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30 ठिकानों पर छापे के बाद भी नहीं मिला अख्तर खान का हत्यारा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Mon, 02 May 2016 01:04 PM IST
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घटनास्थल
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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दादरी में मुठभेड़ के दौरान दरोगा अख्तर खान की हत्या करने वाले हिस्ट्रीशीटर जावेद को आर्थिक मदद करने के शक में एक सभासद से दादरी कोतवाली बुलाकर पूछताछ की गई। वहीं एक अन्य स्थानीय नेता पर जावेद को हथियार खरीदने में आर्थिक मदद करने की भी जानकारी मिली है। पुलिस दोनों की जांच कर रही है।
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दरोगा अख्तर खान को गोली मारने वाले हिस्ट्रीशीटर जावेद, उसके परिवार से जुडे़ हर व्यक्ति का रिकॉर्ड पुलिस खंगालने में लगी है। पुलिस को सूचना मिली कि जावेद के भाई सोनू को दादरी के एक सभासद ने नौकरी दिलाई थी। पुलिस को यह सूचना भी मिली कि सभासद जावेद को फंड उपलब्ध कराता था।
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दादरी पुलिस ने सभासद को कोतवाली बुलाकर पूछताछ की। दिन भर हुई पूछताछ के बाद भी जावेद के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी। वहीं एक स्थानीय नेता पर हथियार खरीदने के लिए फंडिंग करने का शक है। नई आबादी के गिरोह को संचालित करने में भूमिका निभाने वाले स्थानीय नेताओं पर पुलिस जांच कर रही है।
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पुलिस सूत्रों का कहना है कि अभी इन्हें हिरासत में नहीं लिया लेकिन हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। बताया जा रहा है कि जावेद ने जितने हथियार एकत्र किए उसमें नेताओं की फंडिंग थी। आर्थिक मदद के बिना जावेद इतने हथियार नहीं खरीद सकता था। मदद करने के साथ ही उसे छुड़ाने के लिए पुलिस से सिफारिश की जाती थी। सिफारिश करने वाले नेता भी जांच के घेरे में है।
30 ठिकानों पर छापे के बाद नहीं मिला
हिस्ट्रीशटर जावेद और उसके फरार साथियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने बागपत, रबुपुरा, जलपुरा, अलीगढ़, मेवात के 30 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे। छापे के दौरान पुलिस टीम ने वहां की पुलिस से भी सहयोग लिया। नजदीकी रिश्तेदारों के गायब होने के चलते पुलिस को निराशा हाथ लगी है। हालांकि पुलिस को आशंका ही कि जावेद दूसरे प्रदेश में किसी अन्य मामले में जेल जाने की फिराक में है। इसे लेकर पुलिस के अधिकारी दूसरे प्रदेशों के अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए हैं ताकि उसे पकड़ा जा सके।