तेवतिया पर हमले के लिए ली एक करोड़ की सुपारी
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भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया पर कातिलाना हमला फुल प्रूफ तैयारी के साथ किया गया था। इसके पीछे महीनों की रेकी थी। तफ्तीश कर रहे पुलिसकर्मियों की मानें तो शूटरों को सुपारी भी 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक दी गई होगी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि हमले के पीछे मुजफ्फरनगर और बागपत के शूटरों के नाम आ रहे हैं, जो भूमिगत हो गए हैं। उनकी तलाश में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में दबिश दी जा रही है।
साथ ही यह भी बातें जांच में तैर रही हैं कि इतने बड़े हमले में करोड़ों रुपये खर्च हुए होंगे। दो-चार दिन में साजिश नहीं रची गई होगी, महीनों की रेकी के बाद वारदात की गई होगी।
पुलिस की थ्योरी के मुताबिक अगर मनोज और शेखर को साजिशकर्ता मान भी लिया जाए तो हमले के पीछे उनके अलावा भी कोई और है, जिसकी भूमिका बेहद खास रही है। यह बातें भी छानबीन में प्रकाश में रही हैं।
मनोज और शेखर को तलाश रही पुलिस
हालांकि पुलिस फिलहाल ज्यादा फोकस मनोज और शेखर की तलाश पर कर रही है, इनकी गिरफ्तारी के बाद परत दर परत खुलने की उम्मीद लगाए है। अभी तक की छानबीन में जो बातें आ रही हैं, उनमें वारदात के पीछे रंजिश के अलावा मुख्य वजह प्रॉपर्टी की भी सामने आ रही है।
दरअसल, मनोज की रंजिश करीब 17 साल से चल रही है। राकेश हसनपुरिया का एनकाउंटर हुए भी 12 साल से ज्यादा हो चुके हैं। उसकी हिरासत में ली गई पत्नी से भी पुलिस अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं लगा सकी है।
शेखर की सीधे कोई रंजिश ब्रजपाल तेवतिया से नहीं है। ऐसे में सिर्फ इन्हीं रंजिशों का वारदात के पीछे होने से पुलिसकर्मी भी इत्तेफाक नहीं रख रहे हैं। उनका मानना है कि भूमि अधिग्रहण को लेकर एक कुख्यात से प्रॉपर्टी विवाद और ये रंजिशें मिलकर हमले की वजह बनी होंगी।
तेवतिया के सारे दुश्मन दोस्त बन गए और उन्होंने मिलकर साजिश रची और वारदात कराई। एसएसपी भी इससे इत्तेफाक रखते हैं कि हमले के पीछे कोई एक ग्रुप नहीं है बल्कि कई ग्रुप हैं, जिन्होंने वारदात कराई।
तीन दिन में पुलिस ने खंगाल डाली 20 हजार फोन कॉल्स
हमलावरों और साजिश रचने वालों की तलाश में पुलिस टीमें तीन दिनों 20 हजार से ज्यादा फोन कॉल्स खंगाल चुकी हैं। जो संदिग्ध मोबाइल और लैंड लाइन नंबर खंगाले गए हैं, वह मुरादनगर, मोदीनगर और गाजियाबाद के हैं।
छानबीन में मनोज की आखिरी लोकेशन जयपुर आई थी, मगर बृहस्पतिवार से उसका मोबाइल बंद है, उसके बाद की लोकेशन पुलिस को नहीं मिल पा रही है। ऐसा ही कुछ शेखर के साथ हो रहा है। फोन बंद होने के कारण पुलिस को उसकी भी पुख्ता लोकेशन नहीं मिल पा रही है।
बैग से मिल सकता है सुराग
पुलिस को बदमाशों का हथियारों से भरा जो बैग मिला था, उससे भी पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है। हालांकि पुलिस अभी उस दिशा में ज्यादा काम नहीं कर रही है। दरअसल, नीले और पीले रंग के जिस बैग में बदमाश हथियार छोड़ गए, वह नया है।
यानि हाल ही में उसे खरीदा गया होगा। इस तरह के बैग बेचने वाली गाजियाबाद 8-10 दुकानें हैं, इसी तरह मेरठ में स्पोर्ट्स की दुकानों पर ऐसे बैग बेचे जाते हैं। छानबीन करने पर पुलिस को कहीं सीसीटीवी फुटेज में बैग खरीदने वाले दिख सकते हैं और अहम सुराग हाथ लग सकता है।