बीजेपी नेता ने कहा, इकलाख के परिवार के खिलाफ दर्ज हो केस
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दादरी में हुए इकलाख हत्याकांड में मुख्य आरोपी के पिता व बीजेपी के स्थानीय नेता संजय राणा ने मथुरा फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट सामने आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। संजय ने कहा कि हम सही थे, इकलाख व उसके परिवार ने गो हत्या की थी।
संजय ने ये भी कहा कि अब जबकि लैब रिपोर्ट में ये बात साफ हो गई है कि इकलाख के घर में पाया गया मांस गाय का था तो इकलाख के परिवार को दिया गया मुआवजा वापस ले लेना चाहिए।
साथ ही संजय ये भी चाहते हैं कि उनके बेटे समेत सभी आरोपियों को छोड़ दिया जाए और गोहत्या के लिए इकलाख के परिवार के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।
बीफ था इकलाख के घर से मिला मांस
28 सितंबर 2015 को कथित तौर पर बीफ खाने के कारण भीड़ ने पीट-पीटकर 50 वर्षीय इकलाख की हत्या कर दी थी। पुलिस ने 28 सितंबर को ही इकलाख के घर में फ्रिज में रखे गए मांस को जब्त कर लिया था। उसी मांस को जांच के लिए मथुरा के फोरेंसिक जांच प्रयोगशाला भेजा गया था। गौरतलब है कि इससे पहले दावा किया गया था कि फ्रिज में रखा गया मांस मटन (बकरे का मांस) था।
दादरी कांड के नाम से चर्चित इस मामले में सरकारी वकील मनोज तेवतिया ने बताया कि बंद लिफाफे में आई फोरेंसिक रिपोर्ट को मंगलवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ही खोला गया। इसके बाद बिसाहड़ा कांड के आरोपियों को रिपोर्ट की नकल उपलब्ध करवाई गई।
आज मिलेगी प्रमाणित प्रति
जांच रिपोर्ट में सैंपल पर किए गए रासायनिक विश्लेषण में उसे गाय या गाय के वंशज (बछड़े) का मांस होने की बात कही गई। उधर, इकलाख के वकील यूसुफ सैफी ने कहा कि उनके पास रिपोर्ट की अभी प्रमाणित प्रति नहीं मिली है। उनको बुधवार को प्रति मिलेगी।
अगर इस तरह की कोई रिपोर्ट आई भी है तो उसका इकलाख की हत्या के केस से कोई मतलब नहीं है। इकलाख की हत्या और परिवार पर जानलेवा हमला हुआ था। इसको साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य और गवाह मौजूद हैं। अभियोजन पक्ष के वकील मनोज तेवतिया का भी कहना है कि इस रिपोर्ट से इकलाख की हत्या मामले पर कोई असर नहीं पडे़गा।
इकलाख की हत्या के आरोप में पुलिस ने एक नाबालिग सहित 18 लोगों को पकड़ा है। इनमें से 10 आरोपियों को पुलिस ने पहले ही पकड़ लिया था। आठ आरोपियों को इकलाख की बेटी शाइस्ता और बेटे दानिश की गवाही पर आरोपी बनाया गया था।
देश में मुद्दा बन गया था दादरी कांड
दादरी की यह घटना उस वक्त देश की राजनीति में बेहद गरमा गया था। इस घटना और देश में कथित तौर पर बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में तमाम बुद्धिजीवियों ने अपने सम्मान लौटा दिए थे। केंद्र की भाजपा सरकार पर समाज में असहिष्णुता फैलाने के आरोप लगे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी इस मामले में नसीहत दी थी, जिसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने बिहार में एक रैली में लोगों से संयम बरतने और राष्ट्रपति की सलाह मानने की अपील की थी।
यह है मामला
28 सितंबर की शाम बिसाहड़ा गांव में कथित तौर पर बछड़ा काटने की बात आग की तरह फैल गई। गांव के कुछ युवाओं का कहना था कि उन्होंने इकलाख को बछड़े का सिर और कुछ हिस्सा कूड़े में फेंककर जाते देखा था। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में युवक और गांव के अन्य लोग जमा हो गए।
भीड़ में मौजूद युवकों ने इकलाख और उसके बेटे दानिश की घर में घुसकर जमकर पिटाई कर दी थी। गांववासियों की सूचना पर पहुंची पुलिस को दानिश पहली मंजिल पर पड़ा मिला था। वहीं, इकलाख को गली में फेंक दिया गया था। मौके पर पहुंची पुलिस ने इकलाख को निजी अस्पताल ले गई थी, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया था।
इकलाख के परिवार पर हो सकता है गोहत्या का केस
मामले के एक आरोपी के वकील रामशरण नागर का कहना है कि 28 अक्तूबर को मंदिर से गाय काटने का एनाउंसमेंट इस घटना का मुख्य कारण माना गया है। पुलिस ने ही इकलाख के घर से बरामद मांस को जांच के लिए भेजा था। जांच रिपोर्ट में बीफ की पुष्टि हो गई है। इससे साफ जाहिर है कि गाय के बछड़े को काटने से ही ग्रामीण उग्र हुए थे। उग्र भीड़ ने परिवार पर हमला किया। इसमें 17 युवकों को दोषी बना दिया। पुलिस ने जांच में गलत तथ्यों और बयानों का इस्तेमाल किया है। मामले में गोहत्या की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।