बोली अदालत, मीठी बातों से बहकने की उम्र नहीं है आपकी
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दिल्ली की एक अदालत ने 22 वर्षीय युवकी से विवाह के झांसे के नाम पर रेप करने के मामले पर संदेह जताया है। अदालत ने कहा कि उसकी इतनी कम आयु नहीं है कि उसे मीठी बातें कर बहकाया जा सके। अदालत ने मामले में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया।
द्वारका स्थित न्यायमूर्ति विरेन्द्र भट्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि आरोपी ने युवती से विवाह का कोई वायदा किया था और उसे न निभाया हो।
अदालत ने अभियोजन पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया कि युवती ने पहले मात्र इस कारण पुलिस व किसी अन्य को घटना के बारे में इस कारण नहीं बताया था कि आरोपी उससे विवाह करेगा।
पढ़िए क्या है फैसले का आधार
अदालत ने कहा कि उनका मानना है कि युवती के मन में होगा कि आरोपी मात्र उसी से विवाह करेगा लेकिन स्पष्ट है कि उस पर कोई दबाव नहीं था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार युवती ने उत्तम नगर थाने में पिछले वर्ष सितंबर माह में शिकायत दर्ज करवाई थी कि आरोपी और वह एक ही कंपनी में काम करते थे। उसने कहा कि मई 2011 को युवक उसे अपने घर ले गया और चाय पीते ही वह बेहोश हो गई। होश में आने पर उसे पता चला कि उससे रेप किया गया है।
इसके बाद लगातार आरोपी उससे विवाह के नाम पर रेप करता रहा। एक बार उसके माता-पिता आरोपी के घर विवाह की बात करने गए तो उसके परिवार ने विवाह से इनकार कर दिया।
अदालत ने उसके तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता युवा है और नौकरी करती है। अदालत ने कहा कि परिपक्व अवस्था मे आशा नहीं की जा सकती कि उसे झांसा दिया गया है।