाले सिपाहियों को बर्खास्त कर दिया है।