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बचपन के दोस्त ने ही मार डाला कारोबारी को, हथियाना चाहता था बिजनेस
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Wed, 30 Nov 2016 12:43 AM IST
सार
कारोबार पर कब्जा करने की नीयत से दोस्त पवन ने की थी हत्या
गारमेंट कारोबारी की हत्या की गुत्थी सुलझी
सेक्टर 30 क्राइम ब्रांच टीम ने गिरफ्तार किया
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हत्या
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गारमेंट कारोबारी सुनील मलिक की हत्या उसके ही साथी पवन ने की थी। सुनील का शव गौतमबुद्ध नगर (यूपी) के दादरी में 5 सितंबर को जली हुई हालत में पड़ा मिला था। पुलिस ने ढाई महीने की निगरानी के बाद पवन को गिरफ्तार किया है।
मालूम हो कि सेक्टर 31 निवासी गारमेंट कारोबारी सुनील मलिक 5 सितंबर 2016 की रात कार लेकर घर से निकले थे लेकिन वापस नहीं लौटे। 6 सितंबर को पिता ने सुनील के अपहरण का केस दर्ज कराया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि कुछ दिन पहले सुनील को एक गुमनाम पत्र आया था।
पत्र किसी युवक ने लिखा था। लेखक ने सुनील को धमकी दी थी कि वह उसकी बहन को छोड़ दे वरना जान से हाथ धोना पड़ेगा। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच में सुनील के दोस्त और कारोबार के पार्टनर पवन की गतिविधियां संदिग्ध लगीं।
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पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पवन ने सुनील की हत्या और साजिश रचना कुबूल किया। पुलिस के मुताबिक सुनील और पवन बचपन के दोस्त थे। पवन ने ही कारोबार शुरू करने में पवन की आर्थिक मदद की थी। सुनीत का कारोबार जम गया लेकिन पवन की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी।
इस बीच पवन को लगा कि सुनील उससे खराब व्यवहार कर रहा है और कारोबार पर भी ध्यान नहीं दे रहा है। उसने सुनील को रास्ते से हटा कर उसके कारोबार को हड़पने की साजिश रची। उसने ही सुनील को धमकी भरा गुमनाम पत्र भेजा था ताकि पुलिस गुमराह हो जाए।
5 सितंबर की रात मौका पाकर पवन ने सुनील को मौत के घाट उतार दिया और चचेरे भाई योगेंद्र के साथ मिलकर दादरी इलाके में शव को ठिकाने लगाया था। अगले दिन सुनील की कार को योगेंद्र और उसके एक दोस्त ने मिलकर सोहना थाना इलाके में जला दिया था। सेक्टर 30 क्राइम ब्रांच टीम ने पवन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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मालूम हो कि सेक्टर 31 निवासी गारमेंट कारोबारी सुनील मलिक 5 सितंबर 2016 की रात कार लेकर घर से निकले थे लेकिन वापस नहीं लौटे। 6 सितंबर को पिता ने सुनील के अपहरण का केस दर्ज कराया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि कुछ दिन पहले सुनील को एक गुमनाम पत्र आया था।
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पत्र किसी युवक ने लिखा था। लेखक ने सुनील को धमकी दी थी कि वह उसकी बहन को छोड़ दे वरना जान से हाथ धोना पड़ेगा। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच में सुनील के दोस्त और कारोबार के पार्टनर पवन की गतिविधियां संदिग्ध लगीं।
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पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पवन ने सुनील की हत्या और साजिश रचना कुबूल किया। पुलिस के मुताबिक सुनील और पवन बचपन के दोस्त थे। पवन ने ही कारोबार शुरू करने में पवन की आर्थिक मदद की थी। सुनीत का कारोबार जम गया लेकिन पवन की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी।
इस बीच पवन को लगा कि सुनील उससे खराब व्यवहार कर रहा है और कारोबार पर भी ध्यान नहीं दे रहा है। उसने सुनील को रास्ते से हटा कर उसके कारोबार को हड़पने की साजिश रची। उसने ही सुनील को धमकी भरा गुमनाम पत्र भेजा था ताकि पुलिस गुमराह हो जाए।
5 सितंबर की रात मौका पाकर पवन ने सुनील को मौत के घाट उतार दिया और चचेरे भाई योगेंद्र के साथ मिलकर दादरी इलाके में शव को ठिकाने लगाया था। अगले दिन सुनील की कार को योगेंद्र और उसके एक दोस्त ने मिलकर सोहना थाना इलाके में जला दिया था। सेक्टर 30 क्राइम ब्रांच टीम ने पवन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।