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Trial By Fire: उपहार सिनेमा अग्निकांड पर बनी वेब सीरीज होगी रिलीज, कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार

Thu, 12 Jan 2023 06:10 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 12 Jan 2023 06:10 PM IST
सार

उपहार सिनेमा अग्निकांड में 60 लोग झुलसकर या दम घुटकर मारे गए थे। इस घटना पर बनी वेब सीरीज ट्रायल बाई फायर की रिलीज पर कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस हादसे के दोषी सुशील असंल ने वेब श्रृंखला की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी।

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Court refuses to ban Trial by Fire web series
ट्रायल बाई फायर - फोटो : insta

विस्तार

उच्च न्यायालय ने 1997 के उपहार सिनेमा त्रासदी पर आधारित ट्रायल बाई फायर नाम की नेटफ्लिक्स श्रृंखला की रिलीज पर अंतरिम रोक लगाने की मांग पर सुशील असंल को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा नेटफ्लिक्स श्रृंखला की रिलीज पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है। इस हादसे में करीब 60 दर्शक मारे गए थे। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने उपहार सिनेमा त्रासदी मामले में दोषी ठहराए गए सुशील अंसल की याचिका पर यह फैसला सुनाया।

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नेटफ्लिक्स पर 13 जनवरी से स्ट्रीम होने वाला यह शो 2016 की एक किताब ट्रायल बाय फायर: द ट्रेजिक टेल ऑफ द उपहार फायर ट्रेजडी पर आधारित है जिसे उपहार पीड़ित एसोसिएशन की अध्यक्ष नीलम और उनके पति शेखर कृष्णमूर्ति ने लिखा है। इस दंपति ने 1997 की त्रासदी में अपने दो बच्चे खो दिया था। हाउस ऑफ टॉकीज ने एंडेमोल शाइन इंडिया के साथ मिलकर सीरीज का निर्माण किया है।

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अधिवक्ता गौतम खजांची के माध्यम से दायर अंसल द्वारा दायर मुकदमे में कहा गया है कि श्रृंखला अपमानजनक है और निजता के अधिकार का उल्लंघन करती है। वेब श्रृंखला की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करते हुए अंसल ने दावा किया कि श्रृंखला के टीज़र के रूप में श्रृंखला ने सीधे तौर पर उनके व्यक्तित्व पर हमला किया जिसमें उनके नाम का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों में टीजर को पहले ही 1.5 मिलियन बार देखा जा चुका है जो दर्शकों पर इसके तत्काल प्रभाव को दिखाता है।

याचिका के अनुसार, 83 वर्षीय अंसल को उपहार त्रासदी से उनके जुड़ाव के लिए कानूनी और सामाजिक रूप से दंडित किया गया है और उनके परिवार को भी बड़े पैमाने पर सहना पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने त्रासदी के शिकार परिवारों से माफी मांगी है और गहरा खेद भी व्यक्त किया है। उन्होंने अनुरोध किया कि उन्हें जनता द्वारा बार-बार डांटे जाने के लिए हमेशा के लिए उत्तरदायी नहीं बनाया जाना चाहिए, खासकर सजा पूरी करने के बाद।

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अंसल ने श्रृंखला के ट्रेलर और टीज़र को देखने के बाद तर्क दिया उनके चित्रण में उनकी प्रतिष्ठा को अत्यधिक और अपूरणीय क्षति पहुंचाने की प्रवृत्ति प्रतीत होती है जो पहले ही धूमिल हो चुकी है। उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अपने जीवन के अधिकार के बारे में भी बताया।

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