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संकट के सिपाही: ऐसा जज्बा...चार माह का बेटा, खुद बीमार पर नहीं लिया प्रसूति अवकाश...ड्यूटी पर मुस्तैद

Sun, 26 Apr 2020 04:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 26 Apr 2020 04:50 AM IST
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मथुरा में महिला को समझाती एक कांस्टेबल.... - फोटो : अमर उजाला

कोरोना से जंग लड़े योद्धाओं में महिला सिपाहियों का त्याग हमेशा याद रखा जाएगा। उन्नाव में एक सिपाही जहां अपने मासूम बेटे को गोद में लेकर रेड जोन में ड्यूटी कर रही है वहीं मुजफ्फर नगर में तैनात एक सिपाही ने चार माह पहले ही बेटे को जन्म दिया है। खुद प्रसूति अवकाश के लिए आवेदन किया था तभी अचानक कोरोना का कहर बरपना शुरू हो गया और अपनी छुट्टी भूलकर वह ड्यूटी पर तैनात हो गईं।

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सात दिन की ड्यूटी, फिर 14 दिन तक क्वारंटीन

पूनम रामपुर जिले के गांव लालू नगला की रहने वाली हैं। पूनम के पति प्रमोद सावन भी यूपी पुलिस डायल 112 में तैनात हैं। पूनम थाने से प्रसूति अवकाश पर गई थीं। पूनम का चार माह का बेटा है। बेटे के जन्म के समय पूनम की हालत बिगड़ गई थी, जिससे डॉक्टर्स को उनका ऑपरेशन करना पड़ा था। इसके बाद वह 15 मार्च को चाइल्ड केयर अवकाश के लिए भोपा पहुंचीं थीं। इसी बीच कोरोना का कहर सामने आया था। ऐसे समय में पूनम अवकाश भूलकर अपने पति प्रमोद सावन के साथ कोरोना वायरस से छिड़ी जंग में कूद पड़ीं। पूनम चार माह के बच्चे और अस्वस्थ शरीर के  बाद भी अपने फर्ज को निभा रही हैं। पूनम ने बताया कि उनके पति और वह खुद सुबह अपनी ड्यूटी पर निकल जाते हैं। अपने बच्चे की देखभाल के लिए पूनम ने अपनी सास रामसुमनी को बुला रखा है। पूनम को उम्मीद है कि जैसे ही वह कोरोना की जंग को जीत लेंगे, उसे अवकाश प्रदान किया जाएगा।

(पूनम, कांस्टेबल, थाना भोपा, मुजफ्फरनगर)



 
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मरीजों मदद करते धीरे-धीरे से खत्म हो गया कोरोना का डर

हमीरपुर के राठ कस्बे की निवासी उपासना शारदा अस्पताल में तीन साल बिताने के बाद इस साल एक जनवरी को जिम्स में नौकरी शुरू की। 15 फरवरी को उपासना की ड्यूटी कोरोना के मरीजों की देखरेख कर रही टीम के साथ लगा दी गई। उपासना ने बताया कि शुरू में कोरोना से डर लगा। परिवार वालों ने भी वार्ड में ड्यूटी लगवाने से इंकार कर दिया, लेकिन फर्ज ने कोरोना के डर को खत्म कर दिया। टीम के साथ एक महीने तक कोरोना पीड़ितों का इलाज किया। पहले 12 घंटे की ड्यूटी थी, बाद में छह घंटे कर दी गई। इस दौरान फोन का प्रयोग नहीं किया। एक महीना काम करने के बाद उपासना को 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया।

(उपासना,  नर्स जिम्स, ग्रेटर नोएडा)


 
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घायल पिता के साथ नहीं इसका दुख...लेकिन फर्ज निभाना जरूरी

डॉ. अमित, हालात से मजबूर होने के बावजूद कोरोना संक्रमण के खिलाफ चल रही जंग में डॉक्टर ड्यूटी पर डटे हुए हैं। डॉ. अमित गुप्ता संयम से अपने काम पर लगे हुए हैं। एक माह से घर नहीं गए। जिस पिता ने उन्हें उंगली पकड़कर चलना सिखाया, वह गाजियाबाद स्थित घर मेें गिरने से घायल हो गए। कोरोना की ड्यूटी कर रहे डॉ अमित गुप्ता ने ऐसे हालात में भी अपने दिल पर पत्थर रख लिया और घर नहीं जा सके। परिवार गाजियाबाद में रहता है। उनकी तैनाती पुरा गांव के सीएचसी प्रभारी के तौर पर है। कोविड अस्पताल बनाया तो पहले उन्हें सरूरपुर और फिर खेकड़ा में तैनात किया गया। वह कहते हैं कि जनसेवा का मौका मिला है। इससे वह बेहद खुश हैं, लेकिन दुख है तो बस इतना कि मुसीबत के समय वह पिता के साथ नहीं रह पाए।  

(डॉ. अमित, खेकड़ा कोविड अस्पताल, बागपत)
 

ड्यूटी के लिए सिपाही ने टाल दी अपनी शादी

दीपक कुमार, औरैया जिले के चिकोली गांव निवासी दीपक कुमार की शादी कानपुर देहात के झींझक में तय हुई थी। काफी समय पूर्व दोनों परिवारों ने शादी का शुभ मुहूर्त निकलवाया था। सिपाही की शादी आगामी 4 मई को होनी थी। कोरोना महामारी को देखते हुए सिपाही ने अपनी शादी को फिलहाल टाल दिया है। जनपद की पुलिस कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। खाकी जान का जोखिम लेकर ड्यूटी कर रही है। सिपाही ने कहा कि पहले फर्ज जरूरी है। इस समय जनपद पुलिस कोरोना से जंग लड़ रही है। वह अपना फर्ज निभाने के बाद ही शादी करेंगे। उसके इस फैसले को दोनों परिवार के लोगों ने भी सराहा है। (

(दीपक कुमार, कांस्टेबल, झांसी)


 

संकट काल में जिम्मेदारी निभाने के लिए जान की परवाह भी नहीं

मैं पूर्वी नगर निगम के दिलशाद गार्डन समेत कई इलाकों में काम करता हूं। जान की परवाह किए बगैर मैं अपना फर्ज निभा रहा हूं। जब भी मुझे सुपरवाइजर व इंस्पेक्टर द्वारा कोरोना के मामले की जानकारी मिलती है तो मैं इसके लिए तैयार हो जाता हूं। हालांकि, उपकरणों की कमी है, लेकिन जितना भी है उतने में ही गुजारा करना पड़ता है। हमें सबसे पहले कोरोना संक्रमित के घर में पहुंचकर सावधानी का अधिक ध्यान रखना पड़ता है। कोरोना पॉजिटिव या संदिग्ध घर में पहुंचते ही मैं सबसे पहले कूड़े को बाहर ले जाता हूं। इसमें टिश्यू पेपर से लेकर इस्तेमाल किया हुआ एक कागज का टुकड़ा तक नहीं छोड़ना होता है। साथ ही लोगों के गंदे कपड़ों को भी पॉलीथिन में डालकर कूड़े में डालता हूं।        

(जोगिंदर, सफाई कर्मी, दिल्ली)
 

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