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'ससुरालियों ने बिन मांगे दिया दहेज': इस वजह से कोर्ट पहुंचा नाराज दामाद, FIR की मांग; अदालत ने सुनाया ये फैसला

Sat, 09 Nov 2024 01:48 PM IST
श्याम जी. पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: श्याम जी. Updated Sat, 09 Nov 2024 01:48 PM IST
सार

एक शख्स अपनी पत्नी के परिवार के खिलाफ कथित तौर पर बिना मांग दहेज देने के लिए आपराधिक कार्रवाई की मांग करने सेशन कोर्ट पहुंचा। कोर्ट में वह अपनी मांग को समझाने में विफल रहा। इसके बाद कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी।

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Court rejects man plea in case of not giving dowry
बिना मांगे दिया दहेज - फोटो : freepik.com

विस्तार

एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के परिवार के खिलाफ बिना मांगे दहेज देने के लिए अपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी। कोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया। शख्स अदालत को याचिका के पीछे की वजह को समझाने में विफल रहा। 

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नवजीत बुद्धिराजा एक मजिस्ट्रेट अदालत के जुलाई 2022 के आदेश के खिलाफ व्यक्ति की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। मजिस्ट्रेट अदालत ने दहेज देने को लेकर व्यक्ति के सास-ससुर और साले के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने संबंधी उसके (व्यक्ति के) अनुरोध को खारिज कर दिया था। यह भी रिकॉर्ड में आया कि उस व्यक्ति पर पत्नी के परिवार द्वारा क्रूरता का मामला चल रहा था।
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अदालत ने कहा, "जब तक मुकदमे के दौरान दोनों पक्षों द्वारा सबूत पेश नहीं किए जाते, दहेज की मांग की गई थी या नहीं इस पहलू पर प्रभावी ढंग से निर्णय नहीं लिया जा सकता है। संशोधनवादी (कुमार) का दावा है कि उन्होंने कभी भी दहेज की मांग नहीं की थी। इसके बाद भी उनके खाते में 25,000 रुपये और 46,500 रुपये की राशि भेजी गई। अपने हित को पूरा करने वाला बयान होगा।
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पांच अक्तूबर को पारित एक आदेश में न्यायाधीश बुद्धिराजा ने कहा कि उसके ससुराल वालों ने पहले ही आईपीसी की धारा 498ए (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा एक विवाहित महिला के साथ क्रूरता करना) के तहत उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। अदालत ने व्यक्ति की शिकायत के संबंध में मजिस्ट्रेट की टिप्पणियों पर कहा कि ससुराल वालों ने एफआईआर दर्ज करते समय स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि उन्होंने कुमार को दहेज दिया था और ऐसी स्वीकारोक्ति दहेज निषेध अधिनियम के तहत अपराध है।


अधिनियम की धारा 3 में दहेज लेने या देने पर दंड का प्रावधान है। अदालत ने आगे मजिस्ट्रेट की टिप्पणी दर्ज की कि कुमार ने इस तथ्य को छुपाया था कि उसकी पत्नी और ससुराल वालों ने एफआईआर में उसके खिलाफ "लगातार दहेज की मांग के गंभीर आरोप" लगाए थे।

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