कन्हैया को पश्चिम बंगाल के चुनाव में उतारने की तैयारी में सीपीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जेएनयू से गिरफ्तार होकर 21 दिन बाद वापस लौटे कन्हैया ने अपनी राजनैतिक कार्यक्षमता का परिचय देते हुए नई तान छेड़ी है। पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा के बीच नॉन रिसर्च स्कॉलर की फैलोशिप शुरू कराने, हॉस्टल में खटमल, बस चलवाने आदि छात्रों की स्थानीय समस्याओं की जगह जेल से लौटे कन्हैया ने आरएसएस की विचारधारा, महंगाई, काला धन, जुमले आदि राष्ट्रीय मुद्दों को उठाया है।
भले ही कन्हैया कहे कि वे नेता नहीं हैं लेकिन अपने भाषण से देश के कई नेताओं को अभिभूत कर देने वाले कन्हैया को चुनावी मैदान में उतारने की शुरुआत पश्चिम बंगाल से सीपीआई ने कर ली है। वामपंथी दलों के छात्र संगठनों के वर्चस्व के चलते जेएनयू को लाल दुर्ग की भी पहचान मिली है।
केंद्र में मोदी की सरकार आने के बाद 14 साल बाद जेएनयू में संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी को आने का मौका मिला तो एबीवीपी ने देशविरोधी नारेबाजी को मुद्दा बनाकर आने वाले समय में लाल दुर्ग में भगवा फहराने की रणनीति तैयार की।
कन्हैया की तारीफ से केंद्र की बढ़ी बेचैनी
लेकिन कन्हैया की गिरफ्तारी के बाद सब उल्टा पड़ता नजर आया। कन्हैया का बृहस्पतिवार रात में जो भाषण हुआ उसके बाद कन्हैया के कायल हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर उनकी तारीफ की तो केंद्र सरकार की बेचैनी बढ़ गई।
राजनैतिक पंडितों ने तो यह भी अनुमान लगाना शुरू कर दिया कि कन्हैया को अपने साथ लेकर कुछ दल आगे बढ़ने की तैयारी कर सकते हैं। कन्हैया ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वह नेता नहीं है और टीचर बनेंगे लेकिन सच को लोगों के बीच ले जाने की बात उन्होंने कही।
दरअसल, जेएनयू विवाद के बड़ा हो जाने के बाद कन्हैया के जेल से छूटने पर मीडिया का जमावड़ा उसका भाषण टेलीकास्ट करने के लिए वहां लग गया। इसे भांपते हुए कन्हैया ने सीधे प्रधानमंत्री पर हमले बोले और राष्ट्रीय मुद्दों के जरिए खुद की लॉंचिंग राष्ट्रीय नेता के रूप में करने की कोशिश की।
कन्हैया के दम पर वापसी का सपना
उसने यहां से यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा सरकार के खिलाफ सभी दलों को एकजुट होना होगा। दरअसल, कन्हैया की इस तैयारी के बाद सीपीआई मार्क्सवादी नेता सीताराम येचुरी ने कह दिया कि कन्हैया सहित अन्य सभी वामपंथी नेता पश्चिम बंगाल में पार्टी का प्रचार करेंगे।
कुछ अन्य राज्यों के साथ पश्चिम बंगाल चुनाव 4 अप्रैल से छह चरणों में होने हैं। तीन दशकों तक वहां राज करने वाले वामपंथी दल सीपीआई (एम) से ममता बनर्जी ने सत्ता छीन ली थी। सूत्रों के अनुसार अब कन्हैया के मुद्दे व भाषण को देश भर में मिल रही ख्याति को भुनाने की कोशिश पर सीपीआई ने काम शुरू कर दिया है।
उसे उम्मीद है कि कन्हैया के दम पर उसके पश्चिम बंगाल से सत्ता वापस लेने में काफी मदद मिल सकती है।