'बाजार में आलू-प्याज की तरह बिक रहे हैं बच्चे'
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‘बच्चा बाजार में आलू-प्याज की तरह बच्चे बेचे जा रहे हैं। बच्चे बेचने का बड़ा रैकेट कई राज्यों में चल रहा है।’ यह टिप्पणी बृहस्पतिवार को रोहिणी जिला अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. कामिनी लाऊ ने एक माह की बच्ची के खरीद-फरोख्त मामले में की।
अदालत ने बच्ची से क्रूरतापूर्ण व्यवहार के लिए रोहिणी स्थित एक अस्पताल की मिड वाइफ संतोष और सहयोगी ओटी अटेंडेंट इस्लामुद्दीन व अनीता को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत तीन-तीन माह कैद की सजा सुनाई है।
वहीं, अदालत ने ऐसे मामलों के संबंध में कोई कानून नहीं होने से तीनों को आपराधिक साजिश, अपहरण, बच्चों को छोड़ देने और मानव तस्करी के आरोपों से बरी कर दिया।
अब तक क्यों नहीं बना कोई कानून?
अदालत ने कहा कि यह कृत्य चाहे कितना ही अनैतिक है, लेकिन इसके लिए भारतीय दंड संहिता में कोई सजा नहीं है। अदालत ने विधि आयोग की 21 साल पुरानी उस सिफारिश पर जोर दिया जिसमें महिलाओं व बच्चों की खरीद-फरोख्त के मामलों में सात साल कैद की अनुशंसा की गई थी।
अदालत ने कहा कि आयोग ने 1993 में सिफारिश की थी और सरकार ने आज तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। पेश मामले के मुताबिक, 5 जुलाई 2013 को बच्ची की मां उसे संतोष को सौंपकर चली गई थी।
आरोप है कि संतोष ने बच्ची को एक लाख रुपये में बेचने की योजना बनाई, लेकिन इससे पहले ही पुलिस को भनक लग गई। पुलिस ने महिला सिपाहियों को नकली ग्राहक बनाकर भेजा और संतोष को गिरफ्तार कर लिया। बाद में इस्लामुद्दीन व अनीता को गिरफ्तार किया गया।