Covid in Delhi: सीएम केजरीवाल बोले- नए वेरिएंट से निपटने के लिए पूरी तैयारी, जानें- सरकार ने क्या उठाए कदम?
Delhi Covid Update: मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को पॉजिटिव केस जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजने, एहतियाती डोज बढ़ाने, जरूरी चीजों की खरीद के लिए मंजूरी लेने, अस्पतालों में मशीनों का निरीक्षण व कर्मचारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए।
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वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे कोरोना के मामलों के बीच दिल्ली सरकार ने नए वेरिएंट बीएफ.7 से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मुख्य सचिव सहित दिल्ली सरकार के विभिन्न विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें उन्होंने दिल्ली में उपलब्ध चिकित्सा संसाधन व सुविधाओं का जायजा लिया। साथ ही, आवश्यक संसाधनों को खरीदने व कर्मचारी बढ़ाने सहित अन्य जरूरतों को पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में अभी तक नए वेरिएंट का कोई केस नहीं मिला है। फिर भी सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को पॉजिटिव केस जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजने, एहतियाती डोज बढ़ाने, जरूरी चीजों की खरीद के लिए मंजूरी लेने, अस्पतालों में मशीनों का निरीक्षण व कर्मचारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए। केजरीवाल ने कहा कि अगर जरूरत पड़ेगी तो हम रोजाना एक लाख तक टेस्ट कर सकते हैं। पिछली लहर में 25 हजार बेड तैयार किए थे। इस बार तैयारी 36 हजार बेड की है। वर्तमान में हमारे पास 928 मीट्रिक टन ऑक्सीजन स्टोर करने की क्षमता के साथ छह हजार ऑक्सीजन सिलिंडर और 15 ऑक्सीजन टैंकर हैं।
डोज बढ़ाने के दिए निर्देश
दिल्ली में अधिकांश हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को एहतियाती डोज के साथ टीका लगाया गया है। 18-59 और 60 आयु वर्ग के नागरिकों को जल्द से जल्द डोज लगाने की आवश्यकता है। तीनों श्रेणियों के 1.4 करोड़ से अधिक लोगों को एहतियाती डोज दी जानी है, जबकि 33.58 लाख से अधिक लोगों को दी जा चुकी है। 21 दिसंबर तक दिल्ली में 3.73 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं।
केंद्र के निर्देश का सख्ती से पालन
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि केंद्र सरकार से मिले दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। दिल्ली में अभी 92 फीसदी केस एक्स बीबी वेरिएंट के है। इसमें बेहद मामूली लक्षण लोगों में दिखते हैं।
एंबुलेंस-बेड बढ़ाएंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में वर्तमान में 380 एंबुलेंस तैयार हैं। नई एंबुलेंस के लिए ऑर्डर दिए गए हैं। दिल्ली के अस्पतालों में 13 जगहों पर आठ हजार से अधिक बेड तैयार करने के निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही, 1100 से अधिक केस का होम आइसोलेशन में इलाज कर सकते हैं।
ऑक्सीजन की स्थिति
दिल्ली में 928.58 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) है। इसके अतिरिक्त राज्यभर में 8 आरक्षित भंडारण टैंकों में एलएमओ का 442 मीट्रिक टन बफर है। वर्तमान में चिकित्सा संस्थानों के पास ऑक्सीजन सिलिंडरों में 224.89 मीट्रिक टन एलएमओ है। सरकार के पास रिजर्व में 6,000 अतिरिक्त ऑक्सीजन सिलिंडर हैं। दिल्ली में कुल 98 पीएसए प्लांट हैं, जिनकी क्षमता 116.96 मीट्रिक टन है। सरकार के पास प्रतिदिन 1400 सिलिंडरों को फिर से भरने के लिए 12.5 मीट्रिक टन एलएमओ की क्षमता वाले 2 क्रायोजेनिक बॉटलिंग प्लांट भी उपलब्ध हैं।
आईएमए ने जारी की सलाह
- सभी सार्वजनिक स्थानों पर फेस मास्क जरूर लगाएं।
- भीड़ वाली जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें।
- नियमित रूप से हाथ धोएं।
- विवाह, राजनीतिक या सामाजिक बैठकों से दूरी बनाएं रखें।
- अंतर्राष्ट्रीय यात्रा करने से बचें।
- बुखार, गले में खराश, खांसी, दस्त आदि जैसे किसी भी लक्षण के मामले में डॉक्टर से परामर्श लें।
- एहतियाती खुराक सहित जल्द कोविड टीकाकरण करवाएं।
एम्स, आरएमएल सहित अन्य अस्पतालों के कर्मियों को मास्क पहनने की हिदायत
एम्स ने परिसर में कर्मचारियों को मास्क पहनने की सलाह दी है। साथ ही, एक जगह पर पांच से अधिक कर्मचारी एकत्रित न होने की हिदायत भी दी गई है। वहीं, सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के कर्मियों के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। एम्स प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि काेरोना की रोकथाम के लिए कार्यस्थल पर फिर से कपड़े के फेस कवर व सर्जिकल मास्क का उपयोग अवश्य करें।
कार्यस्थल की उचित सफाई और लगातार स्वच्छता सुनिश्चित करें, विशेष रूप से बार-बार छुई जाने वाली सतहों को साफ रखें। छींकते और खांसते समय नाक और मुंह को कोहनी, रूमाल व टिश्यू से ढकें। अधिकारियों के बीच पर्याप्त दूरी सुनिश्चित करने के लिए अनुभागों/कमरों में बैठने की व्यवस्था की जाए। कैंटीन में इकट्ठा न हों। किसी भी स्थान पर पांच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने से बचें। कार्यालय परिसर में आगंतुकों के प्रवेश को अधिकतम सीमा तय हो। आगंतुकों को स्क्रीनिंग के बाद ही जाने की अनुमति दी जानी चाहिए। सभी अधिकारी अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।