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पति-पत्नी साथ रहे न रहें देना पड़ेगा बच्चों का खर्च
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 04 Mar 2014 02:15 AM IST
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बच्चों को माता-पिता दोनों से खर्च लेने का अधिकार है। यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि बच्चे, मां के साथ रहते हैं इसलिए पिता खर्च देने के लिए जिम्मेदार नहीं है।
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कड़कड़डूमा अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए पंजाब के डॉ. बलजीत सिंह होरा को हर माह अपनी दो बेटियों को 60 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया। हालांकि कोर्ट ने डॉक्टर के पत्नी की मांग को खारिज कर दिया, क्योंकि वह खुद डॉक्टर हैं और अपना खर्च उठा सकती हैं।
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कड़कड़डूमा अदालत की महानगर दंडाधिकारी वंदना जैन ने डॉ बलजीत सिंह होरा को निर्देश दिया है कि वह हर माह अपनी ग्यारह व छह वर्षीय बेटियों को 30-30 हजार रुपये खर्च के तौर पर देंगे। अदालत ने डॉ होरा के इस तर्क को खारिज कर दिया कि बेटियां उनके साथ नहीं रहतीं इसलिए वह खर्च देने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह तय कानून है कि बच्चों को माता-पिता दोनों से खर्च लेने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि प्रतिवादी पिता होने के नाते दोनों बेटियों का खर्च उठाने के लिए बाध्य है। जहां तक उसकी पत्नी का सवाल है, वह खुद अपनी देखभाल कर रही हैं। वह अपनी दोनों बेटियों का भी खर्च उठा रही हैं।
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पेश मामले के अनुसार डॉ बलजीत सिंह होरा पंजाब के एक कॉलेज में दंत चिकित्सा के प्रोफेसर हैं और अपना क्लीनिक भी चलाते हैं। डॉ. बलजीत व सोनिया की मुलाकात कॉलेज के दिनों में हुई थी। दोनों ने वर्ष 2000 में शादी की थी। डॉ. सोनिया, दिल्ली में अपनी बेटियों के साथ रहती हैं और उन्होंने याचिका दायर कर अपने व बेटियों के लिए गुजारा भत्ता दिलाने की मांग की थी।
महिला ने याचिका में कहा कि उसका पति हर माह तीन-चार लाख रुपये कमाता था जबकि उसने शादी के बाद उसे प्रैक्टिस नहीं करने दी। दूसरी ओर डॉ. होरा ने कहा कि वह केवल 50 हजार रुपये प्रति माह कमाते हैं और उन्होंने कभी भी पत्नी को प्रैक्टिस करने से नहीं रोका।