संकट के सिपाही: ऐसा जज्बा...चार माह का बेटा, खुद बीमार पर नहीं लिया प्रसूति अवकाश...ड्यूटी पर मुस्तैद
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कोरोना से जंग लड़े योद्धाओं में महिला सिपाहियों का त्याग हमेशा याद रखा जाएगा। उन्नाव में एक सिपाही जहां अपने मासूम बेटे को गोद में लेकर रेड जोन में ड्यूटी कर रही है वहीं मुजफ्फर नगर में तैनात एक सिपाही ने चार माह पहले ही बेटे को जन्म दिया है। खुद प्रसूति अवकाश के लिए आवेदन किया था तभी अचानक कोरोना का कहर बरपना शुरू हो गया और अपनी छुट्टी भूलकर वह ड्यूटी पर तैनात हो गईं।
सात दिन की ड्यूटी, फिर 14 दिन तक क्वारंटीन
(पूनम, कांस्टेबल, थाना भोपा, मुजफ्फरनगर)
मरीजों मदद करते धीरे-धीरे से खत्म हो गया कोरोना का डर
(उपासना, नर्स जिम्स, ग्रेटर नोएडा)
घायल पिता के साथ नहीं इसका दुख...लेकिन फर्ज निभाना जरूरी
डॉ. अमित, हालात से मजबूर होने के बावजूद कोरोना संक्रमण के खिलाफ चल रही जंग में डॉक्टर ड्यूटी पर डटे हुए हैं। डॉ. अमित गुप्ता संयम से अपने काम पर लगे हुए हैं। एक माह से घर नहीं गए। जिस पिता ने उन्हें उंगली पकड़कर चलना सिखाया, वह गाजियाबाद स्थित घर मेें गिरने से घायल हो गए। कोरोना की ड्यूटी कर रहे डॉ अमित गुप्ता ने ऐसे हालात में भी अपने दिल पर पत्थर रख लिया और घर नहीं जा सके। परिवार गाजियाबाद में रहता है। उनकी तैनाती पुरा गांव के सीएचसी प्रभारी के तौर पर है। कोविड अस्पताल बनाया तो पहले उन्हें सरूरपुर और फिर खेकड़ा में तैनात किया गया। वह कहते हैं कि जनसेवा का मौका मिला है। इससे वह बेहद खुश हैं, लेकिन दुख है तो बस इतना कि मुसीबत के समय वह पिता के साथ नहीं रह पाए।
(डॉ. अमित, खेकड़ा कोविड अस्पताल, बागपत)
ड्यूटी के लिए सिपाही ने टाल दी अपनी शादी
(दीपक कुमार, कांस्टेबल, झांसी)
संकट काल में जिम्मेदारी निभाने के लिए जान की परवाह भी नहीं
मैं पूर्वी नगर निगम के दिलशाद गार्डन समेत कई इलाकों में काम करता हूं। जान की परवाह किए बगैर मैं अपना फर्ज निभा रहा हूं। जब भी मुझे सुपरवाइजर व इंस्पेक्टर द्वारा कोरोना के मामले की जानकारी मिलती है तो मैं इसके लिए तैयार हो जाता हूं। हालांकि, उपकरणों की कमी है, लेकिन जितना भी है उतने में ही गुजारा करना पड़ता है। हमें सबसे पहले कोरोना संक्रमित के घर में पहुंचकर सावधानी का अधिक ध्यान रखना पड़ता है। कोरोना पॉजिटिव या संदिग्ध घर में पहुंचते ही मैं सबसे पहले कूड़े को बाहर ले जाता हूं। इसमें टिश्यू पेपर से लेकर इस्तेमाल किया हुआ एक कागज का टुकड़ा तक नहीं छोड़ना होता है। साथ ही लोगों के गंदे कपड़ों को भी पॉलीथिन में डालकर कूड़े में डालता हूं।
(जोगिंदर, सफाई कर्मी, दिल्ली)