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होली के दिन निकली दो दोस्तों की एक साथ अर्थी तो रो दिया पूरा गांव

Thu, 16 Mar 2017 04:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिलखुवा
ब्यूरो/अमर उजाला, पिलखुवा Updated Thu, 16 Mar 2017 04:43 PM IST
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cremation of two friends on holi festival
cremation of two friends - फोटो : अमर उजाला

होली के दिन देसी शराब पीने से दो दोस्तों की जान चली गई और तीन दोस्तों की तबीयत बिगड़ गई। जब दोनों की अर्थी एक साथ गांव से निकली तो उनका परिवार ही नहीं, पूरा गांव रो दिया। मामला पिलखुआ के सिखैड़ा गांव का है। 

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सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। मृतकों के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई नहीं कराते हुए दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, पुलिस मामले में कार्रवाई की बात कह रही है। जानकारी के अनुसार, सिखैड़ा गांव में होली के दिन देसी शराब पीने से रामा, आनंद, गगन, कुंवरपाल और सुभाष की तबीयत बिगड़ गई।
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जब तक पांचों दोस्त कुछ समझ पाते रामा (45) और आनंद (35) ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। आनन-फानन में परिजनों ने गगन, कुंवरपाल और सुभाष को नजदीकी के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें छुट्टी दे दी।
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वहीं, देसी शराब पीने हुई मौत की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। इस दौरान रामा व आनंद के परिजनों ने पुलिस से दोनों की बीमारी के चलते मौत होने की बात कही और पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।

इसके बाद दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, सीओ अतुल यादव ने बताया कि परिजनों ने दोनों की मौत होने का कारण बीमारी बताई है। 

पहले भी देसी शराब मचा चुकी है तबाही  

cremation of two friends on holi festival
sad family - फोटो : अमर उजाला

कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है, जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि अत्याधिक शराब पीने से आंत व खून की नसें फट जाती हैं, लीवर फेल हो जाता है, इससे व्यक्ति की मौत तक हो जाती है। 

मार्च 2009 में गढ़ में देसी शराब पीने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। 
अप्रैल 2010 में गढ़ के गांव बलवापुर में शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई थी।
2016 में रेलवे रोड पिलखुवा पर दो रिक्शा चालकों की शराब पीने से मौत हो गई थी।  

अक्सर आते हैं मौत के मामले 
विषाक्त शराब और देसी शराब के सेवन से जिले के गांवों में मौत के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। इसके बाद भी इस जहर से जुड़े गोरखधंधे पर प्रभावी ढंग में नकेल कसना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। खादर क्षेत्र में कच्ची शराब बनाने के गोरखधंधे में जुटे माफियाओं के लिए यहां की भौगोलिक स्थिति मददगार है। दबिश पड़ने के दौरान कच्ची शराब के गोरखधंधे से जुड़े लोग गंगा नदी पार कर आसानी से दूसरी साइड भाग जाते हैं।

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