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ऐसे हुआ डीयू के फर्जी दाखिला गैंग का पर्दाफाश

Sat, 30 Aug 2014 04:01 PM IST
Updated Sat, 30 Aug 2014 04:01 PM IST
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DU admission scam: they charge 5-10 lakh for admissions.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन में चल रहे गोरखधंधे को पर्दाफाश कर दिया है। दिल्ली पुलिस के इस खुलासे के बाद कई बड़े खुलासे सामने आए। पुलिस ने अपनी शुरूआती जांच में पाया कि ये गैंग, डीयू साउथ कैंपस के कई कॉलेजों में पैसे लेकर जाली कागजातों के सहारे छात्रों का एडमिशन कराते थे।

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अब तक की जांच में सामने आया है कि दो साल में 13 एडमिशन फर्जी कागजातों के जरिए हुए हैं, जो साउथ कैंपस के वेंकटेश्वर कॉलेज में ही लिए गए हैं।

इस तरह यह कहना गलत नहीं होगा कि आगे की जांच में कॉलेज प्रबंधन के लोग भी इसमें शामिल पाए जाएं। पुलिस के अनुसार अब तक धौला कुआं स्थित एआरएसडी कॉलेज से भी एक फर्जी दाखिला पाया गया है जो फर्जी दाखिलों की संख्या को 14 कर देता है और ऐसा भी हो सकता है कि ये मात्र शुरूआत हो बड़ा खुलासा होना अभी बाकी हो।

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एक एडम‌िशन के लेते थे 5-10 लाख

DU admission scam: they charge 5-10 lakh for admissions.

अतिरिक्त कमिश्नर (क्राइम) अशोक चंद के अनुसार फर्जी दाखिले कराने वाले गैंग के मुखिया के रूप ‌में‌ जिसका नाम सामने आया है वो हिंदू कॉलेज से ग्रैजुएट अरविंद यादव (28) है।

पकड़े गए ‌तीन आरोपियों में से मुकेश मान तो वेंकटेश्वर कॉलेज का छात्र है, जिसका दाखिला पिछले साल फर्जी कागजों के सहारे दाख‌िला हुआ था और बाद में वो इस गैंग का सदस्य बन गया।

तीसरा आरोपी दयाराम(36) बुलंदशहर में एक प्राइवेट टीचर था जो इस गैंग के लिए छात्रों नकली कागजात बनवाने का काम करता था।

पुलिस ने बताया कि फर्जी कागजों के जरिए डीयू में दाखिला दिलाने वाला ये गैंग छात्रों से 5-10 लाख रुपए के बीच में कुछ भी मांग लेता था। ये रकम छात्र के प्रोफाइल और उसके चुने विषय पर निर्भर करती थी। ये गैंग हर कोर्स में दाखिला दिलाने की गारंटी देता था।

डीसीपी (क्राइम) भीषम सिंह ने बताया कि उनकी टीम को कुछ सूचनाएं मिली थीं कि फर्जी एडमिशन कराने वाला कोई शख्स द्वारका आने वाला है।

इस सूचना के मिलते ही एसीपी मल्होत्रा, इंस्पेक्टर पीसी यादव और अन्य लोगों को मिलाकर एक टीम बनाई गई और फर्जी एडमिशन गैंग को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया।

गैंग के मुखिया अरविंद यादव को तब पकड़ा गया जब वो अपनी फोर्ड एंडेवर में घूम रहा था। पुलिस ने उसके पास से फर्जी कागजात और सरकारी अस्पताल के डॉक्टर के फर्जी स्टांप बरामद किए। भीषम सिंह ने बताया कि यादव को हिरासत में लेने के बाद केस दायर किया गया और क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच शुरू की।

कॉलेज के अध‌िकारी भी हो सकते हैं गैंग का ह‌िस्सा

DU admission scam: they charge 5-10 lakh for admissions.

जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि गैंग का मुखिया यादव हिंदू कॉलेज से ग्रैजुएट है तो उसे यूनिवर्सिटी में होने वाले दाखिला प्रक्रिया की ‌कमियां पता थीं। पुलिस के अनुसार इन्हीं कम‌ियों का फायदा उठाते हुए यादव ने दयाराम को अपने साथ मिलाया ताकि वो जाली दस्तावेज और सर्टिफिकेट तैयार करवा सके और दोनों मिलकर गैंग चलाने लगे।

यादव ने 2013 में ‌फर्जी कागजातों के जरिए वेंकटेश्वर कॉलेज में तीन दाखिले कराए, जिसमें से एक उनके गैंग के सदस्य मुकेश मान का भी एडमिशन था। पुलिस ने इनके पास से एक लैपटॉप और एक प्रिंटर भी बरामद किया। इनके फोन के सभी रिकॉर्ड्स की पुलिस बारीकी से जांच कर रही है।

तीनों आरोपियों से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ की जाएगी। पुलिस का कहना है कि वो कॉलेज के ‌अधिकारियों से भी पूछताछ करेगी। पुलिस ने बताया है कि दयाराम को नकली कागजात उपलब्ध कराने वाले और छात्रों को इस गैंग तक लाने वाले व्यक्तियों को अभी नहीं पकड़ा जा सका है इनकी खोज चल रही है।

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि हम कॉलेज अधिकारियों की भी जांच करेंगे कि क्या कोई अधिकारी इस रैकेट में शामिल है। इस साल वेंकटेश्वर कॉलेज में दस फर्जी एडमिशन हुए हैं और इतनी बड़ी संख्या में फर्जी दाखिला होना वो भी बिना किसी आंतरिकर अधिकारी के मिले, मुश्किल है। पुलिस को इस बात की भी हैरानी है कि इस गैंग का सद्स्य मुकेश मान 2 साल से इस कॉलेज में बिना किसी परेशानी के पढ़ रहा है इससे कॉलेज पर भी शक जाता है।

कॉलेज की प्रिंसिपल पी हेमलता रेड्डी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं पता कि ये नकली एडमिशन हैं या नहीं। पुलिस ने हमसे कुछ दस्तावेज मांगे और वो हमने उपलब्ध करा दिए।

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पहले भी हो चुका है ऐसे स्कैंडलों का खुलासा

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पकड़े गए रैकेट का पूरी तरह खुलासा होना अभी बाकी है। पहले भी डीयू में नकली कागजों के जरिए दाखिला कराने वाले गैंग का खुलासा 2011 में हुआ था। उस साल जून महीने में पुलिस ने उस रैकेट का भांडाफोड़ किया था और तीन युवकों को हिरासत में लिया था।

वो रैकेट दाखिले के लिए तीन से पांच लाख रुपए तक लेता था। उस रैकेट ने डीयू के अलग-अलग कॉलेजों में 12 छात्रों को दाखिला दिलाया था। 2011 में चार महीने बाद नवंबर में एक और ए‌डमिशन स्कैंडल पकड़ा गया था जिसमें चार नकली मार्कशीट बरामद किए गए थे जो रामजस कॉलेज में दाखिले के लिए इस्तेमाल हुए थे। पिछले साल भी शहीद भगत सिंह कॉलेज ने अपने प्रथम वर्ष के 18 छात्रों के दाखिले रद्द किए थे जब कॉलेज की ऑडिट कमीटी ने उन छात्रों की दी गई जानकारी को गलत पाया था।

नाम न बताने की शर्त पर डीयू के एक अधिकारी ने बताया कि इस बार डीयू ने दावा किया था कि वो फर्जी दाखिलों को रोकने के पूरे इंतजाम कर रही है। डीयू ने दस्तावेजों की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ रखने और एक अगल लेबोरेटरी बनाने का भी दावा किया था।

डीयू अधिकारियों का कहना है कि एडमिशन विभाग हर आवेदन को अलग-अलग जांच रही है और सर्टिफिकेटों को सत्यापन के लिए स्कूल भेज दिया गया है। हालांकि ये लंबी प्रक्रिया है जिसमें छह महीने का समय लगता है और इस तरह ये तब ही हो पाएगा। अगर इस बीच में किसी छात्र के दस्तावेज गलत पाए जाते हैं तो उसका दाखिला तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा। पर इस स्थिति में जहां बिना किसी परेशानी के छात्र दूसरे साल में प्रवेश कर गया यह हैरान करता है। हम खुद इस मामले की जांच कर रहे हैं।

नकली दस्तावेजों से ल‌िया दाख‌िला और बन गया अपराधी

DU admission scam: they charge 5-10 lakh for admissions.

उसे इंग्लिश में 18 नंबर, अकाउंटेंसी में 9 नंबर और बिजनेस स्टडीज में जीरो नंबर मिले हैं। यहां तक कि वो दो सबजेक्ट के एक्जाम में एबसेंट भी था। इन नंबरों के बाद भी मुकेश मान का कॉलेज में पढ़ने का सपना साकार हो गया।

ये सब हुआ उसके प्रॉपर्टी का काम करने वाले पिता के ढेर सारे पैसों, एक फर्जी एडमिशन प्रक्रिया और एक रैकेट की वजह से, जिसने उसे डीयू के किसी भी कॉलेज और किसी भी कोर्स में एडमिशन दिलाने का वादा किया था।

वो डीयू के माने हुए कॉलेज वेंकटेश्वर में पढने भी लगा बल्कि एक साल तक पढ़ा भी और पास भी कर लिया और दूसरे साल में प्रवेश भी कर लिया।

कॉलेज जिसके पास उसके सभी विषयों में टॉप करने के रिजल्ट थे, शायद उस कॉलेज को कभी मुकेश की सच्चाई का पता भी नहीं चलता अगर ‌एक खबरी नकली कागजात के ‌जरिए एडमिशन कराने वाले इस गैंग का भांडा फोड़ नहीं करता।

वॉट्सऐप के ज‌र‌िए द‌िखाता था बड़े सपने

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वेंकटेश्वर कॉलेज के छात्रों के लिए इस रैकेट के गैंग मेंबर बड़ी हस्ती थे जो साउथ कैंपस में कुछ भी करवा सकते थे। उनकी जीवनशैली कईयों के लिए सपना थी और उन्होंने अपने आप को इस तरह दिखा रखा था जैसे उनके कनेक्शन बड़े नेताओं और स्टूडेंट यूनियन तक में थे ताकि कोई उनसे पंगा लेने की कोशिश न करे।

गैंग के मुखिया अरविंद यादव की फोर्ड एंडेवर कार उन चंद कारों में से थी जो पूरे कैंपस में घूमा करती थी। यादव के संपर्क में आने वाले छात्रों के माता-पिता आश्वस्त रहते थे कि उनका बच्चा सही हाथों में है। यादव उनके सामने ही एडमिशन की सारी प्रक्रिया पूरी करता था।

यादव अपना काम वॉट्सऐप पर मैसेज करके करता था। वो अपने सभी जानने वालों को मैसेज के जरिए ये वादा करता था कि कोई भी कम अंक वाला बच्चा डीयू के किसी भी टॉप कॉलेज में दाखिला पा सकता है। मान पर आरोप है कि वो छात्र लाने का काम करता था।

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