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Delhi: कोर्ट ने फ्लैट के नाम पर धोखाधड़ी करने वाली कंपनी समेत अन्य के खिलाफ दिए एफआईआर के आदेश, पढ़ें मामला

Mon, 03 Mar 2025 08:17 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 03 Mar 2025 08:17 PM IST
सार

कोर्ट ने पुलिस को बीपीटीपी लिमिटेड और उसके अधिकारियों के खिलाफ बीएनएसस की धारा 316(2), 318(4), और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, जांच अधिकारी को बैंक की इस अवैध लेनदेन में भूमिका की जांच करने और यह तय करने के लिए कहा गया है।

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Court ordered FIR against company and others who cheated in name of flats
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

पटियाला हाउस कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीपीटीपी लिमिटेड और उसके अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला एक ऐसे फ्लैट की धोखाधड़ीपूर्ण बिक्री से संबंधित है जिसे पहले ही आवंटित किया जा चुका था और बंधक रखा गया था। कोर्ट के आदेश में एक प्राइवेट बैंक की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि बैंक ने ऋण और बंधक समझौतों के उल्लंघन के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की।

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न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) यशदीप चहल द्वारा पारित आदेश के अनुसार, शिकायतकर्ता जयंत गुप्ता ने गुरुग्राम, हरियाणा में बीपीटीपी के "टेरा" प्रोजेक्ट में एक फ्लैट (टी25-303) बुक किया था और कुल बिक्री राशि का 95% से अधिक, यानी 1.34 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया था। शिकायतकर्ता ने एचडीएफसी बैंक से एक ऋण लिया था, जो सीधे बिल्डर को हस्तांतरित किया गया था। हालांकि, पूरी भुगतान राशि प्राप्त करने के बावजूद, बीपीटीपी लिमिटेड ने जनवरी 2017 की निर्धारित समय-सीमा तक फ्लैट का कब्जा नहीं दिया।

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2024 में शिकायतकर्ता को पता चला कि तीसरे पक्ष को बेच दिया गया फ्लैट
चौंकाने वाली बात यह है कि जुलाई 2024 में शिकायतकर्ता को पता चला कि उसी फ्लैट को उनकी जानकारी या सहमति के बिना किसी तीसरे पक्ष को अवैध रूप से बेच दिया गया था। आगे की जांच में यह खुलासा हुआ कि संपत्ति बैंक के पास बंधक रखी गई थी, फिर भी बिल्डर ने बैंक की मंजूरी के बिना बिक्री कर दी। इस खुले उल्लंघन के बावजूद, बैंक ने बिल्डर के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की और शिकायतकर्ता से ईएमआई वसूलता रहा, भले ही संपत्ति अब उनके नाम पर नहीं थी।

कोर्ट ने पाया कि बैंक की निष्क्रियता बीपीटीपी लिमिटेड के साथ मिलीभगत का संकेत देती है। आदेश में बताया गया कि बैंक की ओर से शिकायतकर्ता के हितों की रक्षा करने में विफलता और अवैध बिक्री के बावजूद ईएमआई वसूलना एक बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करती है। न्यायाधीश ने उल्लेख किया कि इन कार्रवाइयों से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 316 के तहत आपराधिक विश्वासघात का मामला बनता है।

इन निष्कर्षों के आधार पर, कोर्ट ने पुलिस को बीपीटीपी लिमिटेड और उसके अधिकारियों के खिलाफ बीएनएसस की धारा 316(2), 318(4), और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, जांच अधिकारी को बैंक की इस अवैध लेनदेन में भूमिका की जांच करने और यह तय करने के लिए कहा गया है कि क्या वित्तीय संस्थान के खिलाफ भी आरोप जोड़े जाने चाहिए।

'बिल्डर और बैंक ने शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा पहुंचाई'
शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता शिवेक त्रेहान ने किया, जिन्होंने तर्क दिया कि बिल्डर और बैंक की कार्रवाई ने घर खरीदार को गंभीर वित्तीय और मानसिक पीड़ा पहुंचाई है। यह मामला एक बार फिर बिल्डर-बैंकर गठजोड़ को उजागर करता है, जो घर खरीदारों को आर्थिक संकट में डालता है। शिकायतकर्ता अभी भी उस संपत्ति के लिए ईएमआई का भुगतान कर रहा है, जिसे अवैध रूप से बेच दिया गया है, जिससे रियल एस्टेट वित्तपोषण और बैंकिंग प्रथाओं में सख्त नियामक निगरानी की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

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